बेंगलुरु स्थित एनसीबीएस (NCBS) के शोधकर्ताओं ने भारत के जंगलों और जलवायु परिवर्तन पर शोध को बढ़ावा देने के लिए ‘InvenTree-meta’ नामक देश का सबसे बड़ा वृक्ष गणना मेटा-डेटासेट जारी किया है। इसमें 1991 से 2023 के बीच के 465 अध्ययनों और 4,650 हेक्टेयर से अधिक वन क्षेत्र के बिखरे आंकड़ों को एकीकृत किया गया है। यह डेटाबेस वनों की तुलना, कार्बन भंडारण और टिकाऊ वन प्रबंधन में मदद करेगा, साथ ही उत्तरी पश्चिमी घाट और पूर्वोत्तर जैसे कम अध्ययन वाले क्षेत्रों की जानकारी सामने लाएगा।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क : भारत के जंगलों, वृक्ष विविधता और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों पर शोध को बढ़ावा देने के लिए बेंगलुरु स्थित नेशनल सेंटर फॉर बायोलॉजिकल साइंसेज (NCBS) के शोधकर्ताओं ने सहयोगी संस्थानों के साथ मिलकर ‘InvenTree-meta’ नाम से भारत का सबसे बड़ा वृक्ष गणना अध्ययन मेटा-डेटासेट तैयार कर जारी किया है।
यह डेटाबेस देशभर में अलग-अलग समय पर किए गए वृक्ष सर्वेक्षणों के आंकड़ों को एक साझा वैज्ञानिक ढांचे में उपलब्ध कराता है। इस डेटासेट में वर्ष 1991 से 2023 के बीच प्रकाशित 465 अध्ययनों की जानकारी शामिल है।
इसके अंतर्गत देश के प्रमुख पारिस्थितिक क्षेत्रों में फैले 4,650 हेक्टेयर से अधिक वन क्षेत्र के आंकड़ों को संकलित किया गया है। इसमें उष्णकटिबंधीय, उपोष्णकटिबंधीय, पर्वतीय और द्वीपीय पारिस्थितिकी तंत्र भी शामिल हैं।
अब तक अलग-अलग अध्ययनों में बिखरे पड़े वृक्ष गणना के आंकड़ों को मानकीकृत कर एकीकृत रूप में प्रस्तुत करना इस पहल की प्रमुख विशेषता है। इससे विभिन्न क्षेत्रों के वनों की तुलना, जैव विविधता का आकलन और कार्बन भंडारण, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव तथा टिकाऊ वन प्रबंधन से जुड़े व्यापक अध्ययन करना आसान होगा।
इससे संबंधित शोध में एक महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है कि मूल अध्ययनों के 80 प्रतिशत से अधिक डेटासेट सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं। इसके कारण स्थानीय स्तर पर व्यापक सर्वेक्षण किए जाने के बावजूद उनके आंकड़ों का दूसरे शोधकर्ताओं द्वारा उपयोग सीमित रह जाता है।
अधिकांश अध्ययन छोटे क्षेत्रों तक सीमित रहे हैं और नमूना सर्वेक्षण का औसत क्षेत्रफल लगभग दो हेक्टेयर के मध्य मान के आसपास है। डेटासेट ने देश के कई ऐसे क्षेत्रों की भी पहचान की है, जहां जैव विविधता समृद्ध होने के बावजूद पर्याप्त अध्ययन नहीं हुए हैं। इनमें उत्तरी पश्चिमी घाट, पूर्वोत्तर भारत, पश्चिमी हिमालय और निकोबार द्वीपसमूह शामिल हैं।
पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों में तेजी से हो रहे वन क्षरण के बावजूद वहां पारिस्थितिक आंकड़ों की कमी भी सामने आई है। InvenTree-meta का उद्देश्य दक्षिण एशिया के वनों को वैश्विक वैज्ञानिक डेटाबेस में बेहतर प्रतिनिधित्व दिलाना और वन अनुसंधान के आंकड़ों तक पहुंच बढ़ाना है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर के कई डेटाबेस में इस क्षेत्र के वनों का प्रतिनिधित्व अब तक सीमित रहा है। यह पहल वन संरक्षण, जलवायु अनुसंधान और वैज्ञानिक आधार पर वन प्रबंधन की योजनाएं तैयार करने में उपयोगी साबित हो सकती है। साथ ही, इससे उन क्षेत्रों में नए सर्वेक्षण और सहयोगात्मक शोध करने में मदद मिलेगी, जहां आंकड़ों की कमी के कारण पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिति का समुचित आकलन करना कठिन रहा है।
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