By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
Environment PulseEnvironment PulseEnvironment Pulse
Notification Show More
Font ResizerAa
  • ईको सिस्टम
    • जल
    • जंगल
    • जमीन
    • हवा
    • खनिज
    • जैव-विविधता
    • गतिविधियां
  • कचरा-प्रबंधन
    • ग्रीन बिजनेस
    • रीसाइकलिंग
    • इन्नोवेशन
    • इनिशिएटिव्स
  • फ्यूचर ग्रीन
    • ऊर्जा
    • सस्टेनिबिलिटी
    • इलेक्ट्रिक व्हीकल
    • कृषि एवं खाद्य
  • ओपिनियन
    • विचार
    • इम्पैक्ट फीचर
    • स्टोरी
  • मल्टीमीडिया
    • वीडियो
Reading: टी. रेक्स के दांतों ने खोला राज, शरीर का तापमान इंसानों जितना था करीब
Share
Font ResizerAa
Environment PulseEnvironment Pulse
  • ईको सिस्टम
  • कचरा-प्रबंधन
  • फ्यूचर ग्रीन
  • ओपिनियन
  • मल्टीमीडिया
Search
  • ईको सिस्टम
    • जल
    • जंगल
    • जमीन
    • हवा
    • खनिज
    • जैव-विविधता
    • गतिविधियां
  • कचरा-प्रबंधन
    • ग्रीन बिजनेस
    • रीसाइकलिंग
    • इन्नोवेशन
    • इनिशिएटिव्स
  • फ्यूचर ग्रीन
    • ऊर्जा
    • सस्टेनिबिलिटी
    • इलेक्ट्रिक व्हीकल
    • कृषि एवं खाद्य
  • ओपिनियन
    • विचार
    • इम्पैक्ट फीचर
    • स्टोरी
  • मल्टीमीडिया
    • वीडियो
Have an existing account? Sign In
Follow US
Environment Pulse > ईको सिस्टम > जैव-विविधता > टी. रेक्स के दांतों ने खोला राज, शरीर का तापमान इंसानों जितना था करीब
AI Image
जैव-विविधता

टी. रेक्स के दांतों ने खोला राज, शरीर का तापमान इंसानों जितना था करीब

Environment Pulse
Last updated: October 2, 2026 8:39 pm
Environment Pulse
Published: October 2, 2026
Share
AI Image
SHARE

कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय (UCLA) के वैज्ञानिकों ने मोंटाना से मिले 6.6 करोड़ साल पुराने टी. रेक्स (T. rex) के जीवाश्म दांतों के रासायनिक संकेतों (आसोटोप थर्मोमेट्री) का विश्लेषण करके पहली बार इसके शरीर के तापमान का पता लगाया है। अध्ययन के अनुसार, टी. रेक्स का शरीर का तापमान लगभग 97 डिग्री फ़ारेनहाइट (36.3 डिग्री सेल्सियस) था, जो इंसानों और आधुनिक स्तनधारियों के तापमान के करीब है। यह इस बात का मजबूत प्रमाण है कि टी. रेक्स एक गर्म-रक्त वाला (एंडोथर्मिक) डायनासोर था, जिसका मेटाबॉलिज्म अधिक सक्रिय रहा होगा और वह बाहरी वातावरण की गर्मी पर निर्भर रहने के बजाय स्थिर तापमान बनाए रखने में सक्षम था।

एनवायरमेंट पल्स डेस्क: 6.6 करोड़ साल पहले धरती पर राज करने वाले विशाल शिकारी डायनासोर टायरानोसॉरस रेक्स (T. rex) के शरीर का तापमान पहली बार वैज्ञानिकों ने उसके जीवाश्म दांतों के रासायनिक संकेतों से पता लगाया है।

अध्ययन के मुताबिक, टी. रेक्स का शरीर लगभग 97 डिग्री फ़ारेनहाइट (36.3 डिग्री सेल्सियस) तापमान पर रहता था, जो इंसान और हाथी जैसे आधुनिक स्तनधारियों के शरीर के तापमान के करीब है।

