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Environment Pulse > ईको सिस्टम > जैव-विविधता > ज्यादा गर्मी, कम तीखापन: बदलते मौसम के बीच फीकी पड़ रही हैं भारत की खास मिर्च
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ज्यादा गर्मी, कम तीखापन: बदलते मौसम के बीच फीकी पड़ रही हैं भारत की खास मिर्च

Environment Pulse
Last updated: August 19, 2026 10:31 pm
Environment Pulse
Published: August 19, 2026
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बढ़ते तापमान (45°C से अधिक) और अनियमित बारिश के कारण मिर्च में तीखेपन के लिए जिम्मेदार कैप्साइसिन यौगिक कम हो रहा है। असम की विश्व प्रसिद्ध ‘भूत जोलोकिया’ और सिक्किम की GI-टैग प्राप्त ‘डल्ले खुर्सानी’ का स्वाद और तीखापन प्रभावित हो रहा है।

 

एनवायरमेंट पल्स डेस्क। भारत की पहचान केवल मसालों और तीखे व्यंजनों से नहीं, बल्कि उन खास मिर्चों से भी है जिनका स्वाद, खुशबू और तीखापन देश के अलग-अलग क्षेत्रों की खाद्य संस्कृति का हिस्सा है। असम की भूत जोलोकिया, सिक्किम की डल्ले खुर्सानी और नागालैंड की नागा किंग चिली जैसी मिर्चें किसानों के लिए महत्वपूर्ण नकदी फसल होने के साथ-साथ अपनी विशिष्ट पहचान के लिए देश-दुनिया में मशहूर हैं।

लेकिन जलवायु परिवर्तन अब इन मिर्चों की इसी खासियत को प्रभावित कर रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार बढ़ता तापमान, अनियमित बारिश और मौसम की चरम घटनाएं मिर्च की खेती पर लगातार दबाव बढ़ा रही हैं। 2026 में प्रकाशित एक शोध के अनुसार, लगभग 43 से 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर का तापमान मिर्च के पौधों के लिए गंभीर तनाव पैदा कर सकता है, खासकर फूल आने और फल विकसित होने के चरण में।

अत्यधिक गर्मी मिर्च के पौधों की वृद्धि और पैदावार को कम कर सकती है। इसका असर उन रासायनिक यौगिकों पर भी पड़ सकता है जो मिर्च के रंग, स्वाद और तीखेपन के लिए जिम्मेदार होते हैं। यह भारत की विशेष किस्मों के लिए खास चिंता का विषय है, क्योंकि उनकी बाजार कीमत ही अक्सर उनके अनूठे स्वाद और तीखेपन से तय होती है। भूत जोलोकिया इसका प्रमुख उदाहरण है। असम और पूर्वोत्तर भारत के अन्य हिस्सों में उगाई जाने वाली इस मिर्च को 2007 में गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने दुनिया की सबसे तीखी मिर्च के रूप में मान्यता दी थी।

रिपोर्ट के अनुसार कुछ परीक्षणों में इसकी तीव्रता एक मिलियन से अधिक स्कोविल हीट यूनिट तक दर्ज की गई है। हालांकि, इसका तीखापन स्थायी या एक जैसा नहीं होता। तापमान, बारिश और मिट्टी की परिस्थितियां मिर्च में मौजूद कैप्साइसिन की मात्रा को प्रभावित कर सकती हैं। खराब गुणवत्ता वाले बीज, खेती के तौर-तरीके और पर्यावरणीय तनाव भी मिर्च के स्वाद और तीखेपन में बदलाव ला सकते हैं। असम में किसान और विशेषज्ञ 2024 से कुछ भूत जोलोकिया फसलों में तीखेपन और खुशबू में कमी को लेकर चिंता जता चुके हैं। सिक्किम की डल्ले खुर्सानी भी बदलती जलवायु के असर को लेकर चिंता का उदाहरण है।

रिपोर्ट के अनुसार छोटी और गोल आकार की यह मिर्च सिक्किम की प्रमुख नकदी फसलों में शामिल है और दार्जिलिंग की पहाड़ियों में भी उगाई जाती है। अपने तेज तीखेपन के कारण इसे खास पहचान मिली है और इसे भौगोलिक संकेतक यानी GI टैग भी प्राप्त है। अलग-अलग ऊंचाई वाले क्षेत्रों से एकत्र की गई डल्ले खुर्सानी में कैप्साइसिन की मात्रा में काफी अंतर पाया गया है। कुछ अध्ययनों में इसकी तीव्रता लगभग 3.05 लाख से 4.57 लाख स्कोविल हीट यूनिट तक दर्ज की गई।

यह अंतर बताता है कि मिर्च की खासियत उसके उगने वाले पर्यावरण से कितनी गहराई से जुड़ी है। जलवायु परिवर्तन इस प्राकृतिक विविधता के सामने नई चुनौती खड़ी कर रहा है। तापमान बढ़ने और बारिश के अनिश्चित होने से पौधों पर विकास के महत्वपूर्ण चरणों में तनाव बढ़ता है। अधिक गर्मी फूल आने और फल बनने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है, जबकि अत्यधिक नमी से फसल में बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। मामला सिर्फ इस बात का नहीं है कि मिर्च पहले जितनी तीखी रहेगी या नहीं। पूर्वोत्तर भारत विशिष्ट कृषि किस्मों की समृद्ध विरासत का केंद्र है। डल्ले खुर्सानी, नागा मिर्च और कई अन्य विशेष मिर्चों को GI-रजिस्टर्ड कृषि उत्पादों में शामिल किया गया है। इनका महत्व स्थानीय संस्कृति के साथ-साथ किसानों की आय से भी जुड़ा है।

रिपोर्ट के अनुसार यदि जलवायु तनाव के कारण इन किस्मों की खेती कठिन होती गई, तो किसान ऐसी किस्मों की ओर बढ़ सकते हैं जिनकी खेती आसान हो या जिनसे बाजार में अधिक स्थिर आमदनी मिलती हो। इससे स्थानीय और पारंपरिक मिर्चों की आनुवंशिक विविधता पर भी दबाव बढ़ सकता है। भविष्य में उपभोक्ताओं के सामने स्थिति कुछ ऐसी हो सकती है कि प्लेट में दिखने वाली मिर्च वही हो, लेकिन उसका तीखापन, खुशबू, स्वाद और कीमत पहले जैसी न रहे। इसलिए वैज्ञानिक अब जलवायु-सहिष्णु मिर्च की किस्मों, बेहतर बीजों और मौसम के अनुकूल खेती की तकनीकों पर जोर दे रहे हैं। जलवायु परिवर्तन भारत की मिर्चों को केवल उगाना मुश्किल नहीं बना रहा, बल्कि धीरे-धीरे उन गुणों को भी बदल सकता है जिन्होंने इन मिर्चों को दुनिया भर में खास पहचान दिलाई है।

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