पुणे के मैक्स आघारकर रिसर्च इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने पश्चिमी घाट (केरल) के जंगलों में Allographa वंश के लाइकेन की पांच नई प्रजातियों की खोज की है। इन नई प्रजातियों (Allographa keralensis, A. nayakae, A. paraconsanguinea, A. persistinspersa और A. semicarbonisata) की पहचान डीएनए अनुक्रमण और आणविक अध्ययन के जरिए की गई है। लाइकेन पर्यावरण और वायु गुणवत्ता के संवेदनशील जैव संकेतक होते हैं, इसलिए इस खोज से पश्चिमी घाट की जैव विविधता को समझने तथा वैज्ञानिक संरक्षण योजनाओं को मजबूत करने में काफी मदद मिलेगी।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क : महाराष्ट्र के पुणे स्थित मैक्स आघारकर रिसर्च इंस्टीट्यूट (एआरआई) के वैज्ञानिकों ने पश्चिमी घाट के जैव विविधता से समृद्ध जंगलों में Allographa वंश के लाइकेन बनाने वाले कवकों की पांच नई प्रजातियों की खोज की है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के अधीन स्वायत्त संस्थान के शोधकर्ताओं की इस उपलब्धि से भारत में लाइकेन की विविधता को समझने और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
नई प्रजातियों के नाम Allographa keralensis, A. nayakae, A. paraconsanguinea, A. persistinspersa और A. semicarbonisata रखे गए हैं। इनमें A. keralensis का नाम केरल राज्य के नाम पर, जबकि A. nayakae का नाम भारतीय लाइकेन विशेषज्ञ डॉ. संजीव नायक के सम्मान में रखा गया है।
शोध के निष्कर्ष प्रतिष्ठित सहकर्मी-समीक्षित पत्रिका Mycological Progress में प्रकाशित हुए हैं। वैज्ञानिक राजेशकुमार के.सी. के नेतृत्व में शोध दल ने पीएचडी शोधार्थी अंसिल पी.ए. और तकनीकी अधिकारी डॉ. भारती शर्मा के साथ वर्ष 2021 से 2023 के बीच पश्चिमी घाट के उष्णकटिबंधीय वन क्षेत्रों में व्यापक सर्वेक्षण किया। विशेष रूप से केरल के इडुक्की और त्रिशूर जिलों से नमूने एकत्र किए गए।
शोधकर्ताओं ने नमूनों की बाहरी संरचना और रासायनिक विशेषताओं का विश्लेषण करने के साथ तीन आनुवंशिक मार्करों—mtSSU, nrLSU और RPB2—की मदद से डीएनए अनुक्रमण किया। यह पश्चिमी घाट में Allographa प्रजातियों का पहला व्यापक आणविक वंशवृक्ष संबंधी अध्ययन है। अध्ययन में सामने आया कि कुछ प्रजातियां देखने में लगभग समान होने के बावजूद आनुवंशिक रूप से अलग हैं। ऐसी प्रजातियों को क्रिप्टिक प्रजातियां कहा जाता है।
इससे स्पष्ट हुआ कि केवल बाहरी बनावट के आधार पर प्रजातियों की पहचान करना पर्याप्त नहीं है और सटीक वर्गीकरण के लिए आणविक अध्ययन भी जरूरी हैं। Allographa ग्राफिडेसी (Graphidaceae) परिवार का एक वंश है। इसकी प्रजातियों में लंबे, लिपि जैसी आकृति वाले फलन निकाय पाए जाते हैं। लाइकेन कवक और शैवाल अथवा सायनोबैक्टीरिया के सहजीवी संबंध से बनते हैं। ये जीव वायु प्रदूषण, आवास में बदलाव और पर्यावरणीय व्यवधानों के प्रति संवेदनशील होते हैं।
इसलिए इन्हें जंगलों के स्वास्थ्य, वायु गुणवत्ता और पर्यावरणीय बदलावों के महत्वपूर्ण जैव संकेतक के रूप में देखा जाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह खोज भारत में Allographa की विविधता से संबंधित जानकारी का विस्तार करेगी और भविष्य के शोध के लिए उपयोगी आनुवंशिक संदर्भ उपलब्ध कराएगी। इससे पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान, पर्यावरण की दीर्घकालिक निगरानी और वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित संरक्षण योजनाओं को भी सहायता मिलेगी।
यह उपलब्धि पश्चिमी घाट के वैश्विक जैव विविधता हॉटस्पॉट के रूप में महत्व को भी रेखांकित करती है।

