जलवायु परिवर्तन के कारण खेती और वर्षा के पारंपरिक चक्र में बढ़ती अनिश्चितता से निपटने के लिए मोजाम्बिक सरकार ने किसानों की बारिश पर निर्भरता कम करने हेतु ग्रीनहाउस, बोरहोल और आधुनिक सिंचाई प्रणालियों को बढ़ावा देना शुरू कर दिया है। कृषि मंत्रालय के राष्ट्रीय निदेशक जाबुला जिबिया ने दक्षिणी मापुतो प्रांत में अंतरराष्ट्रीय कृषि विकास कोष (IFAD) और जर्मनी तथा लक्जमबर्ग के संसदीय प्रतिनिधिमंडल के दौरे के दौरान बताया कि सरकार का लक्ष्य सालभर सब्जियों की खेती सुनिश्चित करना और जलवायु संकट के प्रति किसानों की संवेदनशीलता को घटाना है।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क। जलवायु परिवर्तन के कारण कृषि उत्पादन और खेती के पारंपरिक चक्र में बढ़ती अनिश्चितता के बीच मोजाम्बिक सरकार अब किसानों को बारिश पर निर्भरता से बाहर निकालने के लिए ग्रीनहाउस, बोरहोल और सिंचाई जैसी वैकल्पिक व्यवस्थाओं को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है।
सरकार का मानना है कि इन उपायों से सब्जियों की सालभर खेती संभव होगी और जलवायु संकट के कारण किसानों की बढ़ती संवेदनशीलता को कम किया जा सकेगा।
मोजाम्बिक के कृषि मंत्रालय के राष्ट्रीय कृषि निदेशक जाबुला जिबिया ने दक्षिणी मापुतो प्रांत के मन्हीसा जिले में अंतरराष्ट्रीय कृषि विकास कोष (IFAD) के सहयोग से संचालित परियोजनाओं के निरीक्षण के दौरान यह जानकारी दी।
इस दौरान जर्मनी और लक्जमबर्ग के सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने परियोजनाओं का दौरा किया और स्थानीय किसानों से बातचीत कर उनके अनुभवों को जाना। जिबिया ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के चलते केवल वर्षा आधारित खेती पर निर्भर रहना किसानों के लिए लगातार चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।
ऐसे में सरकार का लक्ष्य अधिक से अधिक किसानों को ऐसी कृषि पद्धतियों की ओर ले जाना है, जिनमें उत्पादन को लेकर अधिक निश्चितता हो और खेती लंबे समय तक टिकाऊ बनी रहे। उन्होंने कहा कि इस दिशा में क्षतिग्रस्त सिंचाई प्रणालियों का पुनर्वास और नए बोरहोल की खुदाई महत्वपूर्ण कदम हैं। बाढ़ से प्रभावित सिंचाई ढांचे को दोबारा तैयार करने के साथ-साथ अधिक संख्या में बोरहोल विकसित किए जाने से किसानों को बारिश के अलावा सिंचाई के वैकल्पिक स्रोत उपलब्ध हो सकेंगे।
सरकार की रणनीति में गुणवत्तापूर्ण स्थानीय बीजों की उपलब्धता बढ़ाना भी शामिल है। इसके लिए देश के कृषि अनुसंधान संस्थान के साथ मिलकर प्रथम पीढ़ी के बीजों का उत्पादन किया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, इन बीजों की पर्याप्त उपलब्धता स्थानीय स्तर पर प्रमाणित बीजों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए जरूरी है।
जिबिया ने कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए कृषि मशीनीकरण को फिर से मजबूत करने की जरूरत पर भी जोर दिया। उनका कहना है कि बेहतर सिंचाई और बीजों के साथ आधुनिक कृषि उपकरणों की उपलब्धता भी किसानों की उत्पादन क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
सरकार किसानों के प्रशिक्षण और कृषि विस्तार सेवाओं को मजबूत करने को भी प्राथमिकता दे रही है। जिबिया के अनुसार, किसानों तक तकनीक पहुंचाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें उस तकनीक के सही इस्तेमाल का ज्ञान देना भी जरूरी है। कृषि विस्तार सेवाओं के माध्यम से किसानों को नई तकनीकों और टिकाऊ कृषि पद्धतियों के बारे में प्रशिक्षण देने पर जोर दिया जा रहा है। यूरोपीय सांसदों के दौरे का उद्देश्य परियोजनाओं के वास्तविक प्रभाव को समझना भी था।
प्रतिनिधिमंडल ने किसानों से सीधे बातचीत की और यह जाना कि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने तथा कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए स्थानीय स्तर पर कौन से उपाय अपनाए जा रहे हैं।
जर्मनी के सांसद जोहान्स वैगनर ने कहा कि यह अनुभव दर्शाता है कि जब अंतरराष्ट्रीय सहयोग का लाभ सीधे समुदायों तक पहुंचता है, तो स्थानीय लोग शुरुआती सहायता के आधार पर परियोजनाओं को आगे बढ़ाने और अधिक लोगों तक उसका लाभ पहुंचाने में सक्षम होते हैं। उन्होंने कहा कि वह जर्मनी और लक्जमबर्ग में मोजाम्बिक की इन परियोजनाओं के बारे में जागरूकता बढ़ाने और देश के लिए निरंतर अंतरराष्ट्रीय सहयोग की वकालत करने का प्रयास करेंगे।
मोजाम्बिक की यह पहल बताती है कि जलवायु परिवर्तन के दौर में कृषि को केवल वर्षा पर निर्भर रखने के बजाय सिंचाई, संरक्षित खेती, गुणवत्तापूर्ण बीज, मशीनीकरण और किसान प्रशिक्षण को एक साथ मजबूत करना खाद्य उत्पादन को अधिक स्थिर और टिकाऊ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण हो सकता है।
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