By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
Environment PulseEnvironment PulseEnvironment Pulse
Notification Show More
Font ResizerAa
  • ईको सिस्टम
    • जल
    • जंगल
    • जमीन
    • हवा
    • खनिज
    • जैव-विविधता
    • गतिविधियां
  • कचरा-प्रबंधन
    • ग्रीन बिजनेस
    • रीसाइकलिंग
    • इन्नोवेशन
    • इनिशिएटिव्स
  • फ्यूचर ग्रीन
    • ऊर्जा
    • सस्टेनिबिलिटी
    • इलेक्ट्रिक व्हीकल
    • कृषि एवं खाद्य
  • ओपिनियन
    • विचार
    • इम्पैक्ट फीचर
    • स्टोरी
  • मल्टीमीडिया
    • वीडियो
Reading: सुरक्षित उपज से लेकर बढ़ते निर्यात तक: संसद में पेश आंकड़े क्या बताते हैं
Share
Font ResizerAa
Environment PulseEnvironment Pulse
  • ईको सिस्टम
  • कचरा-प्रबंधन
  • फ्यूचर ग्रीन
  • ओपिनियन
  • मल्टीमीडिया
Search
  • ईको सिस्टम
    • जल
    • जंगल
    • जमीन
    • हवा
    • खनिज
    • जैव-विविधता
    • गतिविधियां
  • कचरा-प्रबंधन
    • ग्रीन बिजनेस
    • रीसाइकलिंग
    • इन्नोवेशन
    • इनिशिएटिव्स
  • फ्यूचर ग्रीन
    • ऊर्जा
    • सस्टेनिबिलिटी
    • इलेक्ट्रिक व्हीकल
    • कृषि एवं खाद्य
  • ओपिनियन
    • विचार
    • इम्पैक्ट फीचर
    • स्टोरी
  • मल्टीमीडिया
    • वीडियो
Have an existing account? Sign In
Follow US
Environment Pulse > ईको सिस्टम > खनिज > सुरक्षित उपज से लेकर बढ़ते निर्यात तक: संसद में पेश आंकड़े क्या बताते हैं
AI Image - AGRI PARL REPORT
ईको सिस्टमखनिजजमीनजलजैव-विविधता

सुरक्षित उपज से लेकर बढ़ते निर्यात तक: संसद में पेश आंकड़े क्या बताते हैं

Environment Pulse
Last updated: August 14, 2026 4:59 pm
Environment Pulse
Published: August 14, 2026
Share
AI Image - AGRI PARL REPORT
SHARE

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा संसद में पेश आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन वर्षों (2023-24 से 2025-26) में देशभर से जांचे गए फल-सब्जियों के 70,652 नमूनों में से 97% नमूने खाद्य सुरक्षा मानकों (FSSAI) पर खरे उतरे। केवल 3.1% नमूनों में कीटनाशक तय सीमा से अधिक पाए गए।

 

एनवायरमेंट पल्स डेस्क। भारतीय कृषि के बारे में संसद में हाल ही में पेश किए गए आंकड़ों से एक राहत भरी तस्वीर सामने आई है—देश में बिकने वाले फल-सब्जियों का बड़ा हिस्सा तय खाद्य सुरक्षा मानकों पर खरा उतर रहा है।

इसके साथ ही फल-सब्जी निर्यात में भी उल्लेखनीय बढ़त दर्ज हुई है, और साथ-साथ आयात, डिजिटल निगरानी तथा घरेलू उत्पादन बढ़ाने की कोशिशें भी जारी हैं।

‘जहरीली’ सब्जियों की आशंका, कितनी सही आमतौर पर यह चिंता जताई जाती रही है कि बाजार में मिलने वाले फल-सब्जियों में कीटनाशकों की मात्रा खतरनाक स्तर तक पहुंच चुकी है।

लेकिन संसद में पेश ताजा आंकड़े इस आशंका को काफी हद तक कम करते नजर आते हैं।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लोकसभा को बताया कि पिछले तीन वर्षों में देशभर से लिए गए नमूनों में से करीब 97% उपज राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मानकों के दायरे में पूरी तरह खरी उतरी।

2023-24 से 2025-26 के बीच देशभर में कुल 70,652 नमूनों की जांच की गई, जिनमें से सिर्फ 3.1% यानी 2,223 नमूने ही भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) द्वारा तय अधिकतम अवशेष सीमा से अधिक पाए गए। ये आंकड़े उस आम धारणा को चुनौती देते हैं कि शहरी मंडियों में दूषित सब्जियों की भरमार है।

2005 से चल रही राष्ट्रीय स्तर पर कीटनाशक अवशेष निगरानी योजना के तहत अब जीपीएस मैपिंग के जरिए दूषित उपज का पता सीधे उस खेत तक लगाया जा सकता है, जहां से वह आई है—ताकि सुरक्षित कृषि पद्धतियां अपनाई जा सकें। निर्यात में मजबूत बढ़त इसी दौरान भारत के ताजा फल-सब्जी निर्यात का दायरा भी काफी बढ़ा है।

