नोएडा-गाजियाबाद कॉरिडोर में कबाड़ और ई-कचरे के अनौपचारिक क्षेत्र को व्यवस्थित और औपचारिक रूप देने के लिए ‘पर्यावरण मित्र’ योजना और एक समर्पित ‘ग्रीन डैशबोर्ड’ की शुरुआत की है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य ई-कचरा संग्रहकर्ताओं को प्रशिक्षित करके और डिजिटल निगरानी के जरिए पर्यावरण सुरक्षा और सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देना है।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क। उत्तर प्रदेश सरकार ने कबाड़ और ई-कचरा क्षेत्र को व्यवस्थित एवं औपचारिक स्वरूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इसके तहत ‘पर्यावरण मित्र’ योजना और नोएडा-गाजियाबाद कॉरिडोर के लिए एक समर्पित ‘ग्रीन डैशबोर्ड’ शुरू किया गया है।
इस पहल का उद्देश्य अनौपचारिक रूप से काम कर रहे ई-कचरा संग्रहकर्ताओं और कबाड़ कारोबार से जुड़े श्रमिकों को चिन्हित कर उन्हें प्रशिक्षण और पंजीकरण के माध्यम से अधिक सुरक्षित, प्रमाणित और विनियमित व्यवस्था से जोड़ना है।
पर्यावरण मित्र योजना के तहत नोएडा-गाजियाबाद के घने औद्योगिक क्षेत्र में काम करने वाले अनौपचारिक कबाड़ संग्रहकर्ताओं और ई-कचरा अलग करने वाले श्रमिकों की पहचान की जा रही है। इन लोगों को पंजीकरण, कौशल उन्नयन और अधिकृत रिसाइक्लरों तथा संग्रह केंद्रों से जोड़ने में सहायता दी जा रही है।
इसका उद्देश्य ऐसे अनियमित स्तर पर चलने वाले छोटे प्रतिष्ठानों और गतिविधियों को सुरक्षित एवं निगरानी योग्य प्रणाली में लाना है, जहां कई बार ई-कचरे के निपटान के दौरान स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए जोखिम पैदा करने वाली प्रक्रियाएं अपनाई जाती हैं। योजना के तहत श्रमिकों को ई-कचरे की सुरक्षित हैंडलिंग, विभिन्न प्रकार के कचरे के पृथक्करण और संबंधित कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी जा रही है।
प्रशिक्षण के जरिए उन्हें यह समझाने पर जोर है कि ई-कचरे को किस तरह एकत्र, अलग और अधिकृत रिसाइक्लिंग चैनल तक पहुंचाया जाए। इससे अनौपचारिक क्षेत्र से जुड़े श्रमिकों को बेहतर और प्रमाणित रोजगार के अवसर मिलने के साथ ई-कचरे के वैज्ञानिक तरीके से निपटान को भी बढ़ावा मिल सकता है।
पर्यावरण मित्र योजना के साथ ग्रीन डैशबोर्ड को डिजिटल निगरानी व्यवस्था के रूप में विकसित किया गया है। यह नोएडा-गाजियाबाद कॉरिडोर में ई-कचरे के संग्रह की मात्रा, औपचारिक चैनल से जुड़ी इकाइयों, रिसाइक्लिंग दर और अनुपालन से संबंधित आंकड़ों की निगरानी में मदद करेगा। अधिकारियों के लिए यह व्यवस्था अनौपचारिक ऑपरेटरों के औपचारिक प्रणाली में शामिल होने की प्रगति पर नजर रखने और उन क्षेत्रों की पहचान करने में उपयोगी होगी जहां अभी कवरेज या अनुपालन की कमी है।
डैशबोर्ड के माध्यम से यह भी सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा कि एकत्र किया गया ई-कचरा पंजीकृत डिस्मेंटलर और अधिकृत रिसाइक्लर तक पहुंचे। इससे ई-कचरे के प्रवाह को अधिक पारदर्शी और ट्रेस करने योग्य बनाने में मदद मिल सकती है। उत्पादकों के लिए भी यह व्यवस्था उपयोगी हो सकती है, खासकर उन कंपनियों के लिए जिन्हें विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) के तहत अपने पर्यावरणीय दायित्व पूरे करने होते हैं।
