दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के संगठन (आसियान) ने अपनी पहली जलवायु अनुकूलन गाइड जारी की है, जिसमें जंगलों के संरक्षण और बहाली के नाम पर अपनाए जाने वाले उन उपायों के प्रति आगाह किया गया है जो पर्यावरणीय जोखिम बढ़ा सकते हैं। गाइड में एक ही प्रजाति के बड़े पैमाने पर पेड़ लगाने और पीटयुक्त आर्द्रभूमि को सुखाने जैसी गतिविधियों पर चिंता जताई गई है, क्योंकि इनसे पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंचने के साथ-साथ जंगलों में आग लगने, धुएं और वायु प्रदूषण का खतरा बढ़ जाता है। इस पहल का उद्देश्य सदस्य देशों को ऐसे प्रकृति-आधारित समाधान अपनाने में मदद करना है जो पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए नए खतरे पैदा किए बिना जलवायु अनुकूलन को मजबूत कर सकें।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क : दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के संगठन (आसियान) ने जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए अपनी पहली अनुकूलन गाइड जारी की है। इसमें सदस्य देशों को जंगलों के संरक्षण और बहाली के नाम पर अपनाए जाने वाले ऐसे उपायों से सावधान किया गया है, जो पर्यावरणीय जोखिम बढ़ा सकते हैं।
गाइड में बड़े पैमाने पर एक ही प्रजाति के पेड़ लगाने वाले वृक्षारोपण और पीटलैंड यानी पीटयुक्त आर्द्रभूमि को सुखाने जैसी गतिविधियों पर चिंता जताई गई है। दस्तावेज के अनुसार, इन उपायों को अक्सर वन बहाली या जलवायु संरक्षण के प्रयासों के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, लेकिन इससे पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंच सकता है।
साथ ही जंगलों में आग लगने, धुएं और वायु प्रदूषण का खतरा बढ़ सकता है। आसियान अधिकारियों के मुताबिक, इस गाइड का उद्देश्य सदस्य देशों को ऐसे प्रकृति-आधारित समाधान अपनाने में मदद करना है, जो जलवायु अनुकूलन को मजबूत करें और पर्यावरण तथा मानव स्वास्थ्य के लिए नए खतरे पैदा न करें।
यह पहल दक्षिण-पूर्व एशिया में चरम मौसम, वायु प्रदूषण और पारिस्थितिकी तंत्र के क्षरण से निपटने के क्षेत्रीय प्रयासों को मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे सदस्य देशों की वन प्रबंधन नीतियों और सीमा पार पर्यावरणीय सहयोग को दिशा मिलने की उम्मीद है।
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