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Environment Pulse > ईको सिस्टम > जैव-विविधता > ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के आवास के पास चूना पत्थर खनन को केंद्र ने टाला
जैव-विविधता

ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के आवास के पास चूना पत्थर खनन को केंद्र ने टाला

Environment Pulse
Last updated: September 11, 2026 12:40 pm
Environment Pulse
Published: September 11, 2026
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केंद्र सरकार ने राजस्थान के जैसलमेर में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (गोडावण) के आवास के पास डालमिया भारत ग्रीन विजन लिमिटेड की चूना पत्थर खनन परियोजना को फिलहाल पर्यावरणीय मंजूरी देने से रोक दिया है। विशेषज्ञ समिति ने स्वीकृत उत्पादन क्षमता, वन्यजीव संस्थान (WII) की सिफारिशों का पालन करने और खनन के संभावित प्रभावों से सुरक्षा के लिए विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

एनवायरमेंट पल्स डेस्क। राजस्थान के जैसलमेर जिले के रामगढ़ में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के महत्वपूर्ण आवास के नजदीक प्रस्तावित चूना पत्थर खनन परियोजना को केंद्र सरकार ने फिलहाल पर्यावरणीय मंजूरी देने से रोक दिया है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति ने परियोजना से जुड़ी कई कमियों को दूर करने और वन्यजीव संरक्षण से संबंधित सिफारिशों का पालन सुनिश्चित करने को कहा है।

डालमिया भारत ग्रीन विजन लिमिटेड की इस परियोजना के तहत 256 हेक्टेयर क्षेत्र में हर साल 54 लाख टन चूना पत्थर निकालने का प्रस्ताव है।

खनन क्षेत्र के पास एक सीमेंट संयंत्र भी प्रस्तावित है, जहां निकाले गए चूना पत्थर का इस्तेमाल किया जाएगा। कुछ चूना पत्थर स्टील उद्योग को भी आपूर्ति किया जाएगा।

24 अगस्त को हुई विशेषज्ञ समिति की बैठक के विवरण के अनुसार, भारतीय खान ब्यूरो ने परियोजना के लिए केवल 2.99 मिलियन टन प्रतिवर्ष की खनन योजना को मंजूरी दी थी, जबकि प्रस्तावित क्षमता इससे काफी अधिक है।

समिति ने खनन योजना को स्वीकृत उत्पादन क्षमता और पर्यावरणीय मंजूरी के लिए तय शर्तों के अनुरूप संशोधित करने का निर्देश दिया है। समिति ने खनन क्षेत्र में होने वाली ब्लास्टिंग से गैस और जल पाइपलाइनों की सुरक्षा पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को लेकर भी विस्तृत कार्ययोजना मांगी है।

साथ ही, भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) की सिफारिशों को पूरी तरह लागू करने पर जोर दिया गया है। प्रस्तावित खनन स्थल ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के प्राथमिक संरक्षण क्षेत्र से करीब 1.77 किलोमीटर दूर है। WII के अध्ययन के मुताबिक खदान और उसके प्रत्यक्ष प्रभाव वाला क्षेत्र प्राथमिक ग्रेट इंडियन बस्टर्ड क्षेत्र से बाहर है और इसे प्रजाति का महत्वपूर्ण आवास नहीं माना गया है।

हालांकि, अध्ययन में यह भी बताया गया है कि खदान का अप्रत्यक्ष प्रभाव क्षेत्र प्राथमिक संरक्षण क्षेत्र में आता है और वहां ग्रेट इंडियन बस्टर्ड से जुड़ी अन्य प्रजातियों के आवास मौजूद हैं। WII ने खनन गतिविधियों के प्रभाव को कम करने के लिए केंद्रित संरक्षण एवं शमन योजना की सिफारिश की है।

इसमें नेती क्षेत्र के आसपास क्षतिपूरक संरक्षण, घासभूमि की सुरक्षा और आक्रामक वनस्पतियों को हटाने जैसे उपाय शामिल हैं। समिति ने यह भी कहा है कि खनन सामग्री के परिवहन के लिए मौजूदा सड़क ढांचे का अधिकतम उपयोग किया जाए, ताकि आसपास के उपयुक्त वन्यजीव आवासों में व्यवधान कम हो।

नई सड़कों की जरूरत होने पर यह सुनिश्चित करना होगा कि उनका मार्ग छोटे घासभूमि क्षेत्रों से होकर या उनके नजदीक से न गुजरे। भारत में गंभीर रूप से संकटग्रस्त ग्रेट इंडियन बस्टर्ड की जंगली आबादी फिलहाल करीब 130 पक्षियों की बताई जाती है। ऐसे में संरक्षण क्षेत्रों के आसपास होने वाली विकास और खनन गतिविधियों में पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर अतिरिक्त सावधानी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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