By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
Environment PulseEnvironment PulseEnvironment Pulse
Notification Show More
Font ResizerAa
  • ईको सिस्टम
    • जल
    • जंगल
    • जमीन
    • हवा
    • खनिज
    • जैव-विविधता
    • गतिविधियां
  • कचरा-प्रबंधन
    • ग्रीन बिजनेस
    • रीसाइकलिंग
    • इन्नोवेशन
    • इनिशिएटिव्स
  • फ्यूचर ग्रीन
    • ऊर्जा
    • सस्टेनिबिलिटी
    • इलेक्ट्रिक व्हीकल
    • कृषि एवं खाद्य
  • ओपिनियन
    • विचार
    • इम्पैक्ट फीचर
    • स्टोरी
  • मल्टीमीडिया
    • वीडियो
Reading: भूजल का दुरुपयोग पड़ा महंगा, तीन स्टेडियमों पर लगी रोक
Share
Font ResizerAa
Environment PulseEnvironment Pulse
  • ईको सिस्टम
  • कचरा-प्रबंधन
  • फ्यूचर ग्रीन
  • ओपिनियन
  • मल्टीमीडिया
Search
  • ईको सिस्टम
    • जल
    • जंगल
    • जमीन
    • हवा
    • खनिज
    • जैव-विविधता
    • गतिविधियां
  • कचरा-प्रबंधन
    • ग्रीन बिजनेस
    • रीसाइकलिंग
    • इन्नोवेशन
    • इनिशिएटिव्स
  • फ्यूचर ग्रीन
    • ऊर्जा
    • सस्टेनिबिलिटी
    • इलेक्ट्रिक व्हीकल
    • कृषि एवं खाद्य
  • ओपिनियन
    • विचार
    • इम्पैक्ट फीचर
    • स्टोरी
  • मल्टीमीडिया
    • वीडियो
Have an existing account? Sign In
Follow US
Environment Pulse > ईको सिस्टम > जल > भूजल का दुरुपयोग पड़ा महंगा, तीन स्टेडियमों पर लगी रोक
जल

भूजल का दुरुपयोग पड़ा महंगा, तीन स्टेडियमों पर लगी रोक

Environment Pulse
Last updated: July 11, 2026 7:47 pm
Environment Pulse
Published: July 11, 2026
Share
SHARE

एनजीटी ने देश के तीन स्टेडियमों में सभी खेल गतिविधियों पर रोक लगाई

महाराष्ट्र, राजस्थान, छत्तीसगढ़ के हैं स्टेडियम, नहीं दिया था नोटिस का जवाब

एनवायरमेंट पल्स डेस्क

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने देश के तीन बड़े क्रिकेट स्टेडियमों को बिना उसकी पूर्वानुमति के क्रिकेट मैच या कोई भी खेल गतिविधि करने से रोक दिया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने यह कड़ा फैसला इसलिए लिया, क्योंकि इन्होंने भूजल उपयोग संबंधी उसके दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया था। ये तीन स्टेडियम क्रमशः महाराष्ट्र, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के हैं। इनके नाम हैं-मुंबई का डॉ. डीवाई पाटिल स्टेडियम, जयपुर का सवाई मानसिंह स्टेडियम और रायपुर का शहीद वीर नारायण सिंह इंटरनेशनल स्टेडियम।

इन स्टेडियमों को एनजीटी ने कई बार नोटिस दिया, जिसमें उनसे कहा था कि वे केंद्रीय भूजल बोर्ड को यह बताएं कि मैदान और पिच के रखरखाव के लिए किस तरह के पानी का उपयोग कर रहे हैं (स्टेडियमों को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का उपचारित जल ही उपयोग करना होता है)? नोटिस में यह भी पूछा गया था कि वे रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम (हर स्टेडियम के लिए वर्षा जल संचयन के लिए यह सिस्टम लगाना अनिवार्य है, ताकि भूजल का भंडारण होने के साथ-साथ उसका स्तर ऊपर उठ सके) का इस्तेमाल कर रहे हैं या नहीं ?

इन स्टेडियमों ने एनजीटी की नोटिस का कोई जवाब नहीं दिया था। इन पर आरोप है कि ये अपने ग्राउंड और पिच के रखरखाव के लिए शुद्ध भूजल का प्रयोग कर रहे थे। इसी के साथ-साथ इन्होंने वर्षा जल संचयन के लिए रेन हार्वेस्टिंग सिस्टम भी नहीं लगवाया था।

एनजीटी ने इस मामले में अगली सुनवाई की तिथि 17 अगस्त निर्धारित की है।

You Might Also Like

उत्तर प्रदेश ने 13 जिलों में 700 किलोमीटर क्षेत्र में गंगा के बाढ़ मैदान का सीमांकन पूरा किया
गंगा का जलस्तर बढ़ा, वाराणसी में नावों पर लगी रोक; घाटों की रौनक पर बाढ़ का साया
स्पेन: समुद्री संरक्षण में बड़ा कदम, 23 नए समुद्री संरक्षित क्षेत्र प्रस्तावित
India Pushes Fishermen Further Out to Sea in Bid to Tap High-Value Catch
सूखे की मार: श्रीलंका के याला नेशनल पार्क के प्रमुख हिस्सों में पर्यटकों की एंट्री पर रोक
TAGGED:GROUND WATERNGTNGT decisionRAIN WATER HARVESTINGwater
Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp LinkedIn Email Copy Link Print
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
LinkedInFollow
Popular News
(फोटो सौजन्य-एआई)
इनिशिएटिव्सइन्नोवेशनऊर्जाफ्यूचर ग्रीनसस्टेनिबिलिटी

क्लीन एनर्जी में भारत की ऐतिहासिक उपलब्धि: नॉन-फॉसिल फ्यूल पावर क्षमता 300 GW के पार

Environment Pulse
Environment Pulse
August 10, 2026
कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य के आसपास 0 से 1 किमी का इको-सेंसिटिव जोन अधिसूचित
Billions Still Without Clean Water and Basic Sanitation as 2030 Deadline Looms
इस वर्ष के अंत तक स्वच्छ हो जाएगी गोमती नदी: CM योगी
भारत लाए जाएंगे बोत्सवाना से आठ चीते, प्रोजेक्ट चीता को मिलेगा आनुवंशिक विविधता का सहारा

Categories

  • जल
  • जमीन
  • जंगल
  • जैव-विविधता
  • हवा
  • खनिज
  • ऊर्जा
  • ग्रीन जॉब
  • स्टोरी
  • इम्पैक्ट फीचर
  • वीडियो

About US

Environmentpulse.com is a bilingual (Hindi-English) news platform that presents high-quality news, views, and videos related to the environment.
Quick Link
  • ऊर्जा
  • खनिज
  • जैव-विविधता
  • जंगल
Top Categories
  • My Bookmark
  • Contact
  • Privacy Policy
Environment PulseEnvironment Pulse
© Pratham Publisher and Informatics Private Limited. All Rights Reserved. | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?