सिंगापुर एक तरफ जलवायु अनुकूलन और हरित पहलों पर अरबों डॉलर खर्च कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ आवास विकास के लिए जंगलों (जैसे माजू फॉरेस्ट) को काटा जा रहा है। जंगलों की कटाई से शहरी गर्मी (अत्यधिक तापमान) और बाढ़ का खतरा बढ़ रहा है, जिससे ‘सिटी इन नेचर’ की अवधारणा और सरकार की नीतियों पर सवाल उठ रहे हैं।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क: जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों से निपटने के लिए सिंगापुर बड़े पैमाने पर निवेश कर रहा है, लेकिन दूसरी ओर आवास और शहरी विकास के लिए जंगलों को हटाने का सिलसिला जारी है। तापमान में वृद्धि, अत्यधिक बारिश और समुद्री जलस्तर बढ़ने जैसे खतरों के बीच देश अपनी पहली राष्ट्रीय जलवायु अनुकूलन योजना तैयार कर रहा है, जिसे 2027 में जारी किया जाना है।
केंद्रीय सिंगापुर का 23 हेक्टेयर में फैला माजू फॉरेस्ट इस बहस का केंद्र बन गया है। आवास निर्माण के लिए इसके एक हिस्से को विकसित करने की योजना के खिलाफ अगस्त में बड़ी संख्या में लोगों ने प्रदर्शन किया। पर्यावरण समूहों और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि मौजूदा पर्यावरण प्रभाव आकलन में जंगलों के तापमान नियंत्रण, बाढ़ रोकने, हवा की गुणवत्ता और सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी लाभों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया है।
सरकार ने माजू और गिलमैन बैरक्स में आवास विकास आगे बढ़ाने का फैसला किया है, हालांकि सार्वजनिक प्रतिक्रियाओं के बाद पहले की योजना की तुलना में अधिक हरित क्षेत्र बचाने की बात कही गई है। सिंगापुर अपनी जलवायु अनुकूलन तैयारियों पर इस सदी में करीब 100 अरब सिंगापुर डॉलर खर्च करने की प्रतिबद्धता जता चुका है। इसमें तटीय सुरक्षा, जल निकासी और अन्य बुनियादी ढांचे शामिल हैं। 2025 में गर्मी से निपटने के लिए एक विशेष कार्यालय भी बनाया गया था और कमजोर आबादी पर हीट स्ट्रेस के प्रभावों के अध्ययन के लिए 4 करोड़ सिंगापुर डॉलर की पहल शुरू की गई।
वैज्ञानिकों के अनुसार जंगलों की कटाई से शहरी गर्मी और अचानक आने वाली बाढ़ का जोखिम बढ़ सकता है। सिंगापुर के कुछ इलाकों में हरित क्षेत्रों और घने शहरी इलाकों के बीच तापमान का अंतर पहले भी दर्ज किया गया है। एक अध्ययन के अनुसार, शहर के केंद्रीय हिस्से का तापमान अधिक हरित क्षेत्रों की तुलना में लगभग 6 डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा हो सकता है।
देश ने 2030 तक एक करोड़ नए पेड़ लगाने के लक्ष्य वाली OneMillionTrees पहल भी शुरू की है और राष्ट्रीय उद्यान बोर्ड के अनुसार 2020 से अब तक 8.87 लाख से अधिक पेड़ लगाए जा चुके हैं। हालांकि संरक्षण विशेषज्ञों का कहना है कि नए पौधे लगाना पुराने जंगलों को हटाने से होने वाले पारिस्थितिक और जलवायु लाभ के नुकसान की पूरी भरपाई नहीं कर सकता।
यह स्थिति सिंगापुर की “City in Nature” की अवधारणा को लेकर भी बहस पैदा कर रही है। सवाल यह है कि क्या पार्क, रूफटॉप गार्डन और योजनाबद्ध हरियाली प्राकृतिक जंगलों द्वारा प्रदान की जाने वाली तापमान नियंत्रण और बाढ़ रोकने जैसी सेवाओं का समान विकल्प बन सकती है।
आवास की जरूरत और प्राकृतिक जंगलों के संरक्षण के बीच संतुलन अब सिंगापुर की जलवायु नीति के सामने एक प्रमुख चुनौती बन गया है।
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