यह अध्ययन 16 सितंबर 2026 को Science Advances पत्रिका में प्रकाशित हुआ। कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, लॉस एंजिलिस (UCLA) के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में वैज्ञानिकों ने मोंटाना की हेल क्रीक फॉर्मेशन से मिले तीन टी. रेक्स दांतों का विश्लेषण किया। इनमें दो दांत लॉस एंजिलिस काउंटी के नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम में संरक्षित

एक अच्छी तरह संरक्षित युवा वयस्क नमूने के थे, जिसे “थॉमस” नाम दिया गया है। वैज्ञानिकों ने क्लंप्ड आइसोटोप थर्मोमेट्री नामक तकनीक का इस्तेमाल किया। इस पद्धति में दांतों के इनेमल में कार्बन और ऑक्सीजन के दुर्लभ भारी समस्थानिकों के बीच रासायनिक बंधों का अध्ययन किया जाता है। ये बंध अलग-अलग तापमान पर अलग मात्रा में बनते हैं।

चूंकि जीवित डायनासोर के शरीर में दांतों का इनेमल विकसित होता था, इसलिए उसमें दर्ज रासायनिक संकेत उस समय के शरीर के तापमान का प्राकृतिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखते हैं। तीनों दांतों से प्राप्त औसत तापमान 36.3 ± 2.5 डिग्री सेल्सियस रहा। अलग-अलग दांतों में तापमान लगभग 34.7 से 37.3 डिग्री सेल्सियस के बीच पाया गया।

शोधकर्ताओं ने उसी भूगर्भीय संरचना से मिले तत्कालीन मगरमच्छ जैसे जीवों के दांतों का भी विश्लेषण किया। इनका औसत तापमान लगभग 30.9 डिग्री सेल्सियस पाया गया। यह आधुनिक ठंडे खून वाले सरीसृपों के अनुरूप है, जो अपने शरीर का तापमान बनाए रखने के लिए बाहरी गर्मी पर निर्भर रहते हैं। UCLA के जियोबायोलॉजिस्ट और अध्ययन के सह-लेखक रॉबर्ट ईगल ने कहा कि इस तरह का तापमान मापन पहले संभव नहीं हुआ था। उनके अनुसार, टी. रेक्स का तापमान करीब 36 डिग्री सेल्सियस था, जो इंसानों के समान है और अधिकांश सरीसृपों की तुलना में अधिक है।

अध्ययन के नतीजे इस धारणा को मजबूत करते हैं कि टी. रेक्स गर्म-रक्त वाला यानी एंडोथर्मिक डायनासोर था। इसका अर्थ है कि वह बाहरी वातावरण के तापमान पर निर्भर रहने के बजाय अपने शरीर के भीतर अपेक्षाकृत स्थिर तापमान बनाए रखने में सक्षम था।

इससे टी. रेक्स की पारंपरिक छवि भी बदलती है। उसे लंबे समय तक एक ऐसे विशाल सरीसृप के रूप में चित्रित किया जाता रहा है जो धूप में बैठकर अपने शरीर को गर्म करता था और अपेक्षाकृत धीमी गति से चलता था। गर्म-रक्त वाले शरीर का अर्थ है कि उसका मेटाबॉलिज्म अधिक सक्रिय रहा होगा और वह लंबे समय तक ऊर्जावान गतिविधियां करने में सक्षम रहा होगा।

हालांकि, इस तरह के तेज मेटाबॉलिज्म को बनाए रखने के लिए उसे बड़ी मात्रा में भोजन की आवश्यकता भी पड़ती होगी। शोधकर्ताओं के अनुसार, 36 डिग्री सेल्सियस के आसपास शरीर का तापमान रखने वाला जानवर अपने वातावरण से गर्म होने की प्रतीक्षा नहीं करता था। अध्ययन की वरिष्ठ लेखिका अराधना त्रिपाठी ने टी. रेक्स की तापीय स्वतंत्रता की तुलना हाथी और शुतुरमुर्ग जैसे आधुनिक जानवरों से की।

