अमेरिकी पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (EPA) ने बाइडन प्रशासन के समय के पावर प्लांट कार्बन मानकों को वापस लेने और ‘क्लीन एयर एक्ट’ के तहत बची हुई संघीय आवश्यकताओं को समाप्त करने का प्रस्ताव रखा है। प्रशासन का उद्देश्य ऊर्जा लागत कम करना और उत्पादन बढ़ाना है, लेकिन पर्यावरणविदों का मानना है कि इससे कार्बन उत्सर्जन बढ़ेगा और जलवायु लक्ष्यों को झटका लगेगा।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क: अमेरिका में ट्रंप प्रशासन ने कोयला और प्राकृतिक गैस से चलने वाले बिजली संयंत्रों से होने वाले ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को नियंत्रित करने वाली संघीय व्यवस्था में बड़े बदलाव की दिशा में कदम बढ़ाया है।
अमेरिकी पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (EPA) ने 2024 में बाइडन प्रशासन के दौरान लागू किए गए पावर प्लांट कार्बन प्रदूषण मानकों को वापस लेने की कार्रवाई शुरू कर दी है। साथ ही, एजेंसी ने बिजली क्षेत्र में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के लिए Clean Air Act के तहत बची हुई संघीय आवश्यकताओं को भी समाप्त करने का प्रस्ताव रखा है।
EPA के प्रशासक ली ज़ेल्डिन ने 14 सितंबर को ह्यूस्टन में आयोजित G20 ऊर्जा मंत्रियों की बैठक के दौरान इस बदलाव की घोषणा की। प्रशासन का कहना है कि मौजूदा नियम बिजली संयंत्रों पर अतिरिक्त अनुपालन लागत डालते हैं और कोयला तथा प्राकृतिक गैस आधारित बिजली उत्पादन की क्षमता को सीमित कर सकते हैं।
EPA के अनुसार प्रस्तावित बदलाव से बिजली उत्पादकों की लागत में बड़ी कमी आ सकती है और ऊर्जा क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा मिल सकता है। EPA के आकलन के मुताबिक, पावर प्लांटों के लिए बचे हुए ग्रीनहाउस गैस अनुपालन नियमों को हटाने से संचालकों को सीधे अनुपालन खर्च में करीब 370 मिलियन डॉलर की बचत हो सकती है। एजेंसी ने यह भी अनुमान लगाया है कि मौजूदा कार्बन नियंत्रण हटने से अगले एक दशक में लगभग
12.3 करोड़ मीट्रिक टन अतिरिक्त कार्बन उत्सर्जन हो सकता है। यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि बिजली उत्पादन अमेरिका के ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में बड़ा योगदान देता है। बिजली क्षेत्र में कोयला और प्राकृतिक गैस जैसे जीवाश्म ईंधनों का इस्तेमाल कार्बन डाइऑक्साइड सहित कई उत्सर्जनों का स्रोत है।
संघीय कार्बन मानकों को हटाने से भविष्य में बिजली संयंत्रों पर इसी कानूनी ढांचे के तहत व्यापक कार्बन नियंत्रण लागू करना किसी अगली सरकार के लिए अधिक जटिल हो सकता है। बाइडन प्रशासन ने 2024 में नए कार्बन प्रदूषण मानक लागू किए थे। इन नियमों का उद्देश्य मौजूदा कोयला बिजली संयंत्रों तथा नए प्राकृतिक गैस संयंत्रों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को कम करना था।
EPA के उस समय के आकलन के अनुसार, नियमों से 2047 तक लगभग एक अरब टन ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी आने की उम्मीद थी। एजेंसी ने यह भी अनुमान लगाया था कि बेहतर वायु गुणवत्ता के कारण 2035 में करीब 1,200 समय से पहले होने वाली मौतों और लगभग 3.6 लाख अस्थमा के मामलों को रोका जा सकता है।
ट्रंप प्रशासन ने इन आकलनों और नियामकीय दृष्टिकोण को बदल दिया है। EPA का मौजूदा रुख है कि बिजली संयंत्रों से होने वाले ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का वैश्विक जलवायु परिवर्तन पर ऐसा प्रत्यक्ष और महत्वपूर्ण प्रभाव नहीं है, जो Clean Air Act के तहत इन उत्सर्जनों पर संघीय नियंत्रण को उचित ठहराए। इस बदलाव का संबंध ट्रंप प्रशासन द्वारा पहले उठाए गए अन्य पर्यावरणीय कदमों से भी है। फरवरी 2026 में प्रशासन ने EPA के 2009 के उस Endangerment Finding को पलट दिया था, जिसके तहत ग्रीनहाउस गैसों को सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए खतरा माना गया था।
