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22 वीं सदी तक कहीं ग्लेशियर भी डायनासोर की तरह इतिहास के पन्नों में कैद न हो जाएं 

Environment Pulse
Last updated: July 8, 2026 6:14 pm
Environment Pulse
Published: July 2, 2026
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एनवायरमेंट पल्स डेस्क

विगत कुछ वर्षों में पर्यावरण के परिपेक्ष में ग्लोबल वार्मिंग एक गंभीर मुद्दा बन कर उभरा है. न केवल राष्ट्र स्तर  पे अंतर्राष्ट्रीय स्तर  पर भी कई बड़े सम्मेलनों में यह चर्चा का केंद्र बिंदु बन कर उभरा है। न केवल प्राकृतिक आपदा  बल्कि ग्लेशियर के पिघलने के भी कई संकेत समय समय पर शोधकर्ताओं ने उजागर किया है. इसी कड़ी में एक नए अध्ययन में पाया गया है की स्विस ग्लेशियरों पर बर्फ और आइस बहुत जल्द पिघल रहा है।

विशेषज्ञों का यह भी कहना है की आल्प्स में बर्फ़ पिघलने की ‘बहुत ज़्यादा’ रफ़्तार के बीच,  पिछली सर्दियों में स्विट्ज़रलैंड के ग्लेशियरों पर जमा हुई सारी बर्फ़ जल्द  पिघल जाएगी। अगर  स्विट्ज़रलैंड में ग्लेशियर मॉनिटरिंग ग्लामॉस  के प्रमुख की मानें तो  यूरोप में हीटवेव के कारण स्विस ग्लेशियरों की बहुत ज़्यादा बर्फ़ पिघलने वाली है।

एक ओर जहां पर्यावरण के बदलते स्वरूप को लेकर कई लोगों ने चिंता ज़ाहिर की है, वहीं  स्विट्ज़रलैंड के ग्लेशियरों पर पिछली सर्दियों में जमा हुई सारी बर्फ़  पिघल जाएगी। यह ‘ग्लेशियर लॉस डे’  के रिकॉर्ड में आने वाली तारीख चिंताजनक है।

अगर विशेषज्ञों की माने तो  अक्टूबर तक  बर्फ़ पिघलने से स्विस आल्प्स ग्लेशियरों का आकार छोटा हो जाएगा। ऐसा परिदृश्य 2000 और 2022 में देखा गया था। ग्लामॉस नेटवर्क के प्रमुख मैथियास हुस ने अपने  एएफपी के साथ साक्षात्कार  में कहा है की  “हम पूरे आल्प्स में बर्फ़ और आइस के बहुत तेज़ी से पिघलने की प्रक्रिया देख रहे हैं,” क्योंकि कई स्विस मौसम केंद्रों ने अब तक के नए रिकॉर्ड दर्ज किए हैं।

अगर पिछले पूरे सदी का आंकलन किया जाए तो यह रोचक मोड़ इस साल अगस्त में आया है। अगर जलवायु परिवर्तन की बात करें तो देश के ग्लेशियरों के लिए यह चिंताजनक विषय है।

राइन और रोन – यूरोप की दो प्रमुख नदियाँ – में बहने वाला ज़्यादातर पानी आल्प्स के ग्लेशियरों से आता है।

10 दिनों में “वहाँ लंबवत दिशा में एक मीटर बर्फ़ पिघल गई – यानी सिर्फ़ पिछले 10 दिनों में एक मीटर बर्फ़ पिघली है”. यह सब हीटवेव का असर है। अगर जानकारों की मानें तो  2026 का साल “हैरानी की हद तक” 2022 जैसा ही था. स्विस आल्प्स में ग्लेशियर लगभग 170 साल पहले पीछे हटने लगे थे—शुरुआत में धीरे-धीरे—लेकिन हाल के दशकों में जलवायु के गर्म होने के साथ उनके पिघलने की रफ़्तार काफ़ी बढ़ गई है।

एक आंकड़े के अनुसार,  2000 और 2024 के बीच स्विस ग्लेशियरों का आयतन 38% कम हो गया।

चिंता जताते हुए – एक शोधकर्ता ने कहा – “अगर तापमान इसी तरह बढ़ता रहा जैसा पिछले कुछ दशकों में बढ़ा है, तो 2100 तक हमारे पास बर्फ के बस कुछ छोटे-मोटे टुकड़े ही बचेंगे।”

 

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