By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
Environment PulseEnvironment PulseEnvironment Pulse
Notification Show More
Font ResizerAa
  • जल
  • जमीन
  • जंगल
  • जैव-विविधता
  • हवा
  • खनिज
  • ऊर्जा
  • ग्रीन जॉब
  • स्टोरी
  • इम्पैक्ट फीचर
  • कचरा-प्रबंधन
  • सस्टेनिबिलिटी
  • विचार
  • वीडियो
Reading: जलवायु परिवर्तन से खेती को बचाने की नई उम्मीद, वैज्ञानिकों ने मिट्टी के सूक्ष्मजीवों को किया ‘प्रशिक्षित’
Share
Font ResizerAa
Environment PulseEnvironment Pulse
  • जल
  • जमीन
  • जंगल
  • जैव-विविधता
  • हवा
  • खनिज
  • ऊर्जा
  • ग्रीन जॉब
  • स्टोरी
  • इम्पैक्ट फीचर
  • कचरा-प्रबंधन
  • सस्टेनिबिलिटी
  • विचार
  • वीडियो
Search
  • जल
  • जमीन
  • जंगल
  • जैव-विविधता
  • हवा
  • खनिज
  • ऊर्जा
  • ग्रीन जॉब
  • स्टोरी
  • इम्पैक्ट फीचर
  • कचरा-प्रबंधन
  • सस्टेनिबिलिटी
  • विचार
  • वीडियो
Have an existing account? Sign In
Follow US
Environment Pulse > सस्टेनिबिलिटी > जलवायु परिवर्तन से खेती को बचाने की नई उम्मीद, वैज्ञानिकों ने मिट्टी के सूक्ष्मजीवों को किया ‘प्रशिक्षित’
सस्टेनिबिलिटीस्टोरी

जलवायु परिवर्तन से खेती को बचाने की नई उम्मीद, वैज्ञानिकों ने मिट्टी के सूक्ष्मजीवों को किया ‘प्रशिक्षित’

Environment Pulse
Last updated: July 29, 2026 5:23 pm
Environment Pulse
Published: July 28, 2026
Share
SHARE

ब्रिटेन के लिंकन विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने विकसित की ऐसी तकनीक

एनवायरमेंट पल्स टीम

जलवायु परिवर्तन से खेती को बचाने की एक नई आशा जगी है। ब्रिटेन के लिंकन विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है जिससे मिट्टी के सूक्ष्मजीवों को प्रशिक्षित किया जा सकता है ताकि वे अधिक लवणीय परिस्थितियों में भी अच्छी तरह से काम कर सकें।

जलवायु परिवर्तन के कारण मिट्टी की लवणता बढ़ रही है, जो वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती है। इस समस्या से निपटने के लिए, वैज्ञानिकों ने एक तरीका खोजा है जिससे मिट्टी के सूक्ष्मजीवों को हल्के खारे पानी से सिंचित करके प्रशिक्षित किया जा सकता है। इससे वे सूक्ष्मजीव अधिक लवणीय परिस्थितियों में भी सक्रिय रह सकते हैं और फसलों की वृद्धि में मदद कर सकते हैं।

इस अध्ययन का नेतृत्व प्रोफेसर मैथ्यू गोडार्ड ने किया और यह प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका एप्लाइड एंड एनवायरनमेंटल माइक्रोबायोलॉजी में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन से पता चलता है कि समुद्र के बढ़ते जलस्तर, वर्षा के बदलते पैटर्न और बढ़ते तापमान के कारण कृषि भूमि की लवणता बढ़ रही है। लगभग 30 प्रतिशत कृषि भूमि पहले से ही लवणता से प्रभावित है और 2050 तक यह आंकड़ा 50 प्रतिशत तक पहुंच सकता है।

वैज्ञानिकों ने पाया कि मिट्टी को नियंत्रित मात्रा में हल्के खारे पानी से सिंचित करने पर सूक्ष्मजीव धीरे-धीरे नई परिस्थितियों के अनुरूप ढल जाते हैं। इससे फसलों की वृद्धि और उत्पादन पर नकारात्मक प्रभाव कम होता है। यह तकनीक किसानों को कम लागत वाला और व्यावहारिक समाधान प्रदान कर सकती है जो भविष्य की जलवायु परिस्थितियों के लिए खेतों को तैयार करने में मदद कर सकती है।

प्रोफेसर मैथ्यू गोडार्ड के अनुसार, यह पहली बार प्रदर्शित किया गया है कि प्राकृतिक कृषि सूक्ष्मजीव समुदायों को इस तरह विकसित किया जा सकता है कि वे जलवायु परिवर्तन की परिस्थितियों में भी खाद्य उत्पादन को सहारा दे सकते हैं। यह तकनीक कृषि में ताजे पानी की खपत को भी कम कर सकती है और इसे फसल सुधार तथा जल प्रबंधन जैसी अन्य रणनीतियों के साथ जोड़कर टिकाऊ कृषि प्रणाली विकसित की जा सकती है।

अध्ययन में यह भी पाया गया कि प्रशिक्षित सूक्ष्मजीवों की संरचना और कार्यप्रणाली में सकारात्मक बदलाव आए, जिससे मिट्टी में पोषक तत्वों का चक्र बेहतर हुआ और उसकी लवणता सहन करने की क्षमता बढ़ी। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह तकनीक भविष्य में जलवायु परिवर्तन के अनुकूल कृषि विकसित करने, किसानों की आय सुरक्षित रखने और वैश्विक खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

 

You Might Also Like

8 Mistakes That Will RUIN Your Weekend Trips Plan
भारत और नेपाल के बीच पर्यावरण संरक्षण को नई मजबूती : वन, वन्यजीव और जलवायु परिवर्तन पर हुआ अहम समझौता
Funds of ₹1 Crore Approved to Promote Eco-Tourism in U.P. 
क्या आप में पर्यावरण सम्बन्धी स्टार्टअप चलाने का जूनून है ?
एआई से भारी पर्यावरणीय नुकसान : जल, जमीन, जलवायु सभी को खतरा
TAGGED:AgriculturecropFood securityResearch in agricultureSoilSoil health
Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp LinkedIn Email Copy Link Print
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
LinkedInFollow
Popular News
जंगलजैव-विविधतासस्टेनिबिलिटी

Funds of ₹1 Crore Approved to Promote Eco-Tourism in U.P. 

Environment Pulse
Environment Pulse
August 4, 2026
  ग्रीन एनर्जी, नेट जीरो और उसे प्राप्त करने के उपायों पर विमर्श
गंगा-गोमती दोआब क्षेत्र के भूजल की होगी गहरी पड़ताल
आस्ट्रेलिया के साथ परमाणु समझौते से बदल जाएगा देश का ऊर्जा परिदृश्य
8 Reasons Your Best Friend Makes The Best Shopping Partner

Categories

  • जल
  • जमीन
  • जंगल
  • जैव-विविधता
  • हवा
  • खनिज
  • ऊर्जा
  • ग्रीन जॉब
  • स्टोरी
  • इम्पैक्ट फीचर
  • वीडियो

About US

Environmentpulse.com is a bilingual (Hindi-English) news platform that presents high-quality news, views, and videos related to the environment.
Quick Link
  • ग्रीन जॉब
  • ऊर्जा
  • खनिज
  • जैव-विविधता
  • जंगल
Top Categories
  • My Bookmark
  • Contact
  • Privacy Policy
Environment PulseEnvironment Pulse
© Foxiz News Network. Ruby Design Company. All Rights Reserved.
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?