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ऊर्जाफ्यूचर ग्रीन

वैश्विक बिजली व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव, 2025 में पहली बार कोयले से आगे निकली नवीकरणीय ऊर्जा

Environment Pulse
Last updated: August 28, 2026 9:04 pm
Environment Pulse
Published: August 28, 2026
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ऊर्जा थिंक टैंक ‘एम्बर’ की Global Electricity Review 2026 के अनुसार, वर्ष 2025 में आधुनिक इतिहास में पहली बार नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से उत्पादित बिजली की मात्रा (34%) ने कोयले (33%) को पीछे छोड़ दिया है। 1919 के बाद यह पहला मौका है जब स्वच्छ ऊर्जा ने वैश्विक बिजली उत्पादन में कोयले को पीछे छोड़ा है। 2025 में वैश्विक बिजली की मांग 2.8 प्रतिशत बढ़ी, जिसे सौर और पवन ऊर्जा में हुई रिकॉर्ड वृद्धि (विशेषकर सौर ऊर्जा द्वारा मांग का तीन-चौथाई हिस्सा पूरा करना) ने पूरी तरह संभाल लिया।

एनवायरमेंट पल्स डेस्क। वैश्विक ऊर्जा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक बदलाव दर्ज हुआ है। वर्ष 2025 में पहली बार आधुनिक दौर में दुनिया भर में नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से पैदा हुई बिजली की मात्रा कोयले से अधिक रही।

ऊर्जा थिंक टैंक एम्बर की Global Electricity Review 2026 के शुरुआती पूर्ण-वर्ष आकलन के अनुसार, सौर, पवन, जलविद्युत और अन्य स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों ने वैश्विक बिजली उत्पादन में करीब 34 प्रतिशत योगदान दिया, जबकि कोयले की हिस्सेदारी घटकर 33 प्रतिशत रह गई।

यह पहली बार है जब 1919 के बाद नवीकरणीय ऊर्जा ने वैश्विक बिजली उत्पादन में कोयले को पीछे छोड़ा है। 1919 में दुनिया की बिजली की मांग आज की तुलना में बेहद कम थी।

वहीं, 2025 में वैश्विक बिजली उत्पादन में कोयले की हिस्सेदारी पहली बार एक-तिहाई से नीचे चली गई। कोयले से बिजली उत्पादन में 63 टेरावाट-घंटे (TWh) यानी करीब 0.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। रिपोर्ट के मुताबिक, स्वच्छ ऊर्जा में हुई वृद्धि ने वैश्विक बिजली मांग में हुई पूरी बढ़ोतरी को पूरा कर दिया। 2025 में बिजली की मांग 849 TWh, यानी करीब 2.8 प्रतिशत बढ़ी, जबकि कम-कार्बन बिजली उत्पादन में 887 TWh की वृद्धि हुई।

इसके परिणामस्वरूप जीवाश्म ईंधनों से बिजली उत्पादन में मामूली 0.2 प्रतिशत की गिरावट आई। यह 2020 में कोविड-19 महामारी के बाद पहली ऐसी गिरावट है और इस सदी में केवल पांचवीं बार ऐसा हुआ है जब वैश्विक जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली उत्पादन नहीं बढ़ा।

सौर ऊर्जा इस बदलाव की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी। अकेले सौर ऊर्जा ने वैश्विक बिजली मांग में हुई बढ़ोतरी का करीब तीन-चौथाई हिस्सा पूरा किया। सौर और पवन ऊर्जा को मिलाकर देखें तो इन दोनों स्रोतों ने लगभग पूरी अतिरिक्त बिजली मांग को पूरा कर दिया। इस बदलाव में चीन और भारत की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही।

दोनों देश लंबे समय तक वैश्विक स्तर पर जीवाश्म ईंधन से बिजली उत्पादन में बढ़ोतरी के सबसे बड़े योगदानकर्ताओं में रहे थे। हालांकि 2025 में दोनों देशों में स्वच्छ ऊर्जा क्षमता में रिकॉर्ड वृद्धि बिजली की मांग में बढ़ोतरी से आगे निकल गई, जिसके चलते जीवाश्म ईंधन से बिजली उत्पादन घट गया।

चीन में जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली उत्पादन 56 TWh घटा, जबकि भारत में इसमें 52 TWh की कमी आई। सौर, पवन और जलविद्युत उत्पादन में मजबूत वृद्धि ने इस बदलाव को संभव बनाया। यह इस सदी में पहली बार हुआ जब चीन और भारत दोनों में एक ही वर्ष जीवाश्म ईंधन से बिजली उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई।

इसने वैश्विक बिजली प्रणाली के संतुलन को बदलने में अहम भूमिका निभाई। चीन नई सौर और पवन ऊर्जा क्षमता जोड़ने में दुनिया में सबसे आगे बना रहा और वैश्विक सौर बिजली उत्पादन में हुई अतिरिक्त वृद्धि के आधे से अधिक हिस्से में उसका योगदान रहा। भारत ने भी सौर और पवन बिजली उत्पादन में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की।

वैश्विक स्तर पर 2025 में सौर बिजली उत्पादन 636 TWh, यानी करीब 30 प्रतिशत बढ़ा, जो अब तक की सबसे बड़ी वार्षिक वृद्धि है। एम्बर के विश्लेषकों ने इस बदलाव को ‘स्वच्छ विकास के युग’ की शुरुआत बताया है। संगठन के प्रबंध निदेशक आदित्य लोल्ला के मुताबिक, स्वच्छ ऊर्जा अब इतनी तेजी से विस्तार कर रही है कि वह बढ़ती वैश्विक बिजली मांग को पूरा करने में सक्षम हो रही है। इसके कारण जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली उत्पादन स्थिर होने लगा है और भविष्य में इसमें गिरावट आने की संभावना बढ़ रही है।

दुनिया में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। उद्योगों के विस्तार, परिवहन और अन्य क्षेत्रों का विद्युतीकरण, बढ़ती कूलिंग जरूरतें और डेटा सेंटर इसके प्रमुख कारण हैं। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के अनुमानों के अनुसार, 2026 और उसके बाद नवीकरणीय ऊर्जा की बढ़त कोयले पर और मजबूत हो सकती है। 2027 तक वैश्विक बिजली उत्पादन में नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी करीब 37 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। हालांकि एशिया में कोयला अब भी बिजली उत्पादन का सबसे बड़ा एकल स्रोत है और वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में इसका बड़ा योगदान बना हुआ है।

इसके बावजूद 2025 के आंकड़े संकेत देते हैं कि दुनिया की बिजली व्यवस्था में संरचनात्मक बदलाव तेज हो रहा है और स्वच्छ ऊर्जा अब वैश्विक बिजली मांग की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने में निर्णायक भूमिका निभाने लगी है।

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