मेरठ इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (MIET), मेरठ में “सस्टेनेबल बायोटेक्नोलॉजी और पर्यावरण के लिए बायो-AI इनोवेशन (BAISBE-2026)” विषय पर 3-दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ किया गया।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क। मेरठ इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (MIET), मेरठ में आज “सस्टेनेबल बायोटेक्नोलॉजी और पर्यावरण के लिए बायो-AI इनोवेशन (BAISBE-2026)” पर 3-दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया गया। इसमें 350 से ज़्यादा रिसर्चर, शिक्षाविद, वैज्ञानिक, इंडस्ट्री एक्सपर्ट और छात्र शामिल हुए, ताकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बायोटेक्नोलॉजी के तेज़ी से उभरते मेल पर चर्चा की जा सके। सम्मेलन का उद्घाटन AKTU, लखनऊ के वाइस चांसलर प्रो. (डॉ.) जेपी पांडे ने ऑनलाइन किया। इस सम्मेलन का आयोजन मेरठ इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के बायोटेक्नोलॉजी विभाग ने किया है, जबकि ग्रीन पेटल्स ट्रस्ट इसका एकेडमिक पार्टनर है।
उद्घाटन सत्र की शुरुआत आयोजन संयोजक डॉ. अविनाश सिंह के स्वागत भाषण से हुई, जिसके बाद चेयरमैन डॉ. विष्णु शरण अग्रवाल, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के वैज्ञानिक E डॉ. अनूप सिंह, सीनियर प्रिंसिपल साइंटिस्ट डॉ. राजेश पांडे और ग्रीन पेटल्स ट्रस्ट के डायरेक्टर (ट्रेनिंग और इनोवेशन) श्री एसपी वर्मा जैसे गणमान्य व्यक्तियों का सम्मान किया गया। इसके बाद पारंपरिक दीप प्रज्वलन, सरस्वती वंदना और स्मारिका व एब्स्ट्रैक्ट बुक का विमोचन हुआ।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रो. जेपी पांडे ने कहा, “AI चुपचाप जीवन के हर क्षेत्र में आ गया है। यह सही समय है कि हम अपने युवाओं और रिसर्चर्स को रिसर्च में इसके नैतिक इस्तेमाल के बारे में प्रशिक्षित करें। सस्टेनेबल बायोटेक्नोलॉजी में AI की भूमिका दिन-ब-दिन बढ़ रही है। MIET ने इस 3-दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के लिए बहुत अच्छा विषय चुना है। मैं इस वैज्ञानिक प्रयास के लिए आयोजकों को बधाई देना चाहता हूँ।”
टेक्सास यूनिवर्सिटी रियो ग्रांडे वैली के कैंसर इम्यूनोलॉजी और माइक्रोबायोलॉजी डिवीजन के डायरेक्टर प्रो. (डॉ.) सुभाष सी. चौहान ने ऑनलाइन प्रतिभागियों को संबोधित किया और कैंसर व बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च में नवीनतम रुझानों पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने रिसर्चर्स को इस क्षेत्र में हो रही नवीनतम गतिविधियों से अपडेट रहने के लिए प्रेरित किया। आयोजन सचिव डॉ. गौरव मिश्रा ने सम्मेलन का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया। ऑडियंस को संबोधित करते हुए, ग्रीन पेटल्स ट्रस्ट के एकेडमिक पार्टनर श्री सत्य प्रकाश वर्मा ने कहा, “बायोटेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस, एनवायरनमेंटल साइंस और सस्टेनेबल डेवलपमेंट का मेल हमारे ग्रह की सुरक्षा करते हुए इंसानी जीवन को बेहतर बनाने के लिए अभूतपूर्व संभावनाएं खोल रहा है।
इनोवेशन का असली मतलब सिर्फ़ कुछ नया बनाना नहीं है, बल्कि अप्रत्याशित घटना होने पर समझदारी से प्रतिक्रिया देने की क्षमता विकसित करना है। वैज्ञानिक खोजें दुनिया को तभी बदलती हैं जब उन्हें साझा किया जाए, डॉक्यूमेंट किया जाए और ऐसे समाधानों में बदला जाए जो जीवन को बेहतर बनाएं। उम्मीद है कि यह कॉन्फ्रेंस एक ऐसा मंच बनेगी जहां इनोवेटिव विचार मिलकर की जाने वाली रिसर्च, सस्टेनेबल टेक्नोलॉजी, असरदार नीतियों और सार्थक साझेदारियों में बदलेंगे।”
पहले दिन के वैज्ञानिक सत्र बायो-AI और कंप्यूटेशनल बायोटेक्नोलॉजी, और सस्टेनेबल बायोटेक्नोलॉजी और पर्यावरण पर केंद्रित थे। आमंत्रित लेक्चर में सिंगल-सेल मल्टीओमिक्स, सस्टेनेबल बायोएनर्जी और वेस्ट मैनेजमेंट, सस्टेनेबल वेस्टवॉटर ट्रीटमेंट और रिसोर्स रिकवरी, पौधों पर आधारित इनोवेशन, बायोडायवर्सिटी और बेनिफिट-शेयरिंग, और AI-संचालित इंडस्ट्रियल बायोप्रोसेसिंग जैसे विषय शामिल थे।
यह कॉन्फ्रेंस भारत और विदेशों के 25 से ज़्यादा विश्वविद्यालयों और 15 इंजीनियरिंग कॉलेजों का प्रतिनिधित्व करने वाले 350 से ज़्यादा रजिस्टर्ड प्रतिभागियों के लिए हाइब्रिड मोड में आयोजित की गई है। रजिस्टर्ड प्रतिभागियों, यानी रिसर्चर्स और छात्रों द्वारा ओरल और पोस्टर प्रेजेंटेशन विशेषज्ञों के सामने अपना काम पेश करने का एक मौका है।
आयोजकों ने कहा कि कॉन्फ्रेंस हेल्थकेयर, इंडस्ट्रियल बायोप्रोसेसिंग, नैनोबायोटेक्नोलॉजी, प्लांट और एनिमल बायोटेक्नोलॉजी, ट्रांसलेशनल रिसर्च, बायोइकोनॉमी और बायोफार्मा इनोवेशन पर विशेष वैज्ञानिक सत्रों के साथ जारी रहेगी।
151 रिसर्च योगदानों वाली स्मारिका और एब्स्ट्रैक्ट्स की किताब सत्य प्रकाश वर्मा द्वारा संपादित है, जबकि सह-संपादक डॉ. चंद्रबाबू रेजीत, डॉ. गौरव मिश्रा और डॉ. आशिमा कथुरिया है । कार्यक्रम का संचालन डॉ. नितिका वत्स, डॉ. रिनी सहरावत और डॉ. जाह्नवी ने किया।
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