
दुनिया में 30 से अधिक सैटेलाइट अंतरिक्ष से कर रहे मीथेन रिसाव की पहचान
पहले वैज्ञानिक डेटा का करते थे मैनुअल विश्लेषण, एआई ने कर दी राह तेज और आसान
एनवायरमेंट पल्स डेस्क
जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में एक नई उम्मीद दिख रही है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, यानी कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम की एक नई रिपोर्ट बताती है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सैटेलाइट निगरानी प्रणाली ने तेल और गैस क्षेत्र से होने वाले मीथेन उत्सर्जन को कम करने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई है।
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इस तकनीक की मदद से कम किए गए मीथेन उत्सर्जन का प्रभाव लगभग 2.4 करोड़ पेट्रोल चालित कारों को एक साल के लिए सड़क से हटाने के बराबर है। जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में यह एक बहुत बड़ा कदम है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर्यावरणीय आंकड़ों को तेजी से समझने और वास्तविक समय में कार्रवाई करने में मदद कर रही है। संयुक्त राष्ट्र की इंटरनेशनल मीथेन एमिशन ऑब्जर्वेटरी के तहत काम करने वाली प्रणाली अब पहले की तुलना में 12 से 15 गुना अधिक सैटेलाइट डेटा का विश्लेषण कर पा रही है।
मीथेन एक बहुत ही शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैस है, जो पृथ्वी के तापमान में हुई वृद्धि के लगभग एक-तिहाई हिस्से के लिए जिम्मेदार मानी जाती है। इसका ग्लोबल वार्मिंग प्रभाव कार्बन डाइऑक्साइड की तुलना में लगभग 80 गुना अधिक है।
दुनिया भर में 30 से अधिक सैटेलाइट अब अंतरिक्ष से मीथेन रिसाव की पहचान कर रहे हैं। पहले वैज्ञानिकों को बड़ी मात्रा में डेटा का मैनुअल विश्लेषण करना पड़ता था, लेकिन कृत्रिम बुद्धिमत्ता ने इस प्रक्रिया को तेज और अधिक सटीक बना दिया है।
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के अनुसार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रणाली मानव विशेषज्ञों की समीक्षा से पहले ही 80 से 85 प्रतिशत संभावित मीथेन उत्सर्जन की पहचान कर लेती है। इससे वैज्ञानिकों और नीति निर्माताओं को बड़े रिसावों पर तुरंत कार्रवाई करने में मदद मिलती है।
मीथेन अलर्ट एंड रिस्पॉन्स सिस्टम से तेज कार्रवाई हो रही है। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम की मीथेन अलर्ट एंड रिस्पॉन्स सिस्टम प्रणाली सैटेलाइट से मिले संकेतों के आधार पर सरकारों और कंपनियों को बड़े मीथेन रिसाव की जानकारी देती है। इस प्रणाली के पूरी तरह सक्रिय होने के बाद दुनिया भर में 40 से अधिक उत्सर्जन नियंत्रण कार्रवाइयों में मदद मिली है।
इन कार्रवाइयों से जुड़े रिसावों में अनुमानित 12 लाख टन मीथेन उत्सर्जन को नियंत्रित करने की दिशा में कदम उठाए गए। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के जलवायु परिवर्तन विभाग के निदेशक मार्टिन क्रॉस ने कहा कि मीथेन निगरानी से मिली सीख यह है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर्यावरणीय आंकड़ों के विशाल भंडार को व्यावहारिक समाधान में बदल सकती है।
उनके अनुसार, कम ऊर्जा वाले कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों और वैज्ञानिक विशेषज्ञता के संयोजन से जलवायु संबंधी चुनौतियों पर तेजी से प्रतिक्रिया दी जा सकती है। मीथेन उत्सर्जन में तत्काल कार्रवाई की जरूरत है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी मीथेन प्रदूषण को कम करने के लिए तेज कार्रवाई का आह्वान किया है।
उन्होंने कहा कि दुनिया ने सीसा युक्त पेट्रोल और ओजोन परत को नुकसान पहुंचाने वाले रसायनों को नियंत्रित करने में सफलता हासिल की है, अब मीथेन प्रदूषण को कम करना अगला बड़ा कदम होना चाहिए। विश्व मौसम विज्ञान संगठन की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 में वायुमंडल में मीथेन की मात्रा लगभग 1,942 पार्ट्स प्रति बिलियन तक पहुंच गई, जो औद्योगिक युग से पहले के स्तर से करीब 266 प्रतिशत अधिक है और कम से कम 8 लाख वर्षों में सबसे अधिक स्तरों में से एक है।
गुटेरेस के अनुसार, मीथेन उत्सर्जन को कम करना निकट भविष्य में ग्लोबल वार्मिंग की गति धीमी करने के लिए सबसे तेज और प्रभावी उपायों में से एक है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता और सैटेलाइट डेटा से आर्थिक अवसर भी हैं। विश्व आर्थिक मंच के अनुसार, पृथ्वी अवलोकन तकनीक आने वाले वर्षों में वैश्विक अर्थव्यवस्था में 700 अरब डॉलर से अधिक का योगदान दे सकती है।
इसमें से करीब 263 अरब डॉलर की संभावनाएं अभी पूरी तरह उपयोग नहीं हो पाई हैं। सैटेलाइट आधारित मीथेन निगरानी को ऐसी तकनीक माना जा रहा है, जो पर्यावरणीय लाभ के साथ आर्थिक फायदे भी दे सकती है। अमेरिका में ही तेल और गैस उद्योग को मीथेन रिसाव के कारण लगभग 2 अरब डॉलर के संभावित राजस्व नुकसान का अनुमान लगाया गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता ने मीथेन रिसाव की पहचान से जुड़ी बड़ी चुनौती को काफी हद तक हल कर दिया है। अब अगली चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि सरकारें और कंपनियां सैटेलाइट से मिली चेतावनियों पर समय रहते कार्रवाई करें।
जलवायु विशेषज्ञों के अनुसार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और सैटेलाइट तकनीक का संयोजन आने वाले वर्षों में मीथेन उत्सर्जन नियंत्रण के साथ-साथ कृषि, कचरा प्रबंधन और अन्य पर्यावरणीय क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

