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Environment Pulse > ओपिनियन > इम्पैक्ट फीचर > बचपन में एयर पॉल्यूशन के संपर्क से बढ़ सकता है मेटाबोलिक सिंड्रोम का खतरा
(फोटो सौजन्य-एआई)
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बचपन में एयर पॉल्यूशन के संपर्क से बढ़ सकता है मेटाबोलिक सिंड्रोम का खतरा

Environment Pulse
Last updated: August 10, 2026 9:20 pm
Environment Pulse
Published: August 10, 2026
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(फोटो सौजन्य-एआई)
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मेटाबोलिक सिंड्रोम स्वास्थ्य समस्याओं का एक समूह है

Contents
बच्चों पर क्यों पड़ता है ज्यादा असर?स्टडी की कार्यप्रणालीस्कूल में पॉल्यूशन का असर घर से ज्यादा गहराबायोलॉजिकल कारण और विशेषज्ञों की चेतावनी

जो टाइप 2 डायबिटीज और हृदय रोगों का प्रमुख कारण बनती हैं

एनवायरमेंट पल्स डेस्क

एक नई वैश्विक स्टडी में यह बात सामने आई है कि जो बच्चे घर और स्कूल में ज्यादा एयर पॉल्यूशन (वायु प्रदूषण) के संपर्क में रहते हैं, उनमें आगे चलकर मेटाबोलिक सिंड्रोम (Metabolic Syndrome) होने का खतरा अधिक हो सकता है। मेटाबोलिक सिंड्रोम स्वास्थ्य समस्याओं का एक ऐसा समूह है, जिसमें पेट का मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर, असामान्य ब्लड शुगर और अनहेल्दी कोलेस्ट्रॉल लेवल शामिल हैं। ये स्थितियां आगे चलकर व्यक्ति में टाइप 2 डायबिटीज और हृदय रोगों का प्रमुख कारण बनती हैं।

यह जनसंख्या-आधारित रिसर्च ‘बार्सिलोना इंस्टीट्यूट फॉर ग्लोबल हेल्थ’ (ISGlobal) की अगुवाई में की गई है, जिसे “ला काइक्सा” (la Caixa) फाउंडेशन का सहयोग प्राप्त है। यह अध्ययन प्रसिद्ध ‘एनवायर्नमेंटल रिसर्च’ जर्नल में प्रकाशित हुआ है।

बच्चों पर क्यों पड़ता है ज्यादा असर?

रिसर्चर्स का कहना है कि हालांकि सांस की सेहत पर वायु प्रदूषण के प्रभावों के बारे में काफी डेटा उपलब्ध है, लेकिन दिल और मेटाबोलिक हेल्थ पर इसके असर पर बहुत कम ध्यान दिया गया है।

ज्यादा संवेदनशीलता: बच्चे वयस्कों की तुलना में पॉल्यूशन के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं क्योंकि उनके अंग और इम्यून सिस्टम अभी विकसित हो रहे होते हैं।

अधिक सांस लेना: वे वयस्कों की तुलना में अपने शरीर के आकार के अनुपात में ज्यादा हवा सांस के जरिए अंदर खींचते हैं और आमतौर पर बाहर ज्यादा समय बिताते हैं।

स्टडी की कार्यप्रणाली

रिसर्च टीम ने फ्रांस, ग्रीस, लिथुआनिया, नॉर्वे, स्पेन और यूनाइटेड किंगडम के 6 से 11 साल की उम्र के 1,147 बच्चों के डेटा की जांच की। इन बच्चों को 2013 से 2016 के बीच HELIX प्रोजेक्ट के तहत ट्रैक किया गया था।

ISGlobal की रिसर्चर और मुख्य लेखिका ऐनी वैन रूइजेन कोरविंग ने बताया कि टीम ने दो मुख्य प्रदूषकों—PM2.5 और NO2—के संपर्क का अनुमान लगाया। इसके लिए प्रमाणित पॉल्यूशन-मॉडलिंग टूल्स का उपयोग कर हर बच्चे के स्वास्थ्य परीक्षण से एक साल पहले की सालाना पॉल्यूशन मात्रा का हिसाब निकाला गया। खतरे को मापने के लिए कमर के आकार, ब्लड प्रेशर, ब्लड लिपिड और इंसुलिन लेवल पर आधारित अंतरराष्ट्रीय स्कोरिंग सिस्टम का प्रयोग किया गया।

स्कूल में पॉल्यूशन का असर घर से ज्यादा गहरा

अध्ययन में एक दिलचस्प तथ्य यह सामने आया कि स्कूल के माहौल में पॉल्यूशन के संपर्क में रहने का संबंध मेटाबोलिक सिंड्रोम से घर की तुलना में ज्यादा गहरा था—भले ही दोनों जगहों पर प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के दिशानिर्देशों से ज्यादा था।

शारीरिक गतिविधि वजह: वैज्ञानिकों के अनुसार, बच्चे स्कूल में ज्यादा शारीरिक रूप से सक्रिय रहते हैं, जिससे उनकी सांस लेने की गति तेज होती है और प्रदूषकों का असर बढ़ जाता है।

दीर्घकालिक प्रभाव: स्वास्थ्य जांच से ठीक पहले के दिनों या हफ़्तों के संपर्क का कोई मापने योग्य असर नहीं देखा गया। इससे सिद्ध होता है कि मेटाबोलिक बदलाव समय के साथ धीरे-धीरे आते हैं, न कि थोड़े समय के संपर्क से। School आने-जाने के दौरान के संपर्क का भी कोई खास असर नहीं पाया गया।

बायोलॉजिकल कारण और विशेषज्ञों की चेतावनी

वैज्ञानिकों का मानना है कि क्रोनिक इन्फ्लेमेशन, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस, लिपिड मेटाबोलिज्म में गड़बड़ी, ब्लड शुगर रेगुलेशन और ब्लड प्रेशर कंट्रोल का प्रभावित होना वे मुख्य जैविक प्रक्रियाएं हैं जो मेटाबोलिक सिंड्रोम को बढ़ाती हैं।

ISGlobal के ‘एनवायरनमेंट एंड हेल्थ ओवर द लाइफ़कोर्स’ प्रोग्राम की डायरेक्टर मार्टिन व्रिजहेड ने कहा कि इन नतीजों का पब्लिक हेल्थ पर गहरा असर पड़ता है। उन्होंने बच्चों की लंबी उम्र तक हार्ट और मेटाबोलिक हेल्थ को सुरक्षित रखने के लिए वायु प्रदूषण के स्तर को कम करने की दिशा में तत्काल ठोस कदम उठाने पर जोर दिया।

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TAGGED:Air pollutionChildhoodHELIX Project Study Children Metabolic HealthISGlobal Barcelona Research Environmental Research JournalMetabolic Syndrome RiskPM2.5 NO2 Impact on Children Heart HealthType 2 Diabetes Heart Disease Kids Air Pollution
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