उनके अनुसार, यह मगरमच्छ जैसे बाहरी ताप स्रोतों पर निर्भर जीवों की तुलना में इन जानवरों के अधिक करीब था। नतीजे बड़े थेरोपोड डायनासोरों में गर्म-रक्तीयता की ओर संकेत करने वाले अन्य हालिया वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ भी मेल खाते हैं। इससे यह समझने में मदद मिल सकती है कि टी. रेक्स क्रेटेशियस काल के अंतिम चरण में उत्तरी अमेरिका के विशाल और अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों में किस तरह सफलतापूर्वक जीवित रह सका। वैज्ञानिकों ने इस अध्ययन के लिए जीवाश्मों को नुकसान से बचाने का भी विशेष ध्यान रखा। प्रत्येक दांत से नमूने के तौर पर एक चुटकी नमक से भी कम मात्रा का इनेमल पाउडर निकाला गया।

इसके लिए बेहद सावधानी से न्यूनतम क्षति वाली ड्रिलिंग तकनीक अपनाई गई, ताकि महत्वपूर्ण जीवाश्म भविष्य के शोध के लिए सुरक्षित रह सकें। करीब 66 मिलियन वर्ष पुराने दांतों में सुरक्षित रासायनिक संकेतों ने इस तरह वैज्ञानिकों को उस दौर के सबसे प्रसिद्ध शिकारी के शरीर के भीतर की गर्मी का अनुमान लगाने का मौका दिया है। अध्ययन से टी. रेक्स की जीवविज्ञान और उसके सक्रिय, गर्म-रक्त वाले जीवन के बारे में समझ को एक नया वैज्ञानिक आधार मिला है।

Also Read: इको-टूरिज्म ने बदली किस्मत, ब्राजील में फिर दहाड़ रहे जगुआर

You Might Also Like

राष्ट्रीय प्राणी उद्यान में आयोजित हुए ‘ट्री वॉक’ और ‘बर्ड वॉक’ कार्यक्रम
जलवायु परिवर्तन से नीलगिरी बायोस्फीयर रिजर्व के वन पारिस्थितिकी तंत्र में बढ़ी अस्थिरता, शोधकर्ताओं ने चेताया
भारत में 6,300 से अधिक गंगा नदी डॉल्फिन, पहली व्यापक राष्ट्रीय गणना में सामने आई आबादी
Great Nicobar Project: Development Vision or Ecological Gamble?
Field Surveys in Southern India Highlight Conservation Efforts for Rare Endemic Tarantulas
TAGGED:Clumped Isotope ThermometryCretaceous Apex PredatorEndothermic MetabolismFossilized Teeth AnalysisT. Rex Body TemperatureWarm-Blooded Dinosaur
Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp LinkedIn Email Copy Link Print
1 Comment
  • Pingback: जल संकट ने एरिजोना में बढ़ाई राजनीतिक सरगर्मी, स्थानीय स्तर पर भी तेज हुई कार्रवाई – Environment Pulse

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
LinkedInFollow
Popular News
AI Image
ऊर्जाकृषि एवं खाद्यफ्यूचर ग्रीनसस्टेनिबिलिटी

India’s Homemakers turning to the Green Road to prosperity

Environment Pulse
Environment Pulse
August 17, 2026
जलवायु परिवर्तन से नीलगिरी बायोस्फीयर रिजर्व के वन पारिस्थितिकी तंत्र में बढ़ी अस्थिरता, शोधकर्ताओं ने चेताया
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने मनाया अपना 20 वां स्थापना दिवस
पूर्व यूएन पर्यावरण प्रमुख एरिक सोल्हेम ने की भारत की प्राचीन विद्या-स्थली की सराहना
किचन वेस्ट को क्लाइमेट मूवमेंट में बदल रहे सस्टेनेबिलिटी एजुकेटर अश्विन, जानिए कैसे आसान और सस्ती आदतों से ला रहे हैं बड़ा बदलाव

Categories

  • जल
  • जमीन
  • जंगल
  • जैव-विविधता
  • हवा
  • खनिज
  • ऊर्जा
  • ग्रीन जॉब
  • स्टोरी
  • इम्पैक्ट फीचर
  • वीडियो

About US

Environmentpulse.com is a bilingual (Hindi-English) news platform that presents high-quality news, views, and videos related to the environment.
Quick Link
  • ऊर्जा
  • खनिज
  • जैव-विविधता
  • जंगल
Top Categories
  • My Bookmark
  • Contact
  • Privacy Policy
Environment PulseEnvironment Pulse
© Pratham Publisher and Informatics Private Limited. All Rights Reserved. | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?