खान मंत्रालय लगातार बढ़ा रहा क्रिटिकल मिनरल की खोज (एक्सप्लोरेशन) का दायरा
इस फील्ड में चीन के एकाधिकार को तोड़ने में लगी हुई है केंद्र सरकार

एनवायरमेंट पल्स डेस्क
नई दिल्ली। चीन को ठेंगा दिखाते हुए भारत सरकार ने पिछले दिनों जब अपने 56 क्रिटिकल मिनरल बॉक्स की नीलामी पूरी कर ली। इस कदम से क्रिटिकल मिनरल सिक्योरिटी की फील्ड में भारत का दबदबा बढ़ेगा।
क्रिटिकल मिनरल्स का इस्तेमाल क्लीन एनर्जी टेक्नालोजी, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, इलेक्ट्रानिक्स, डिफेंस टेक्नालोजी, रिन्यूएबल एनर्जी सिस्टम्स और दूसके कई अन्य रणनीतिक सेक्टर्स में होता है। अभी तक इस पर चीन का एकाधिकार था। इन क्रिटिकल मिनरल्स ग्रेफाइट, रेयर अर्थ एलिमेंट्स, वैनेडियम, टाइटेनियम, ग्लौकोनाइट और रॉक फॉस्फेट जैसे मिनरल शामिल हैं।
खान मंत्रालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार इसे सफलतापूर्वक नीलामी के किए गए क्रिटिकल और स्ट्रेटेजिक मिनरल ब्लॉक के साथ इनकी कुल संख्या 56 हो गई है।
मंत्रालय ने बताया है कि यह 63 प्रतिशत से ज्यादा की नीलामी दर को दिखाता है। इसमें केंद्र सरकार की ओर से नीलामी के लिए लिए गए 88 खास मिनरल ब्लॉक में से 56 ब्लॉक नीलाम किए गए।
इसके अलावा, इस नए चरण में गुजरात, तेलंगाना व उत्तराखंड में केंद्र की ओर से क्रिटिकल मिनरल ब्लॉक की पहली बार नीलामी की गई। इससे पूरे देश में क्रिटिकल मिनरल की खोज (एक्सप्लोरेशन) का दायरा बढ़ रहा है।
एक्सप्लोरेशन लाइसेंस नीलामी का दूसरा चरण भी पूरा
सरकार ने बताया कि यह नीलामी ‘माइन्स एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट, 1957’ और ‘मिनरल (ऑक्शन) रूल्स, 2015’ (समय-समय पर किए गए संशोधनों के साथ) के प्रावधानों के तहत की गई।
क्रिटिकल मिनरल की नीलामी के साथ मिनिस्ट्री ने एक्सप्लोरेशन लाइसेंस नीलामी का दूसरा चरण भी पूरा किया। इसके तहत पहली बार अरुणाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश और ओडिशा में भी यह व्यवस्था लागू की गई ताकि जरूरी और जमीन में गहराई पर मौजूद मिनरल की खोज को बढ़ावा मिल सके। इससे ‘जरूरी और गहराई में मौजूद मिनरल की खोज के लिए नए मौके खुलेंगे।’
एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के अनुसार उल्लेखनीय है कि क्रिटिकल मिनरल में भारत के पास दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा भंडार है, लेकिन उत्पादन में बहुत पीछे हैं। 2024 में भारत में सिर्फ 2900 टन ही उत्पादन हुआ जबकि चीन ने 2.7 लाख टन. इसे देखते हुए भारत सरकार ने ‘नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन‘ शुरू किया है।
अभी तक रेअर अर्थ मार्केट पर चीन का एकाधिकार था। अब वह रिकार्ड टूट रहा है। क्योंकि भारत सरकार का इन अमूल्य खजानों पर है।