इसके बाद वाहनों और ट्रकों से होने वाले ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन से संबंधित संघीय मानकों में भी बदलाव किए गए। प्रशासन ने कोयला और प्राकृतिक गैस को अमेरिकी ऊर्जा सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया है।
ज़ेल्डिन के अनुसार, सरकार का उद्देश्य ऊर्जा क्षेत्र पर अनावश्यक नियामकीय बोझ कम करना, बिजली की कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद करना और घरेलू ऊर्जा उत्पादन की क्षमता बढ़ाना है।
प्रशासन ने इस नीति को अमेरिकी ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने और रोजगार सृजन से भी जोड़ा है। हालांकि, पर्यावरण संगठनों और पूर्व पर्यावरण अधिकारियों ने इस फैसले पर गंभीर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि बिजली संयंत्रों से कार्बन उत्सर्जन पर संघीय नियंत्रण हटने से प्रदूषण बढ़ने का जोखिम है और इससे जलवायु परिवर्तन से निपटने के अमेरिकी प्रयास कमजोर हो सकते हैं। पर्यावरण समूहों ने संकेत दिया है कि वे नए फैसले को अदालत में चुनौती दे सकते हैं।
विवाद का एक महत्वपूर्ण पहलू Clean Air Act की कानूनी व्याख्या भी है। अमेरिकी बिजली संयंत्रों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को नियंत्रित करने को लेकर पिछले एक दशक में कई बार संघीय सरकार और अदालतों के बीच कानूनी संघर्ष हुआ है। 2016 में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ओबामा प्रशासन की Clean Power Plan व्यवस्था को रोक दिया था। इसके बाद बाइडन प्रशासन ने अलग कानूनी ढांचे और सीमित दायरे के साथ बिजली क्षेत्र के कार्बन उत्सर्जन को नियंत्रित करने के लिए नए नियम बनाए।
EPA का मौजूदा कदम इस लंबे कानूनी और नीतिगत संघर्ष में एक नया मोड़ है। प्रस्तावित बदलाव केवल मौजूदा उत्सर्जन मानकों को कमजोर करने तक सीमित नहीं है, बल्कि बिजली संयंत्रों के ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को नियंत्रित करने के लिए संघीय सरकार के भविष्य के अधिकार की बुनियाद को भी प्रभावित कर सकता है।
हालांकि संघीय नियमों में बदलाव के बावजूद अमेरिका के सभी राज्यों में पर्यावरणीय नियम समाप्त नहीं होंगे। कुछ राज्यों के अपने उत्सर्जन मानक और जलवायु नीतियां हैं, जो संघीय नीति में बदलाव के बाद भी लागू रह सकती हैं। इसलिए अलग-अलग राज्यों में बिजली कंपनियों पर कार्बन नियंत्रण की स्थिति अलग-अलग बनी रह सकती है।
EPA की प्रस्तावित कार्रवाई अब सार्वजनिक प्रक्रिया से गुजरेगी। एजेंसी ने प्रस्ताव पर सार्वजनिक सुनवाई और टिप्पणियों की प्रक्रिया निर्धारित की है। इसके बाद अंतिम निर्णय और संभावित कानूनी चुनौतियां इस बात को तय करेंगी कि नए नियम किस स्वरूप में लागू होते हैं। इस फैसले से अमेरिकी ऊर्जा नीति में एक स्पष्ट बदलाव सामने आया है।
बाइडन प्रशासन ने बिजली क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन घटाने के लिए संघीय नियमन का विस्तार किया था, जबकि ट्रंप प्रशासन कोयला और प्राकृतिक गैस आधारित ऊर्जा उत्पादन पर नियामकीय प्रतिबंध कम करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। आने वाले महीनों में इस नीति का अंतिम कानूनी स्वरूप और अदालतों में इसकी स्थिति यह निर्धारित करेगी कि अमेरिका में बिजली क्षेत्र के कार्बन उत्सर्जन को नियंत्रित करने में संघीय सरकार की भूमिका कितनी रह जाती है।
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