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Environment Pulse > खनिज > गैर-वाणिज्यिक और वाणिज्यिक कोयला खदानों के प्रोडक्शन में 9.6% की बढ़ोतरी
(फोटो सौजन्य-एआई)
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गैर-वाणिज्यिक और वाणिज्यिक कोयला खदानों के प्रोडक्शन में 9.6% की बढ़ोतरी

Environment Pulse
Last updated: August 4, 2026 9:38 pm
Environment Pulse
Published: August 4, 2026
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(फोटो सौजन्य-एआई)
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कोयला आयात पर निर्भरता घटाने के प्रयासों में काफी हद तक मिल रही सफलता

कैप्टिव और कामर्शियल खनन सेक्टर की पूरी क्षमता का इस्तेमाल करने पर जोर

एनवायरमेंट पल्स डेस्क

हाल  ही में जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार अकेले जुलाई में कैप्टिव (गैर-वाणिज्यिक) और कामर्शियल (वाणिज्यिक) कोयला खदानों के प्रोडक्शन में 9.6% की बढ़ोतरी हुई है। कोयला मंत्रालय के अनुसार भारत के कैप्टिव और कमर्शियल कोयला खनन सेक्टर में मज़बूत ग्रोथ देखी गयी है। एक अनुमान के हिसाब से कोयला प्रोडक्शन एक साल में 9.61 प्रतिशत बढ़कर 14.78 मिलियन टन (MT) हो गया।

पिछले एक महीने में देखा गया है कि  कैप्टिव और कामर्शियल खदानों से कोयले की सप्लाई (डिस्पैच) ने बढ़त हासिल की।  यह लगभग 17.49 मिलियन टन (MT) तक पहुँच गई, जो बेहतर खनन कामकाज और कोयले की कुशल निकासी को दर्शाता है। इस सब का नतीजा है कि प्रोडक्शन में लगातार बढ़ोतरी, कैप्टिव और कामर्शियल कोयला खनन सेक्टर में कामकाज की कुशलता में सुधार, खनन प्रोडक्टिविटी में वृद्धि और खनन क्षमताओं के बेहतर इस्तेमाल को देखा गया है।

कोयला मंत्रालय के अनुसार जैसे-जैसे आउटपुट में लगातार बढ़ोतरी होगी, आयातित कोयले पर भारत की निर्भरता कम होगी।  इससे  सप्लाई चेन मज़बूत होगा और कीमती विदेशी मुद्रा की बचत होगी।

जानकारों का मानना है कि  यह देश की ऊर्जा सुरक्षा और औद्योगिक विकास के लिए ज़रूरी कदम है।  इससे  सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विज़न को भी बल मिलता है। कोयला मंत्रालय ने प्रगतिशील नीतिगत उपायों, मज़बूत रेगुलेटरी निगरानी और स्टेकहोल्डर्स के लगातार सपोर्ट के ज़रिए कैप्टिव और कामर्शियल खनन सेक्टर की पूरी क्षमता का इस्तेमाल करने के अपने संकल्प को दोहराया है।

Also Read: Funds of ₹1 Crore Approved to Promote Eco-Tourism in U.P. 

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