अमृतसर के 18 वर्षीय शिवांश सरीन ने पराली जलाने की समस्या से निपटने और कृषि अवशेषों से बिजली तथा उपयोगी उत्पाद बनाने के लिए ‘एग्रीवोल्ट कार्बन एआई’ (AgriVolt Carbon AI) नामक अभिनव प्रोजेक्ट तैयार किया है, जिसे सैमसंग के ‘सॉल्व फॉर टुमॉरो’ कार्यक्रम के शीर्ष 40 प्रतिभागियों में शामिल किया गया है। शिवांश के इस प्रोटोटाइप में थर्मोइलेक्ट्रिक जनरेटर की मदद से कृषि अवशेषों से बिजली पैदा की जाती है और इसे अधिक प्रभावी बनाने के लिए सेंसर तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI, विशेष रूप से रीइन्फोर्समेंट लर्निंग) का उपयोग किया जाता है। इस परियोजना का उद्देश्य बिजली के साथ-साथ बायोचार जैसे कार्बन-समृद्ध पदार्थों की उपयोगिता बढ़ाकर वायु प्रदूषण को कम करना, मिट्टी की रक्षा करना और पराली को किसानों के लिए आर्थिक रूप से उपयोगी संसाधन में बदलना है।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क : अमृतसर के 18 वर्षीय शिवांश सरीन ने पराली जलाने की समस्या से निपटने के लिए कृषि अवशेषों से बिजली और उपयोगी उत्पाद तैयार करने की अभिनव योजना बनाई है। उनका प्रोजेक्ट ‘एग्रीवोल्ट कार्बन एआई’ (AgriVolt Carbon AI) सैमसंग के प्रमुख कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व कार्यक्रम ‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो’ के शीर्ष 40 प्रतिभागियों में शामिल हुआ है।
शिवांश ने स्कूली स्तर पर एक प्रोटोटाइप तैयार किया है, जो थर्मोइलेक्ट्रिक जनरेटर की मदद से कृषि अवशेषों से बिजली पैदा करने की क्षमता प्रदर्शित करता है। अब वह इस तकनीक को व्यापक स्तर पर विकसित करना चाहते हैं। उनकी प्रस्तावित प्रणाली में सेंसर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), विशेष रूप से रीइन्फोर्समेंट लर्निंग, का इस्तेमाल किया जाएगा, ताकि कृषि अवशेषों के प्रसंस्करण को अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
इस परियोजना का उद्देश्य बिजली के साथ बायोचार और अन्य कार्बन-समृद्ध पदार्थों की उपयोगिता बढ़ाना भी है। भविष्य में इन पदार्थों का इस्तेमाल एक्टिवेटेड कार्बन और कार्बन ब्लैक जैसे उत्पादों में किया जा सकता है। कृषि क्षेत्र से जुड़े समुदायों के बीच पले-बढ़े शिवांश ने महसूस किया कि किफायती विकल्पों की कमी के कारण किसान पराली जलाने को मजबूर होते हैं।
उन्होंने अमृतसर के आसपास के गांवों में जाकर ग्राम प्रधानों और स्थानीय लोगों से बातचीत की, ताकि अपने विचार की व्यावहारिक संभावनाओं को समझ सकें। शिवांश का लक्ष्य पराली जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण को कम करना, मिट्टी की गुणवत्ता की रक्षा करना और कृषि अपशिष्ट को आर्थिक रूप से उपयोगी संसाधन में बदलना है।
Also Read: इंग्लैंड के पोल्ट्री फार्मों में बर्ड फ्लू का नया प्रकोप, हजारों मुर्गियों को मारने का आदेश

