आस्ट्रेलिया की मैक्वेरी यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने की यह दुर्लभ खोज
भविष्य में रोबोटिक्स की फील्ड में नई तकनीकों के विकास में मिलेगी मदद

एनवायरमेंट पल्स डेस्क
पिछले जून महीने में वैज्ञानिकों ने एक ऐसी मकड़ी की खोज की है, जिसके बारे में सुनकर हैरानी होती है। आस्ट्रेलिया की मैक्वेरी यूनिवर्सिटी के रिसर्च अध्येताओं ने उत्तरी क्वींस लैंड के वर्षा वनों में एक ऐसी मकड़ी को खोजा है, जो अपने शिकार को हवा में उछाल देती है। इसका नाम इन अध्येताओं ने ‘बैलिस्टा’ मकड़ी रखा है। ‘बैलिस्टा’ एक मध्यकालीन रोमन हथियार है, जो एक गुलेल की तरह होता है। इसलिए इस मकड़ी को बैलिस्टा’ या गुलेल वाली मकड़ी के नाम से जाना जाने लगा है (गुलेल वह चीज है जिससे अपने बचपन में हम-आप किसी को पत्थर मारने का काम करते थे)। यह खोज जानी-मानी साइंस मैगजीन ‘करंट बॉयोलाजी’ में प्रकाशित हुई है।
इस मकड़ी का शिकार करने का अपना अलग ढंग हैं। यह मकड़ी रेशम के धागों को बहुत अधिक खींचकर एक ऐसा जाल बुनती है, जो एक दबी हुई स्प्रिंग की तरह एनर्जी इकट्ठी कर लेता है। मजे की बात यह है कि इसमें शिकार खुद-ब-खुद फंसता है, मकड़ी को उस पर हमला नहीं करना पड़ता। सामान्य मामलों में मकड़ी अपने शिकार पर हमला करती है। यहां पर शिकार अपने जाल को खुद ही सक्रिय करता है। जैसे मान लें कि शिकार एक चींटी है। तो चींटी जैसे ही इस रेशमी जाल को काटती है, तने हुए धागे टूट जाते हैं और चींटी हवा में उछलते हुए ऊपर जाकर मुख्य जाल में फंस जाती है। नीचे साइंस मैगजीन ‘करंट बॉयोलाजी’ का इंस्टाग्राम लिंक देखें।
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शोध में वैज्ञानिकों ने यह भी पाया है कि यह शिकारी मकड़ी अपने जाले पर कोई खास रासायनिक गंध छोड़ती है, जिससे चींटियां इसकी तरफ आकर्षित होकर जाले को काटने के लिए आएं। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह खोज भविष्य में रोबोटिक्स की फील्ड में नई तकनीकों के विकास में प्रेरक बन सकती है।