नोएडा-गाजियाबाद क्षेत्र इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, डेटा सेंटर और विभिन्न औद्योगिक गतिविधियों का बड़ा केंद्र है। इन गतिविधियों के विस्तार के साथ क्षेत्र में ई-कचरे की मात्रा भी लगातार बढ़ रही है। लंबे समय से इस कचरे के बड़े हिस्से को अनौपचारिक नेटवर्क के जरिए एकत्र और संसाधित किया जाता रहा है। सरकार अब इन नेटवर्क को औपचारिक प्रणाली से जोड़कर रिसाइक्लिंग प्रक्रिया को अधिक वैज्ञानिक बनाने और अनुचित निपटान से होने वाले प्रदूषण को कम करने की कोशिश कर रही है।
ई-कचरे में मौजूद उपयोगी धातुओं और अन्य सामग्रियों की बेहतर रिकवरी भी इस पहल का एक प्रमुख उद्देश्य है। वैज्ञानिक रिसाइक्लिंग के जरिए मूल्यवान संसाधनों को दोबारा उत्पादन प्रक्रिया में लाया जा सकता है। इससे प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव कम करने के साथ सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा मिल सकता है। सरकार का मानना है कि अनौपचारिक क्षेत्र को पूरी तरह अलग करने के बजाय वहां काम करने वाले श्रमिकों को प्रशिक्षण, पंजीकरण और अधिकृत रिसाइक्लिंग नेटवर्क से जोड़ना अधिक प्रभावी रास्ता हो सकता है।
इससे एक ओर पर्यावरणीय नियमों के अनुपालन को मजबूत किया जा सकेगा, वहीं दूसरी ओर उन हजारों लोगों की आजीविका को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाया जा सकेगा जो लंबे समय से कबाड़ और ई-कचरा संग्रह के काम से जुड़े हैं। पर्यावरण मित्र योजना के प्रशिक्षण मॉड्यूल में सुरक्षित तरीके से ई-कचरा संभालने, कचरे के स्रोत के आधार पर पृथक्करण, स्वास्थ्य एवं सुरक्षा सावधानियों और कानूनी आवश्यकताओं के प्रति जागरूकता पर जोर दिया जा रहा है। वहीं ग्रीन डैशबोर्ड इन गतिविधियों से जुड़े आंकड़ों को एक जगह उपलब्ध कराकर अधिकारियों को डेटा आधारित निगरानी और प्रगति का आकलन करने में मदद करेगा।
यह पहल उत्तर प्रदेश में अपशिष्ट प्रबंधन के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और अनौपचारिक गतिविधियों को राष्ट्रीय पर्यावरणीय नियमों के अनुरूप लाने की व्यापक कोशिशों का हिस्सा है। नोएडा और गाजियाबाद के स्थानीय प्रशासन, अधिकृत रिसाइक्लर, संग्रह केंद्रों तथा श्रमिक संगठनों की इस व्यवस्था को जमीन पर लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका रहने की उम्मीद है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में उत्तर प्रदेश के हिस्से में सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिहाज से भी इस पहल को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
यदि नोएडा-गाजियाबाद कॉरिडोर में औपचारिकरण का यह मॉडल प्रभावी साबित होता है, तो भविष्य में अधिक मात्रा में ई-कचरा पैदा करने वाले राज्य के अन्य जिलों में भी इसी तरह की व्यवस्थाओं का विस्तार किया जा सकता है। पर्यावरण मित्र योजना और ग्रीन डैशबोर्ड के जरिए उत्तर प्रदेश अब ई-कचरा प्रबंधन को केवल कचरे के निपटान के मुद्दे के रूप में देखने के बजाय इसे पर्यावरण संरक्षण, श्रमिक सुरक्षा, संसाधन पुनर्प्राप्ति और सर्कुलर इकोनॉमी से जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
आने वाले समय में इस व्यवस्था की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कितने अनौपचारिक श्रमिक औपचारिक नेटवर्क में शामिल होते हैं, कितनी मात्रा में ई-कचरा अधिकृत चैनलों तक पहुंचता है और डिजिटल निगरानी से अनुपालन में कितना सुधार आता है।
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