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Environment Pulse > ईको सिस्टम > गतिविधियां > भारत में रामसर स्थलों की संख्या 103 हुई, सुखना वेटलैंड और सौज झील को मिला दर्जा
गतिविधियां

भारत में रामसर स्थलों की संख्या 103 हुई, सुखना वेटलैंड और सौज झील को मिला दर्जा

Environment Pulse
Last updated: October 16, 2026 3:20 pm
Environment Pulse
Published: October 16, 2026
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भारत में रामसर स्थलों की संख्या बढ़कर 103 हो गई है, जिसमें चंडीगढ़ का सुखना वेटलैंड और उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले की सौज झील को नया दर्जा मिला है। सुखना वेटलैंड चंडीगढ़ का पहला और सौज झील के जुड़ने से मैनपुरी देश का ऐसा पहला जिला बन गया है जहाँ दो रामसर स्थल हैं। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश में कुल रामसर स्थलों की संख्या 14 हो गई है। यह घोषणा केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने की। इन स्थलों को रामसर सूची में शामिल किए जाने से जैव विविधता संरक्षण, प्रवासी पक्षियों के आवास सुरक्षा और पर्यावरण संतुलन को बढ़ावा मिलेगा। रामसर कन्वेंशन की शुरुआत 1971 में हुई थी और भारत 1982 में इसका सदस्य बना था।

एनवायरमेंट पल्स डेस्क : भारत में अंतरराष्ट्रीय महत्व के रामसर स्थलों की संख्या बढ़कर 103 हो गई है। चंडीगढ़ के सुखना वेटलैंड और उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले की सौज झील को रामसर स्थल घोषित किया गया।

केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने इसकी जानकारी देते हुए कहा कि यह कदम जैव विविधता संरक्षण, जल एवं जलवायु सुरक्षा और स्थानीय आजीविका को बढ़ावा देने के प्रयासों को मजबूत करेगा। सुखना वेटलैंड चंडीगढ़ का पहला रामसर स्थल है।

लगभग 200 हेक्टेयर में फैला यह वर्षा आधारित जलाशय शिवालिक पहाड़ियों की तलहटी में स्थित है। यह प्रवासी पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण पड़ाव है। यहां संकटग्रस्त कॉमन पोचार्ड, पेलास फिश ईगल और ब्लैक पॉन्ड टर्टल जैसी प्रजातियां पाई जाती हैं।

वहीं, सौज झील गंगा के बाढ़ क्षेत्र में स्थित उथली मीठे पानी की झील है। यह हर साल 30 हजार से अधिक जलपक्षियों को आश्रय देती है। यहां सारस क्रेन और ग्रेटर स्पॉटेड ईगल जैसी प्रजातियां भी पाई जाती हैं। इसके रामसर स्थल बनने के साथ मैनपुरी देश का ऐसा पहला जिला बन गया है, जहां दो रामसर स्थल हैं।

उत्तर प्रदेश में अब इनकी संख्या 14 हो गई है। रामसर कन्वेंशन की स्थापना 1971 में ईरान के रामसर शहर में हुई थी। भारत 1982 में इस अंतरराष्ट्रीय समझौते का सदस्य बना। नए दर्जे से दोनों आर्द्रभूमियों के संरक्षण, वैज्ञानिक निगरानी और टिकाऊ प्रबंधन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

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