भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 की सिंधु जल संधि (IWT) को लेकर विवाद गहरा गया है। अप्रैल 2025 में आतंकवाद के चलते भारत द्वारा संधि को स्थगित किए जाने के बाद से तनाव बढ़ गया है, जिसे पाकिस्तान अवैध मानता है। हालांकि अगस्त 2026 में स्थायी मध्यस्थता न्यायालय (PCA) ने इसे बाध्यकारी बताया, लेकिन भारत ने इसके अधिकार क्षेत्र को खारिज कर दिया है। वर्तमान में जलवायु परिवर्तन, बढ़ती आबादी और पर्यावरणीय संकट जैसी आधुनिक चुनौतियों के चलते छह दशक पुरानी इस संधि में संशोधन और इसके आधुनिकीकरण की मांग तेजी से उठ रही है।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क: भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 की सिंधु जल संधि (IWT) को आधुनिक बनाने की मांग तेज हो रही है। दोनों देशों के बीच जल बंटवारे को लेकर लंबे समय से जारी विवाद के बीच भारत ने अप्रैल 2025 में संधि के तहत सहयोग को स्थगित कर दिया था।
यह कदम जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकी हमले के बाद उठाया गया, जिसके लिए भारत ने पाकिस्तान स्थित समूहों को जिम्मेदार ठहराया था। नई दिल्ली का कहना है कि सीमा पार आतंकवाद पर पाकिस्तान द्वारा विश्वसनीय कार्रवाई किए जाने तक संधि स्थगित रहेगी।
पाकिस्तान ने इस कदम को अवैध बताते हुए कहा है कि संधि को एकतरफा स्थगित नहीं किया जा सकता। 31 अगस्त 2026 को हेग स्थित स्थायी मध्यस्थता न्यायालय (PCA) ने सर्वसम्मति से कहा कि सिंधु जल संधि प्रभावी और दोनों देशों पर बाध्यकारी है।
भारत ने हालांकि PCA के अधिकार क्षेत्र को स्वीकार नहीं किया और ट्रिब्यूनल को अवैध रूप से गठित बताया। विशेषज्ञों का कहना है कि छह दशक पुरानी संधि जलवायु परिवर्तन, नदी प्रवाह में बदलाव, भूजल संकट, जल प्रदूषण, बढ़ती आबादी और चरम मौसम जैसी मौजूदा चुनौतियों से निपटने के लिए पर्याप्त नहीं है।
संधि में सिंधु, झेलम और चिनाब को मुख्यतः पाकिस्तान तथा रावी, ब्यास और सतलुज को भारत के लिए आवंटित किया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार विवाद समाधान, आंकड़ों के आदान-प्रदान और बदलती जल परिस्थितियों से निपटने के लिए संधि में नए प्रावधान जोड़े जाने की आवश्यकता है।
भारत पहले भी संधि में संशोधन की मांग कर चुका है, जबकि पाकिस्तान मौजूदा व्यवस्था की बहाली, नियमित बैठकों और जल संबंधी आंकड़ों के आदान-प्रदान पर जोर देता रहा है।
ऐसे में आधुनिकीकरण की मांग सिंधु बेसिन पर बढ़ते पर्यावरणीय, जनसांख्यिकीय और भू-राजनीतिक दबावों के बीच एक महत्वपूर्ण चर्चा बनकर उभरी है।
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