भारतीय विष विज्ञान अनुसंधान संस्थान (आईआईटीआर) की पोस्ट-मानसून रिपोर्ट के अनुसार, लखनऊ के नौ प्रमुख आवासीय, व्यावसायिक और औद्योगिक क्षेत्रों में वायु और ध्वनि प्रदूषण का स्तर निर्धारित मानकों से काफी अधिक हो गया है। पिछले वर्ष की तुलना में शहर में पीएम10 का स्तर 26.2% और पीएम2.5 का स्तर 8.2% बढ़ गया है, जिसमें आवासीय क्षेत्रों में इंदिरानगर और व्यावसायिक क्षेत्रों में चारबाग सबसे अधिक प्रदूषित दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा, गोमतीनगर और चारबाग जैसे इलाकों में रात के समय ध्वनि प्रदूषण निर्धारित सीमा से कहीं अधिक रिकॉर्ड किया गया है। आईआईटीआर के वैज्ञानिकों के अनुसार, इस गंभीर स्थिति के मुख्य कारणों में सड़कों व अंडरपास का निर्माण, फुटपाथों की खुदाई, पाइपलाइन बिछाने के कार्य, उड़ने वाली धूल और वाहनों की बढ़ती संख्या शामिल है। हालांकि, राहत की बात यह है कि सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड जैसी हानिकारक गैसें और सीसा व निकेल जैसी भारी धातुएं अभी भी सुरक्षित सीमा के भीतर पाई गई हैं।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क : मानसून की विदाई के बाद भी लखनऊ की हवा साफ नहीं हो सकी है। शहर में धूल के बढ़ते कणों और वाहनों से निकलने वाले धुएं ने वायु गुणवत्ता को प्रभावित किया है। भारतीय विष विज्ञान अनुसंधान संस्थान (आईआईटीआर) की ओर से जारी पोस्ट-मानसून रिपोर्ट में शहर के नौ आवासीय, व्यावसायिक और औद्योगिक क्षेत्रों में वायु एवं ध्वनि प्रदूषण का स्तर निर्धारित मानकों से अधिक पाया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले वर्ष की तुलना में इस बार लखनऊ में पीएम10 का स्तर 26.2 प्रतिशत और पीएम2.5 का स्तर 8.2 प्रतिशत बढ़ा है। आवासीय इलाकों में इंदिरानगर की स्थिति सबसे खराब रही, जबकि व्यावसायिक क्षेत्रों में चारबाग सबसे अधिक प्रदूषित दर्ज किया गया। औद्योगिक क्षेत्र अमौसी में भी प्रदूषण का स्तर चिंताजनक मिला।
आवासीय क्षेत्रों में इंदिरानगर में पीएम10 की औसत मात्रा 126.5 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर और पीएम2.5 का स्तर 68.6 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर दर्ज किया गया। अलीगंज दूसरे स्थान पर रहा, जहां पीएम10 का औसत 121 और पीएम2.5 का स्तर 63.5 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर पाया गया। विकासनगर में पीएम10 का औसत 110.4 और पीएम2.5 का स्तर 60.6 रहा। गोमतीनगर में अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति रही, हालांकि वहां पीएम10 का स्तर 105.8 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर दर्ज हुआ, जो निर्धारित सीमा से थोड़ा अधिक है।
व्यावसायिक क्षेत्रों में चारबाग की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित रही। यहां पीएम10 का औसत स्तर 157.2 और पीएम2.5 का 81.6 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर दर्ज किया गया। वहीं, अमौसी औद्योगिक क्षेत्र में पीएम10 का औसत 188.5 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर तक पहुंच गया, जबकि पीएम2.5 का स्तर 93.5 दर्ज किया गया। यह निर्धारित मानकों से काफी अधिक है।
ध्वनि प्रदूषण ने भी शहरवासियों की परेशानी बढ़ाई है। आवासीय क्षेत्र गोमतीनगर में रात के समय शोर का स्तर 76.7 डेसिबल रिकॉर्ड किया गया, जबकि निर्धारित सीमा 45 डेसिबल है। इंदिरानगर में दिन के समय ध्वनि प्रदूषण 73.7 और रात में 66.8 डेसिबल रहा। चारबाग में रात के समय शोर 87.4 डेसिबल तक पहुंच गया, जो व्यावसायिक क्षेत्र के लिए निर्धारित 55 डेसिबल की सीमा से काफी अधिक है।
अमौसी में दिन और रात का ध्वनि प्रदूषण क्रमशः 76.6 और 73.5 डेसिबल दर्ज किया गया। आईआईटीआर की वैज्ञानिक टीम ने प्रदूषण के प्रमुख कारणों में सड़कों और अंडरपास का निर्माण, फुटपाथों की खुदाई, पानी-बिजली की पाइपलाइन तथा केबल बिछाने के कार्यों को शामिल किया है। इन गतिविधियों से उड़ने वाली धूल के अलावा सड़कों पर वाहनों की बढ़ती संख्या और लंबे जाम भी वायु गुणवत्ता बिगाड़ रहे हैं।
हालांकि, रिपोर्ट में एक राहत की बात यह सामने आई है कि सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड जैसी हानिकारक गैसों तथा सीसा और निकेल जैसी भारी धातुओं की मात्रा निर्धारित सुरक्षित सीमा के भीतर पाई गई है। इसके बावजूद धूल और सूक्ष्म कणों के बढ़ते स्तर के साथ ध्वनि प्रदूषण की स्थिति शहर के लिए गंभीर पर्यावरणीय चुनौती बनी हुई है।
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