GEF और IUCN के सहयोग से 2026 में होगी शुरुआत, चरागाहों के टिकाऊ प्रबंधन और सुधार पर केंद्रित।
5,000 से अधिक लोगों को सीधे लाभ की उम्मीद, एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका में ‘साउथ-साउथ लर्निंग एक्सचेंज’ को बढ़ावा।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क
UNCCD COP17 की मेजबानी से पहले मंगोलिया ने वैश्विक स्तर पर ज़मीन के खराब होने (Land Degradation) की समस्या से निपटने के लिए एक बड़े अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट की घोषणा की है। इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य चरागाहों के टिकाऊ प्रबंधन को बढ़ाना और ज़मीन की स्थिति में सुधार करना है। इसकी औपचारिक शुरुआत वर्ष 2026 में होगी, जिसे ग्लोबल एनवायरनमेंट फैसिलिटी (GEF) द्वारा फंड दिया जाएगा। मंगोलिया इस साल अगस्त में UNCCD COP17 की मेजबानी करने जा रहा है, जिससे यह पहल बेहद समयोचित मानी जा रही है।
प्रोजेक्ट की रूपरेखा और फंडिंग
इस नए प्रोजेक्ट का नाम ‘UNCCD मंगोलिया COP17 लिगेसी प्रोजेक्ट’ रखा गया है।
- कार्यान्वयन एजेंसी: इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ़ नेचर (IUCN) GEF की ओर से इसे लागू करने वाली प्रमुख एजेंसी होगी।
- संचालन: मंगोलिया का पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय इसे संचालित करेगा।
- फंडिंग संरचना: इस प्रोजेक्ट के लिए GEF से 3.2 मिलियन डॉलर मिलेंगे, जबकि को-फाइनेंसिंग के जरिए 8 मिलियन डॉलर और जुटाए गए हैं।
- व्यापक पैकेज: यह पहल एक बड़े GEF पैकेज का हिस्सा है, जिसके तहत एशिया, अफ्रीका और पैसिफिक रीजन में IUCN के नेतृत्व में कुल 23 मिलियन डॉलर की फंडिंग शामिल है। यह पहल 2025 में IUCN और मंगोलियाई सरकार के बीच हस्ताक्षरित MoU (समझौते) पर आधारित है। हाल ही में वाशिंगटन, DC स्थित मंगोलियाई दूतावास में दूतावास, मंगोलिया के पर्यावरण मंत्रालय और IUCN के बीच इस पर एक संयुक्त ब्रीफिंग भी हुई थी।
चरागाहों का वैश्विक महत्व और चुनौतियां
चरागाह और घास के मैदान पूरी दुनिया की कुल ज़मीन का लगभग 54% हिस्सा हैं और लगभग 500 मिलियन (50 करोड़) लोगों की जीविका इन्हीं पर निर्भर है। इसके बावजूद, आधे से ज्यादा चरागाह इलाकों में उत्पादन घटने लगा है। इसके मुख्य कारणों में जलवायु परिवर्तन, अत्यधिक चराई, माइनिंग जैसे उद्योग, बढ़ता इंफ्रास्ट्रक्चर और ज़मीन के असुरक्षित अधिकार शामिल हैं। इतनी बड़ी समस्या होने के बाद भी ग्लोबल फंडिंग में चरागाहों की हिस्सेदारी काफी कम रही है।
IUCN के फॉरेस्ट एंड ग्रासलैंड टीम लीड चेतन कुमार ने कहा कि चरागाह और घास के मैदान लाखों लोगों की रोज़ी-रोटी, संस्कृति और विपरीत परिस्थितियों से उबरने की क्षमता प्रदान करते हैं, लेकिन वैश्विक नीतियों और निवेश में इन्हें अक्सर नजरअंदाज किया जाता है। उन्होंने जोर दिया कि सही डेटा और सही नीतियों में निवेश के जरिए यह प्रोजेक्ट लोगों, प्रकृति और जलवायु के लिए दीर्घकालिक लाभ पहुंचाएगा।
प्रोजेक्ट के प्रमुख लक्ष्य और 4 खास हिस्से
इस प्रोजेक्ट से सीधे तौर पर कम से कम 5,000 लोगों को लाभ मिलने की उम्मीद है, जिसमें सिविल सोसाइटी, आदिवासी, स्थानीय समुदाय, युवा और पशुपालक संगठन शामिल होंगे।
प्रोजेक्ट के चार मुख्य स्तंभ
एकजुटता: COP17 प्रेसिडेंसी के तहत सरकारों, सिविल सोसाइटी, चरवाहा संगठनों, मूल निवासियों, स्थानीय लोगों और वैज्ञानिकों को एक मंच पर लाना।
निवेश वृद्धि: चरागाहों की स्थिति सुधारने के प्रयासों में दीर्घकालिक निवेश को आकर्षित करना।
ज्ञान साझाकरण: खुला नॉलेज प्लेटफॉर्म और गाइडलाइंस तैयार कर वैश्विक स्तर पर जानकारी और सहयोग को मजबूत करना।
लैंड डिग्रेडेशन न्यूट्रैलिटी: एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका में विकासशील देशों के बीच ‘साउथ-साउथ सहयोग’ के जरिए ज़मीन की गुणवत्ता को गिरने से रोकना और संतुलित करना।
COP17 का मुख्य थीम “ज़मीन को बहाल करना, उम्मीद जगाना” है। पारंपरिक चरवाहा ज्ञान को प्राथमिकता देते हुए और शुष्क इलाकों वाले देशों में नीतियां मजबूत करते हुए, मंगोलिया का यह कदम वैश्विक पर्यावरण संरक्षण के इतिहास में एक मिसाल बन सकता है।