वर्ष 2025-26 में भारत ने 58.2 लाख टन फल-सब्जियों का निर्यात किया, जिनकी कीमत करीब 3.93 अरब डॉलर रही—जबकि 2016-17 में यह आंकड़ा 2.45 अरब डॉलर था। हालांकि घरेलू मांग बढ़ने के साथ इसी अवधि में आयात भी बढ़कर 3.82 अरब डॉलर तक पहुंच गया।

डिजिटल निगरानी और आपूर्ति व्यवस्था में बदलाव फसल उत्पादन के सटीक आकलन और बेहतर खेत प्रबंधन के लिए केंद्र सरकार ने 23 राज्यों में डिजिटल जनरल क्रॉप एस्टिमेशन सर्वे लागू किया है।

इसके तहत मोबाइल ऐप और जियोटैग्ड तस्वीरों के जरिए फसल कटाई का रिकॉर्ड दर्ज किया जाता है। इसके अलावा उद्योग जगत की मांगों के बाद सरकार ने शुगर ऑर्डर, 2026 के मसौदे को औपचारिक रूप से वापस ले लिया है। खाद्य तेलों के लिए विदेशी आयात पर निर्भरता घटाने की कोशिशें भी घरेलू खेतों में रंग ला रही हैं।

राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन के तहत अब देश में करीब 2.98 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में ऑयल पाम की खेती हो रही है, और उम्मीद है कि अगले चार-पांच वर्षों में इससे पूरी व्यावसायिक पैदावार मिलने लगेगी।

 बाजार का रुख और आगे की राह

घरेलू प्राकृतिक रबर उत्पादन 2025-26 में 9.05 लाख टन तक पहुंचा, जबकि औद्योगिक जरूरतों को पूरा करने के लिए 4.59 लाख टन रबर का आयात भी किया गया।

वैश्विक बाजार में आए बदलावों के चलते घरेलू रबर की औसत कीमत 197 रुपये से बढ़कर 253 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई। कृषि मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि सरकार की नीतिगत प्राथमिकता एकीकृत कीट प्रबंधन (आईपीएम) तकनीकों और डिजिटल निगरानी के दायरे को बढ़ाने पर केंद्रित है, ताकि रसायनों पर निर्भरता कम की जा सके और साथ ही खाद्य सुरक्षा भी बनी रहे।

You Might Also Like

भीषण गर्मी ने बदली फ्रांस की शराब उद्योग की लय, रिकॉर्ड समय से पहले शुरू हुई अंगूर की कटाई
हरे कछुए की वापसी: संकटग्रस्त से ‘कम चिंताजनक’ श्रेणी में पहुंची प्रजाति
भारत में बढ़ रहा तेंदुआ-मानव संघर्ष, तेजी से घटते प्राकृतिक आवास और बढ़ता अतिक्रमण प्रमुख कारण
22 वीं सदी तक कहीं ग्लेशियर भी डायनासोर की तरह इतिहास के पन्नों में कैद न हो जाएं 
झारखंड में ‘जीरो कोल लीकेज प्लान’ लागू करने का निर्देश
TAGGED:Digital General Crop Estimation SurveyIndian Agricultural ExportsIntegrated Pest ManagementNational Mission on Edible OilsNatural Rubber Production & PricesPesticide Residue MonitoringShivraj Singh ChouhanUnion Agriculture Ministry
Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp LinkedIn Email Copy Link Print
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
LinkedInFollow
Popular News
हवा

गर्मी के चलते दुनिया के 50 सबसे ज्यादा जोखिम वाले शहरों में दो यूपी के

Environment Pulse
Environment Pulse
July 12, 2026
सतकोसिया टाइगर रिजर्व से गांवों के विस्थापन की जांच के लिए ओडिशा सरकार ने बनाई विशेष समिति
‘भारत के शेर फिर से दहाड़ रहे हैं’, एक दशक में एशियाई शेरों की आबादी 523 से बढ़कर 891 हुई
पूर्व यूएन पर्यावरण प्रमुख एरिक सोल्हेम ने की भारत की प्राचीन विद्या-स्थली की सराहना
भारतीय गिद्ध ने 56 दिन में 1600 किलोमीटर से अधिक की उड़ान भरकर चौंकाया

Categories

  • जल
  • जमीन
  • जंगल
  • जैव-विविधता
  • हवा
  • खनिज
  • ऊर्जा
  • ग्रीन जॉब
  • स्टोरी
  • इम्पैक्ट फीचर
  • वीडियो

About US

Environmentpulse.com is a bilingual (Hindi-English) news platform that presents high-quality news, views, and videos related to the environment.
Quick Link
  • ऊर्जा
  • खनिज
  • जैव-विविधता
  • जंगल
Top Categories
  • My Bookmark
  • Contact
  • Privacy Policy
Environment PulseEnvironment Pulse
© Pratham Publisher and Informatics Private Limited. All Rights Reserved. | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?