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डेविड एटनबरो के समर्थन से 30 मिलियन पाउंड में खरीदी गई 9,500 एकड़ जमीन, वन्यजीव संरक्षण के लिए होगा इस्तेमाल

Environment Pulse
Last updated: November 2, 2026 8:26 pm
Environment Pulse
Published: November 2, 2026
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ब्रिटेन में प्रकृति संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए संरक्षण संगठनों ने सर डेविड एटनबरो के समर्थन से 30 मिलियन पाउंड जुटाकर 9,500 एकड़ (लगभग 3,800 हेक्टेयर) के विशाल ‘रोथबरी एस्टेट’ को खरीद लिया है। द वाइल्डलाइफ ट्रस्ट्स और नॉर्थम्बरलैंड वाइल्डलाइफ ट्रस्ट द्वारा 30 अक्टूबर 2026 को पूरी की गई इस खरीद से इस क्षेत्र को व्यावसायिक विकास और विभाजन से बचा लिया गया है। पिछले 30 वर्षों में इंग्लैंड में बिक्री के लिए उपलब्ध कराई गई सबसे बड़ी एकल भूमि संपत्तियों में से एक इस रोथबरी एस्टेट में जंगल, कृषि भूमि और सिमंसाइड हिल्स शामिल हैं। दो वर्षों चले इस जनसमर्थन अभियान में 25,000 से अधिक लोगों, नेशनल लॉटरी और सरकार (Defra) ने आर्थिक योगदान दिया। संगठनों की योजना इस क्षेत्र में प्राकृतिक आवासों को बहाल करने, पुनर्योजी कृषि को बढ़ावा देने और उत्तर-पूर्वी इंग्लैंड से स्कॉटलैंड सीमा तक एक 40 मील लंबा प्राकृतिक गलियारा विकसित करने की है, जिससे लाल गिलहरियों, कर्ल्यू और अन्य वन्यजीवों को सुरक्षित आवास मिल सके।

एनवायरमेंट पल्स डेस्क :  वन्यजीव संरक्षण की दिशा में ब्रिटेन में एक बड़ी पहल हुई है। प्रकृति संरक्षण संगठनों ने 30 मिलियन पाउंड (लगभग 9,500 एकड़) के विशाल रोथबरी एस्टेट को 30 मिलियन पाउंड में खरीदकर उसे संभावित व्यावसायिक विकास और निजी हिस्सों में विभाजित होने से बचा लिया है।

इस ऐतिहासिक सौदे के बाद इस पूरे क्षेत्र को प्राकृतिक विरासत के संरक्षण और वन्यजीवों के पुनर्वास के लिए विकसित किया जाएगा। द वाइल्डलाइफ ट्रस्ट्स के 47 चैरिटेबल संगठनों के महासंघ और नॉर्थम्बरलैंड वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ने 30 अक्टूबर 2026 को इस 9,500 एकड़ (लगभग 3,800 हेक्टेयर) संपत्ति की खरीद पूरी की।

इस अभियान को प्रसिद्ध प्रकृतिवादी और प्रसारक सर डेविड एटनबरो का विशेष समर्थन मिला। करीब दो वर्षों तक चले सार्वजनिक धन संग्रह अभियान के जरिए इस खरीद के लिए आवश्यक राशि जुटाई गई। रोथबरी एस्टेट को पिछले 30 वर्षों से अधिक समय में इंग्लैंड में बिक्री के लिए उपलब्ध कराई गई सबसे बड़ी एकल भूमि संपत्तियों में से एक बताया गया है।

इसमें पूर्व ग्राउज मूर (शिकार के लिए इस्तेमाल होने वाला पहाड़ी क्षेत्र), जंगल, कृषि भूमि और सिमंसाइड हिल्स शामिल हैं। यह संपत्ति कई शताब्दियों तक ड्यूक ऑफ नॉर्थम्बरलैंड के परिवार के स्वामित्व में रही थी। बाद में लॉर्ड मैक्स पर्सी ने इसे बिक्री के लिए बाजार में रखा। संरक्षण संगठनों को आशंका थी कि यदि इसे कई निजी खरीदारों के बीच बांट दिया गया, तो आम लोगों की पहुंच सीमित हो सकती है और प्राकृतिक आवासों के संरक्षण की संभावनाएं प्रभावित हो सकती हैं।

इस संपत्ति का शुरुआती हिस्सा वर्ष 2024 में खरीदा गया था। शेष भूमि खरीदने के लिए दो वर्ष के भीतर 30 मिलियन पाउंड जुटाने का लक्ष्य रखा गया था। इस अभियान में 25,000 से अधिक लोगों ने भाग लिया और 17 मिलियन पाउंड से अधिक का योगदान दिया। इसके अलावा नेशनल लॉटरी हेरिटेज फंड ने 5 मिलियन पाउंड का अनुदान दिया, जबकि पर्यावरण, खाद्य एवं ग्रामीण मामलों के विभाग (Defra) ने 1.94 मिलियन पाउंड की सहायता देने का वादा किया।

सर डेविड एटनबरो के समर्थन से अभियान को व्यापक जनसमर्थन मिला। उनके समर्थन के बाद केवल एक सप्ताह में एक मिलियन पाउंड से अधिक का चंदा प्राप्त हुआ। संरक्षण संगठनों की योजना इस विशाल संपत्ति को प्रकृति संरक्षण और पुनर्बहाली के एक बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की है। इसके तहत प्राकृतिक आवासों को बहाल करने, पुनर्योजी कृषि को बढ़ावा देने और स्थानीय वन्यजीवों के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार करने पर जोर दिया जाएगा।

इसके साथ ही उत्तर-पूर्वी इंग्लैंड के तट से किल्डर फॉरेस्ट होते हुए स्कॉटलैंड की सीमा तक लगभग 40 मील लंबा प्राकृतिक गलियारा विकसित करने की योजना है। इससे विभिन्न वन्यजीव प्रजातियों को सुरक्षित आवास और आवागमन का मार्ग मिल सकेगा। इस क्षेत्र में पहले से ही लाल गिलहरियां, कर्ल्यू पक्षी, लैपविंग, पहाड़ी भौंरे और कई अन्य वन्यजीव प्रजातियां पाई जाती हैं।

द वाइल्डलाइफ ट्रस्ट्स के अध्यक्ष एमेरिटस सर डेविड एटनबरो ने अभियान की सफलता पर लोगों का आभार जताते हुए कहा कि संगठन ने जनता से सहयोग मांगा था और हजारों लोगों ने आगे आकर समर्थन दिया। अब ऐसा प्राकृतिक परिदृश्य विकसित करने का अवसर वास्तविकता बन सकता है, जहां प्रकृति और मनुष्य साथ-साथ फल-फूल सकें।

रोथबरी एस्टेट की खरीद को इंग्लैंड की महत्वाकांक्षी प्रकृति पुनर्बहाली परियोजनाओं में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे न केवल हजारों एकड़ प्राकृतिक भूमि और वन्यजीवों के आवास सुरक्षित होंगे, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए इस क्षेत्र की पारिस्थितिक विरासत को संरक्षित करने का अवसर भी मिलेगा।

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