By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
Environment PulseEnvironment PulseEnvironment Pulse
Notification Show More
Font ResizerAa
  • ईको सिस्टम
    • जल
    • जंगल
    • जमीन
    • हवा
    • खनिज
    • जैव-विविधता
    • गतिविधियां
  • कचरा-प्रबंधन
    • ग्रीन बिजनेस
    • रीसाइकलिंग
    • इन्नोवेशन
    • इनिशिएटिव्स
  • फ्यूचर ग्रीन
    • ऊर्जा
    • सस्टेनिबिलिटी
    • इलेक्ट्रिक व्हीकल
    • कृषि एवं खाद्य
  • ओपिनियन
    • विचार
    • इम्पैक्ट फीचर
    • स्टोरी
  • मल्टीमीडिया
    • वीडियो
Reading: अफगानिस्तान में गहराता जल संकट, पानी के लिए मीलों चलने को मजबूर
Share
Font ResizerAa
Environment PulseEnvironment Pulse
  • ईको सिस्टम
  • कचरा-प्रबंधन
  • फ्यूचर ग्रीन
  • ओपिनियन
  • मल्टीमीडिया
Search
  • ईको सिस्टम
    • जल
    • जंगल
    • जमीन
    • हवा
    • खनिज
    • जैव-विविधता
    • गतिविधियां
  • कचरा-प्रबंधन
    • ग्रीन बिजनेस
    • रीसाइकलिंग
    • इन्नोवेशन
    • इनिशिएटिव्स
  • फ्यूचर ग्रीन
    • ऊर्जा
    • सस्टेनिबिलिटी
    • इलेक्ट्रिक व्हीकल
    • कृषि एवं खाद्य
  • ओपिनियन
    • विचार
    • इम्पैक्ट फीचर
    • स्टोरी
  • मल्टीमीडिया
    • वीडियो
Have an existing account? Sign In
Follow US
Environment Pulse > ईको सिस्टम > जल > अफगानिस्तान में गहराता जल संकट, पानी के लिए मीलों चलने को मजबूर
AI Image
जल

अफगानिस्तान में गहराता जल संकट, पानी के लिए मीलों चलने को मजबूर

Environment Pulse
Last updated: October 14, 2026 4:13 pm
Environment Pulse
Published: October 14, 2026
Share
AI Image
SHARE

अफगानिस्तान के 34 में से 19 प्रांतों में गंभीर सूखा और जल संकट के कारण हालात चिंताजनक हो गए हैं, जहाँ पानी के लिए महिलाओं को मीलों पैदल चलना पड़ रहा है। भूजल स्तर में भारी गिरावट और कृषि चौपट होने से लगभग 1.74 करोड़ लोगों को तत्काल खाद्य सहायता की आवश्यकता है। 

एनवायरमेंट पल्स डेस्क : अफगानिस्तान में लंबे समय से जारी सूखे और पानी की कमी ने गंभीर मानवीय संकट का रूप ले लिया है। देश के बड़े हिस्से में कुएं सूख रहे हैं, कृषि उत्पादन घट रहा है और ग्रामीण परिवारों के सामने पीने का पानी जुटाना चुनौती बन गया है।

इस संकट का सबसे अधिक बोझ महिलाओं और लड़कियों पर पड़ रहा है, जिन्हें अपने परिवारों के लिए पानी लाने के लिए कई किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ रहा है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, अफगानिस्तान के आधे से अधिक हिस्से में गंभीर सूखे और जल संकट की स्थिति है।

देश के 34 में से 19 प्रांतों में हालात चिंताजनक बताए गए हैं। उत्तरी प्रांत फरयाब में करीब 90 प्रतिशत क्षेत्र के प्रभावित होने का दावा किया गया है। राजधानी काबुल में भी भूजल का अत्यधिक दोहन जारी रहने पर वर्ष 2030 तक जल संसाधनों के बड़े हिस्से के समाप्त होने का खतरा जताया गया है। ग्रामीण इलाकों में कभी लगभग 20 मीटर की गहराई पर उपलब्ध पानी के लिए अब कई स्थानों पर 40 मीटर या उससे अधिक गहराई तक पंपिंग करनी पड़ रही है।

कुछ कृषि क्षेत्रों में जलस्तर 120 मीटर तक नीचे पहुंचने की बात कही गई है। प्राकृतिक झरने और पारंपरिक जलस्रोत भी सूख रहे हैं। पानी की कमी का असर खेती और पशुपालन पर साफ दिखाई दे रहा है। फलों के पेड़ सूख रहे हैं, फसलों की पैदावार घट रही है और सबसे अधिक प्रभावित इलाकों में पशुओं की मौतें हो रही हैं।

संयुक्त राष्ट्र के विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) के अनुसार, कृषि संकट और खाद्य असुरक्षा के बीच लगभग 1.74 करोड़ लोगों को तत्काल खाद्य सहायता की जरूरत है। अफगानिस्तान के कई समुदायों में घर के लिए पानी जुटाने की जिम्मेदारी मुख्य रूप से महिलाओं और लड़कियों की होती है। आसपास के कुओं और जलस्रोतों के सूखने के बाद उन्हें दूर-दराज के स्थानों से पानी लाना पड़ रहा है। भारी बर्तन उठाकर लंबी दूरी तय करने में उनके रोजाना कई घंटे खर्च हो रहे हैं। लोगर प्रांत की 35 वर्षीय महिला सिमिन गुल (सुरक्षा कारणों से बदला हुआ नाम) ने बताया कि कुआं सूखने के बाद उनकी सबसे बड़ी चिंता बच्चों के लिए पीने का पानी जुटाना है। उन्होंने कहा कि कपड़े तभी धोए जाते हैं, जब पीने के पानी से कुछ बच जाए।

