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Environment Pulse > ईको सिस्टम > हवा > राजस्थान में जोजरी नदी के 100 मीटर दायरे में निर्माण पर सुप्रीम कोर्ट की रोक
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राजस्थान में जोजरी नदी के 100 मीटर दायरे में निर्माण पर सुप्रीम कोर्ट की रोक

Environment Pulse
Last updated: August 28, 2026 8:48 pm
Environment Pulse
Published: August 28, 2026
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राजस्थान की जोजरी नदी और उसके पारिस्थितिकी तंत्र को प्रदूषण व अतिक्रमण से बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक कड़ा अंतरिम आदेश जारी करते हुए नदी के 100 मीटर के दायरे में सभी निर्माण और विकास गतिविधियों पर रोक लगा दी है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने यह स्वतः संज्ञान मामला सुनते हुए कहा कि गंभीर प्रदूषण के कारण करीब 20 लाख लोग प्रभावित हो रहे हैं।

एनवायरमेंट पल्स डेस्क। राजस्थान की जोजरी नदी और उसके नाजुक नदी तंत्र को प्रदूषण और अतिक्रमण से बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा अंतरिम आदेश जारी किया है। शीर्ष अदालत ने नदी के किनारे से 100 मीटर के दायरे में किसी भी तरह के निर्माण और विकास गतिविधियों पर रोक लगा दी है।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने यह आदेश मौजूदा नदी तंत्र में गंभीर प्रदूषण से जुड़े स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई के दौरान दिया। अदालत ने कहा कि मौसमी जोजरी नदी में प्रदूषण के कारण करीब 20 लाख लोग प्रभावित हो रहे हैं और नदी के पारिस्थितिक तंत्र को व्यापक नुकसान पहुंचा है।

पीठ ने कहा कि जब तक वैज्ञानिक अध्ययन के जरिए नदी की हाई फ्लड लाइन और आवश्यक पारिस्थितिक बफर जोन की पहचान एवं सीमांकन नहीं हो जाता, तब तक नदी तंत्र की सुरक्षा के लिए एक स्पष्ट और मापने योग्य संरक्षण क्षेत्र तय करना जरूरी है।

इसी के तहत अदालत ने नदी के किनारे से 100 मीटर के भीतर किसी भी प्रकार की निर्माण या विकास गतिविधि की अनुमति नहीं देने का निर्देश दिया। अदालत ने प्रदूषण के संभावित खतरे को देखते हुए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय भी लागू किए हैं।

मौजूदा बाढ़ रेखा की पहचान होने की स्थिति में उसके दोनों ओर 500 मीटर के दायरे में खतरनाक उद्योगों तथा ऐसी किसी भी गतिविधि पर रोक रहेगी, जिससे नदी के पानी या नदी तंत्र में प्रदूषण, संदूषण या अन्य प्रकार का नुकसान हो सकता है।

जहां बाढ़ रेखा निर्धारित नहीं है, वहां नदी के मौजूदा प्रवाह मार्ग को आधार माना जाएगा। ये प्रतिबंध तब तक प्रभावी रहेंगे, जब तक वैज्ञानिक अध्ययन पूरा कर हाई फ्लड लाइन और पारिस्थितिक बफर जोन का निर्धारण एवं सीमांकन नहीं कर दिया जाता। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर को निर्धारित की है।

जोजरी नदी जोधपुर से होकर बहती है और बालोतरा के पास बांडी तथा लूणी नदियों में मिलती है। लंबे समय से औद्योगिक इकाइयों और नगर निकायों से निकलने वाले प्रदूषित अपशिष्ट के कारण नदी गंभीर प्रदूषण की समस्या से जूझ रही है।

सुप्रीम कोर्ट का ताजा आदेश जोजरी-बांडी-लूणी नदी तंत्र को पुनर्जीवित करने के लिए चल रहे प्रयासों का हिस्सा है। इससे पहले इसी महीने शीर्ष अदालत ने राजस्थान सरकार को प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक एकीकृत समन्वय समूह (Integrated Coordination Group) गठित करने का निर्देश दिया था।

अदालत के इस आदेश को राजस्थान में जल संसाधनों और नदी पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। बढ़ते औद्योगिक और शहरी प्रदूषण के बीच शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि नदी तंत्र की पर्यावरणीय सुरक्षा को विकास गतिविधियों पर प्राथमिकता दी जानी होगी।

Also Read: ओलों की मार के बीच हाई-डेंसिटी बागानों पर कश्मीर की नजर

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TAGGED:High Flood Line DemarcationIndustrial Waste BanJodhpur Balotra EnvironmentJojari River PollutionRajasthan River EcosystemRiver Conservation RajasthanSupreme Court Interim Order
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