यूनाइटेड किंगडम के लोग कर रहे भीषण गर्मी का सामना
लगभग यही स्थिति यूरोप के कई अन्य देशों की भी है
एनवायरमेंट पल्स डेस्क
यूनाइटेड किंगडम (UK) में लगातार पड़ रही भीषण गर्मी ने ‘हरी-भरी और सुहावनी ज़मीन‘ को भूरा कर दिया है। यूनाइटेड किंगडम में गर्मी की स्थिति बहुत ही बुरी है। कुछ वर्षों पहले तक किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि यहां इतनी गर्मी पड़ेगी।
इस समय जब आधा इंग्लैंड और पूरा वेल्स सूखे की चपेट में है, जुलाई का महीना अब तक का सबसे सूखा महीना था। जलवायु संकट की वजह से बढ़ी भीषण गर्मी इस गर्मी में यूनाइटेड किंगडम और यूरोप में लगातार बनी हुई है।
पांच सालों में ये तीसरा ऐसा वाकया होगा जब इंग्लैंड में रहने वालों की चिंता गर्मी और बढ़ी है। चार बार रिकॉर्ड तोड़ने वाली गर्मी की लहरों के बाद जंगल में आग लगी है और किसानों, वन्यजीवों और संरक्षित आवासों में पानी की कमी हो गई है।
इतनी गर्मी के कारण वेल्स के मर्थिर टिडफिल में टैफ फवार घाटी में पानी का स्तर कम होने के कारण ज़मीन दिखने लगी है। इंग्लैंड के ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि लंबे समय से यहां औसत वर्षा का केवल 7% और दक्षिणी इंग्लैंड में केवल 1% वर्षा हुई। इससे पार्कों, संरक्षित भूमि और खेल के मैदानों में हरियाली को नुकसान पहुंचा है। रीडिंग में टेम्स नदी का जलस्तर अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है।
अगर ऐसा ही चलता रहा तो यहां पानी की किल्लत एक भयावह रूप ले सकती है। इंग्लैंड और वेल्स में लगभग 23 मिलियन लोग हौज़पाइप (पानी के पाइप) के इस्तेमाल पर लगी रोक के दायरे में हैं।
चौंकाने वाली बात यह है कि विलियम ब्लेक की “हरी-भरी और सुहावनी ज़मीन” के बड़े हिस्से अब भूरे और सूखे हो गए हैं। वेदर ऑफिस का अनुमान है कि जलवायु संकट के कारण 1990 की तुलना में 2070 तक यूनाइटेड किंगडम में गर्मियां बहुत ज्यादा बढ़ जाएंगी।
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की क्लाइमेट साइंटिस्ट डॉ. क्लो ब्रिमिकोम्बे के अनुसार गर्म होती धरती के असर से निपटने और उसे कम करने, दोनों की ही बहुत ज़रूरत है। जुलाई में इंग्लैंड और वेल्स में फायरफाइटर्स को 393 बार जंगल की आग बुझाने के लिए बुलाया गया। यह अब तक का सबसे व्यस्त महीना रहा और इससे क्रू और संसाधनों पर बहुत दबाव पड़ा।
सूखे और गर्म मौसम की वजह से डर्बीशायर में चैट्सवर्थ हाउस के साउथ लॉन में 17वीं सदी के बगीचे की सजावटी डिज़ाइन दिखाई देने लगी है।
पानी की कमी एक बड़ी चुनौती बन गई है लेकिन पौधों पर गर्मी का असर (हीट स्ट्रेस) ने इसे और मुश्किल बना दिया है। देश भर में सूखी फसलों और घास के मैदानों में खोई हुई पुरातात्विक जगहें फिर से मिली हैं, जिनमें नवपाषाण, कांस्य और लौह युग की संरचनाएं और प्रथम विश्व युद्ध के समय की अभ्यास खाइयां शामिल हैं। लंदन के पार्कों में-जो कि घनी आबादी वाले और हरे-भरे इलाके माने जाते हैं-लोगों ने सूखे हालात के बावजूद गर्मियों की धूप का आनंद लेने की कोशिश की है।
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