कई बार कई दिनों तक कपड़े नहीं धुल पाते और बर्तन भी पानी बचाने के लिए एक साथ धोने पड़ते हैं। पानी की कमी का प्रभाव गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं तथा मासिक धर्म के दौरान महिलाओं की स्वच्छता पर भी पड़ रहा है। कुछ परिवारों में बच्चों को पानी लाने में मदद करने के लिए स्कूल से दूर रहना पड़ता है।

दूषित पानी और स्वच्छता सुविधाओं की कमी से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ने की आशंका भी है। जल संकट ने महिलाओं की सीमित आर्थिक गतिविधियों को भी प्रभावित किया है। जौजजान प्रांत में खीरे की ग्रीनहाउस खेती करने वाली महिलाओं के मुताबिक, अत्यधिक गर्मी और पानी की कमी के कारण इस साल फसल में भारी गिरावट आई है।

इससे उन परिवारों की आमदनी प्रभावित हुई है, जिनकी आजीविका इन छोटे कृषि उद्यमों पर निर्भर थी। लगातार सूखे, कमजोर जल प्रबंधन, भूजल के अत्यधिक दोहन, अपर्याप्त सिंचाई सुविधाओं और सीमित अंतरराष्ट्रीय सहायता ने ग्रामीण समुदायों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। जिन क्षेत्रों में खेती करना संभव नहीं रह गया है, वहां कुछ परिवार गांव छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं। नूरिस्तान जैसे दूरस्थ प्रांतों में स्थानीय स्तर पर जलापूर्ति परियोजनाएं शुरू किए जाने की खबरें हैं, लेकिन संकट के व्यापक पैमाने को देखते हुए ऐसे प्रयास पर्याप्त नहीं माने जा रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, जल संकट से निपटने के लिए भूजल प्रबंधन, वर्षा जल संचयन, सिंचाई की दक्षता बढ़ाने और सूखा सहन करने वाली कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करने की जरूरत है। सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करना और महिलाओं पर पानी जुटाने का असमान बोझ कम करना भी जरूरी है। यदि प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो अफगानिस्तान में जल संकट आने वाले महीनों और वर्षों में खाद्य सुरक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य और ग्रामीण आजीविका के लिए और गंभीर चुनौती बन सकता है।

Also Read: कैलिफोर्निया के तट की ओर बढ़ रही विशाल ‘केल्विन वेव’, समुद्र का जलस्तर आधा फुट तक बढ़ने की आशंका

You Might Also Like

भारत और सेशेल्स ने मत्स्य पालन, जलीय कृषि और ब्लू इकोनॉमी में सहयोग मजबूत करने पर दिया जोर
11 से 13 अगस्त तक ग्रेटर नोएडा में होगा इंडिया बायोएनर्जी एंड टेक एक्सपो-2026
गंगा का जलस्तर बढ़ा, वाराणसी में नावों पर लगी रोक; घाटों की रौनक पर बाढ़ का साया
जलवायु मुकदमों के बढ़ते दबाव के बीच अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं बड़ी तेल कंपनियां
लखनऊ और बाढ़ का सौ साल पुराना रिश्ता: क्यों हर बार डूबता है नवाबों का शहर
TAGGED:Afghanistan Water CrisisClimate ImpactFood InsecurityGroundwater DepletionHumanitarian CrisisSevere Drought
Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp LinkedIn Email Copy Link Print
1 Comment
  • Pingback: कैलिफोर्निया के समुद्री जंगल बचाएगा 24 भुजाओं वाला ‘सनफ्लावर सी स्टार’ – Environment Pulse

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
LinkedInFollow
Popular News
AI Image
स्टोरी

पर्यावरण सिर्फ जलवायु परिवर्तन नहीं है, उससे कहीं ज्यादा है

Environment Pulse
Environment Pulse
October 7, 2026
Subsidy scheme accelerates EV adoption in state, Lucknow is no. 1 in applications
ईवी और सौर ऊर्जा से आगे बढ़ा हरित नवाचार, छोटे शहरों में कचरे से तैयार हो रहे मूल्यवान उत्पाद
बचपन में एयर पॉल्यूशन के संपर्क से बढ़ सकता है मेटाबोलिक सिंड्रोम का खतरा
Supreme Court Seeks Middle Ground on Firecrackers: No Total Ban, No Free-for-All

Categories

  • जल
  • जमीन
  • जंगल
  • जैव-विविधता
  • हवा
  • खनिज
  • ऊर्जा
  • ग्रीन जॉब
  • स्टोरी
  • इम्पैक्ट फीचर
  • वीडियो

About US

Environmentpulse.com is a bilingual (Hindi-English) news platform that presents high-quality news, views, and videos related to the environment.
Quick Link
  • ऊर्जा
  • खनिज
  • जैव-विविधता
  • जंगल
Top Categories
  • My Bookmark
  • Contact
  • Privacy Policy
Environment PulseEnvironment Pulse
© Pratham Publisher and Informatics Private Limited. All Rights Reserved. | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?