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Environment Pulse > ईको सिस्टम > स्वदेशी तकनीकों के केंद्र के रूप में भारत को स्थापित करने में विज्ञान की अहम भूमिका : विशेषज्ञ
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स्वदेशी तकनीकों के केंद्र के रूप में भारत को स्थापित करने में विज्ञान की अहम भूमिका : विशेषज्ञ

Environment Pulse
Last updated: November 5, 2026 8:10 pm
Environment Pulse
Published: November 5, 2026
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भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-आईआईटीआर), लखनऊ ने अपना 62वां स्थापना दिवस समारोह धूमधाम से मनाया। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और जैव विविधता के क्षरण जैसी गंभीर चुनौतियों से निपटने के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान और विष विज्ञान की भूमिका पर विशेष जोर दिया गया। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में सीएसआईआर की महानिदेशक डॉ. एन. कलैसेल्वी सहित कई गणमान्य अतिथि शामिल हुए। इस दौरान संस्थान की नई माइक्रोबायोलॉजी और कौशल विकास सुविधाओं का शुभारंभ करने के साथ-साथ वार्षिक रिपोर्ट, कॉफी टेबल बुक, ई-परम और प्रगति पोर्टल सहित विभिन्न प्रकाशनों का विमोचन किया गया। साथ ही, तकनीकी नवाचारों को बढ़ावा देने और अनुसंधान को गति देने के लिए कई प्रतिष्ठित संस्थानों (जैसे मेदांता और मानव रचना) के साथ समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान किया गया तथा उत्कृष्ट कार्य करने वाले वैज्ञानिकों व कर्मचारियों को पुरस्कृत किया गया।

एनवायरमेंट पल्स डेस्क : जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और जैव विविधता का क्षरण आज मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण के सामने गंभीर चुनौतियां बनकर उभरे हैं। इन समस्याओं से निपटने में वैज्ञानिक अनुसंधान और टॉक्सिकोलॉजी (विष विज्ञान) की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।

विष विज्ञान के माध्यम से उन अदृश्य खतरों की पहचान की जा सकती है, जिनका जीव-जगत और मानव स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। यह बात पद्मश्री ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के महानिदेशक और बेंगलुरु विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. जयकारा एसएम ने कही। वह बुधवार को सीएसआईआर-भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-आईआईटीआर), लखनऊ के 62वें स्थापना दिवस समारोह में 30वें प्रोफेसर सिब्ते हसन जैदी स्मृति व्याख्यान को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने विश्व बैंक के हालिया सर्वेक्षण का उल्लेख करते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और प्रकृति का नुकसान एक-दूसरे से जुड़े वैश्विक संकट हैं। इन चुनौतियों के कारण कई देशों में विकास की उपलब्धियां प्रभावित हो रही हैं।

उन्होंने विषैले पदार्थों के सीमित उपयोग से प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने के ऐतिहासिक प्रयासों और उपचार में उनके लाभ तथा विषाक्तता के बीच संतुलन की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला। समारोह की मुख्य अतिथि सीएसआईआर की महानिदेशक एवं भारत सरकार के वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान विभाग की सचिव डॉ. (श्रीमती) एन. कलैसेल्वी ने संस्थान को 62 वर्ष पूरे होने पर बधाई दी। उन्होंने वैज्ञानिकों, उद्योग जगत और शैक्षणिक संस्थानों से राष्ट्रहित में अनुसंधान एवं नवाचार के प्रति प्रतिबद्धता मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि संस्थान में स्थापित नई माइक्रोबायोलॉजी और कौशल विकास सुविधाएं अनुसंधान गतिविधियों को नई गति देंगी।

इस अवसर पर उन्होंने संस्थान की वार्षिक रिपोर्ट और कॉफी टेबल बुक का विमोचन करने के साथ ई-परम और प्रगति पोर्टल का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में कदंबा ग्रुप ऑफ ऑर्गनाइजेशंस, बेंगलुरु के संस्थापक एवं चेयरमैन-मैनेजिंग डायरेक्टर तथा पूर्व केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री अनंत कुमार हेगड़े विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने संस्थान के टेक्नोलॉजी कंपेंडियम और AIMFIN लोगो का अनावरण किया तथा अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों में सहयोग जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई।

महाराष्ट्र सरकार के कैबिनेट मंत्री एवं हिंगोली स्थित बालासाहेब ठाकरे हरिद्रा (हल्दी) अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र के अध्यक्ष हेमंत पाटिल ने हिंदी कार्यान्वयन पुस्तिका और ‘विषविज्ञान संदेश’ का विमोचन किया। उन्होंने कहा कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में निवेश का प्रत्येक रुपया देश के भविष्य को मजबूत करता है। वैज्ञानिक समुदाय का समर्पण राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

सीएसआईआर-आईआईटीआर की रिसर्च काउंसिल के अध्यक्ष, सीएसआईआर-एनआईआईएसटी के पूर्व निदेशक एवं हैदराबाद स्थित इन्कोर लाइफ साइंसेज के अध्यक्ष प्रो. जावेद इकबाल ने संस्थान के विभिन्न प्रकाशनों का विमोचन किया। साथ ही iDTRiP समझौता ज्ञापनों को औपचारिक रूप देने और SCoPE किट के हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी की गई। उन्होंने कहा कि सीएसआईआर दशकों से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। अब इस क्षमता का उपयोग तकनीकी नवाचारों को आगे बढ़ाने में किया जाना चाहिए।

फेयर लैब्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक द्विजेंद्र माथुर ने पीटीपी आरएमपी कॉन्क्लेव सर्कुलर जारी किया। उन्होंने प्रमाणित संदर्भ सामग्रियों (सीआरएम) के विकास को महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि इससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी और मेक इन इंडिया अभियान को मजबूती मिलेगी। संस्थान ने शैक्षणिक एवं संस्थागत सहयोग को विस्तार देते हुए मानव रचना इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रिसर्च एंड स्टडीज, मेदांता ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स और जेएसएस एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन एंड रिसर्च, मैसूरु के साथ समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान भी किया। समारोह में संस्थान के कर्मचारियों और शोधार्थियों की उत्कृष्ट उपलब्धियों को सम्मानित किया गया। यंग एम्प्लॉयी ऑफ द ईयर, रिसर्च स्कॉलर ऑफ द ईयर, एम्प्लॉयी ऑफ द ईयर, टेक्निकल स्टाफ ऑफ द ईयर, बेस्ट रिसर्च पब्लिकेशन और यंग साइंटिस्ट ऑफ द ईयर जैसी श्रेणियों में पुरस्कार प्रदान किए गए। कार्यक्रम का समापन संस्थान के शोधार्थियों और वैज्ञानिक कर्मचारियों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ हुआ।

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