आर्मेनिया ने संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के साथ मिलकर दुनिया भर के पर्वतीय क्षेत्रों और उनसे जुड़े मीठे पानी के पारिस्थितिकी तंत्रों के संरक्षण के लिए ‘येरेवन प्लेटफॉर्म ऑन माउंटेन्स एंड रिलेटेड फ्रेशवाटर इकोसिस्टम्स’ नामक वैश्विक पहल की शुरुआत की है। COP17 के दौरान शुरू किए गए इस अभियान का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय सहयोग और वित्तीय संसाधनों को बढ़ाकर पर्वतीय जैव विविधता, जल सुरक्षा और लगभग 1.2 अरब लोगों की आजीविका की रक्षा करना है, क्योंकि पर्वत दुनिया के मीठे पानी के प्रवाह का 55 से 60 प्रतिशत हिस्सा उपलब्ध कराते हैं। इस पहल के तहत जल स्रोतों की सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और स्थानीय समुदायों को सहायता देने पर जोर दिया जाएगा, जिसकी समीक्षा अक्टूबर 2027 में किर्गिस्तान में होने वाले ‘बिश्केक+25’ शिखर सम्मेलन से पहले की जाएगी।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क : दुनिया भर में पर्वतीय क्षेत्रों और उनसे जुड़े मीठे पानी के पारिस्थितिकी तंत्रों के संरक्षण एवं पुनर्स्थापन के लिए आर्मेनिया ने संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के साथ मिलकर एक वैश्विक पहल शुरू की है। 28 अक्टूबर को संयुक्त राष्ट्र जैव विविधता सम्मेलन (CBD COP17) के दौरान शुरू किए गए इस अभियान का उद्देश्य पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्रों की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग, वित्तीय सहायता और तकनीकी संसाधनों को बढ़ावा देना है।
‘येरेवन प्लेटफॉर्म ऑन माउंटेन्स एंड रिलेटेड फ्रेशवाटर इकोसिस्टम्स’ नामक इस पहल को COP17 की आर्मेनियाई अध्यक्षता की चार प्रमुख पहलों में शामिल किया गया है। इसके तहत पर्वतीय देशों और उन निचले क्षेत्रों के देशों के बीच नियमित संवाद स्थापित किया जाएगा, जो अपनी जल आपूर्ति के लिए पर्वतीय क्षेत्रों पर निर्भर हैं।
पर्वत दुनिया के वार्षिक मीठे पानी के प्रवाह का 55 से 60 प्रतिशत हिस्सा उपलब्ध कराते हैं। ये करीब 1.2 अरब लोगों की आजीविका का आधार हैं। दुनिया के 36 जैव विविधता हॉटस्पॉट में से 25 में महत्वपूर्ण पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र मौजूद हैं। यहां उभयचरों, पक्षियों और स्तनधारियों की दुनिया की लगभग 85 प्रतिशत प्रजातियां पाई जाती हैं, जबकि पर्वतीय क्षेत्रों का केवल 19 प्रतिशत हिस्सा संरक्षित है।
आर्मेनिया के पर्यावरण मंत्री और COP17 के नामित अध्यक्ष हम्बारजूम मातेवोस्यान ने कहा कि स्वस्थ पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र जैव विविधता, जल सुरक्षा, कृषि और लोगों की आजीविका के लिए आवश्यक हैं। उन्होंने राष्ट्रीय योजनाओं, जलवायु रणनीतियों और सरकारी बजट में पर्वतीय एवं मीठे पानी के पारिस्थितिकी तंत्रों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। UNEP की कार्यकारी निदेशक इंगर एंडरसन ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में होने वाले पर्यावरणीय बदलाव केवल वहीं तक सीमित नहीं रहते, बल्कि उनका प्रभाव दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों पर भी पड़ता है।
पर्वत जल उपलब्धता को नियंत्रित करने, खाद्य सुरक्षा बनाए रखने और एक अरब से अधिक लोगों की आजीविका को सहारा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस पहल के तहत जल स्रोतों की सुरक्षा, क्षतिग्रस्त प्राकृतिक आवासों के पुनर्स्थापन और स्थानीय समुदायों को सहायता देने के लिए व्यावहारिक कदम उठाए जाएंगे। साथ ही शुरुआती चेतावनी प्रणालियों और आपदा से निपटने की तैयारियों को मजबूत करने पर भी ध्यान दिया जाएगा।
इससे पहले COP17 में पहली बार विशेष ‘माउंटेन डे’ का आयोजन किया गया। इसमें विभिन्न देशों की सरकारों, संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों, शोध संस्थानों, आदिवासी संगठनों, पशुपालक समुदायों, युवा समूहों और वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। चार सत्रों में पर्वतीय जैव विविधता, निवेश, स्थानीय समुदायों की भूमिका और क्षेत्रीय संरक्षण पहलों पर चर्चा हुई।
इस प्लेटफॉर्म को अक्टूबर 2027 में किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित होने वाले दूसरे वैश्विक पर्वतीय शिखर सम्मेलन (बिश्केक+25) से पहले एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले वर्षों में प्रमुख जैव विविधता सम्मेलनों के साथ उच्चस्तरीय संवाद आयोजित किए जाएंगे। विभिन्न देशों की जरूरतों के अनुरूप तकनीकी सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी। पहल की प्रगति की समीक्षा कर अगली संयुक्त राष्ट्र जैव विविधता बैठक COP18 में रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी।

