अंतरराष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी (IRENA) के महानिदेशक फ्रांसेस्को ला कैमरा ने चेतावनी दी है कि 2030 तक वैश्विक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को तीन गुना करने का लक्ष्य भी पेरिस जलवायु समझौते के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए नाकाफी साबित हो सकता है। सिंगापुर इंटरनेशनल एनर्जी वीक में उन्होंने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा सेंटरों की बढ़ती मांग के कारण बिजली की खपत अनुमान से कहीं अधिक तेजी से बढ़ रही है। वर्ष 2025 तक वैश्विक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 5.15 टेरावाट पहुँचने और 2030 तक 11.2 टेरावाट के करीब पहुँचने के बावजूद, ऊर्जा दक्षता में धीमी प्रगति, ग्रिड की बाधाओं और बढ़ती माँग के कारण तापमान को 1.5 डिग्री सेल्सियस की सीमा में रखना बेहद चुनौतीपूर्ण बना हुआ है, जिसके लिए भविष्य में क्षमता विस्तार और भारी निवेश की आवश्यकता है।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क : AI और डेटा सेंटरों की बढ़ती बिजली मांग तथा ऊर्जा दक्षता में धीमी प्रगति से पेरिस जलवायु समझौते के लक्ष्यों पर बढ़ा खतरा सिंगापुर, 27 अक्टूबर। दुनिया वर्ष 2030 तक वैश्विक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को तीन गुना करने के लक्ष्य के करीब पहुंच रही है, लेकिन इसे हासिल करना भी पेरिस जलवायु समझौते के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकता।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा सेंटरों और बढ़ती ऊर्जा खपत के कारण बिजली की मांग अनुमान से कहीं तेजी से बढ़ रही है। यह चेतावनी अंतरराष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी (IRENA) के महानिदेशक फ्रांसेस्को ला कैमरा ने दी। सिंगापुर इंटरनेशनल एनर्जी वीक के दौरान उन्होंने कहा कि दुनिया 2030 तक 11.2 टेरावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य के काफी करीब पहुंच जाएगी, हालांकि इसे पूरी तरह हासिल करना मुश्किल है।
दुबई में 2023 में आयोजित COP28 सम्मेलन में करीब 200 देशों ने UAE Consensus के तहत 2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता तीन गुना करने और ऊर्जा दक्षता सुधार की दर दोगुनी करने पर सहमति जताई थी। ला कैमरा के अनुसार, उस समय ऊर्जा मांग को लेकर लगाए गए अनुमान मौजूदा परिस्थितियों के मुकाबले कम साबित हुए हैं।
जीवनशैली में बदलाव, एयर कंडीशनिंग और हीटिंग का बढ़ता इस्तेमाल तथा AI तकनीक के विस्तार ने बिजली की खपत को तेजी से बढ़ाया है। वर्ष 2025 के अंत तक वैश्विक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़कर रिकॉर्ड 5.15 टेरावाट पहुंच गई थी। इस दौरान लगभग 693 गीगावाट नई क्षमता जुड़ी, जो दुनिया की कुल नई बिजली उत्पादन क्षमता का 85 प्रतिशत से अधिक थी।
हालांकि, मौजूदा विकास दर जारी रहने पर भी 2030 तक लगभग 0.6 टेरावाट की कमी रह सकती है। लक्ष्य हासिल करने के लिए 2026 से 2030 के बीच हर वर्ष औसतन 1.2 टेरावाट नई क्षमता जोड़ने की आवश्यकता होगी। ऊर्जा दक्षता के मोर्चे पर भी प्रगति अपेक्षा से काफी धीमी है।
वर्ष 2025 में ऊर्जा तीव्रता में केवल लगभग दो प्रतिशत सुधार हुआ, जबकि 2030 तक निर्धारित लक्ष्य की दिशा में हर वर्ष चार प्रतिशत सुधार जरूरी है। IRENA प्रमुख ने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता तीन गुना करने के बावजूद दुनिया का तापमान पूर्व-औद्योगिक स्तर से दो डिग्री सेल्सियस से काफी नीचे रखने और 1.5 डिग्री की सीमा हासिल करने के लक्ष्य के अनुरूप रास्ते पर बने रहना चुनौतीपूर्ण होगा।
एजेंसी के संशोधित 1.5°C परिदृश्य के अनुसार, वर्ष 2035 तक लगभग 18.4 टेरावाट और 2050 तक 38.2 टेरावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता की जरूरत होगी। इसके साथ ही बिजली ग्रिड के विकास और विस्तार के लिए सालाना निवेश बढ़ाकर करीब एक ट्रिलियन डॉलर करना होगा। तेजी से बढ़ते AI आधारित डेटा सेंटर बिजली की मांग में वृद्धि का एक प्रमुख कारण बन रहे हैं।
ला कैमरा का मानना है कि सौर, पवन और जलविद्युत ऊर्जा के संयोजन के साथ बैटरी भंडारण प्रणालियां डेटा सेंटरों को भरोसेमंद बिजली उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। उन्होंने जोर दिया कि जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता रातोंरात समाप्त नहीं की जा सकती, लेकिन नवीकरणीय ऊर्जा का तेजी से विस्तार, विद्युतीकरण, ऊर्जा भंडारण और दक्षता में सुधार अनिवार्य हैं। दुनिया में नवीकरणीय ऊर्जा की स्थापना लगातार नए रिकॉर्ड बना रही है और इसकी लागत भी घट रही है।
इसके बावजूद बिजली ग्रिड, ऊर्जा भंडारण और नीतिगत समर्थन से जुड़ी बाधाएं जलवायु लक्ष्यों की राह में बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। IRENA के अनुसार, समय रहते तेज और समन्वित कदम उठाकर इस अंतर को कम किया जा सकता है।
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