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COP31 से पहले ऑस्ट्रेलिया की जलवायु नीति पर सवाल, 500 से अधिक वैज्ञानिकों ने नए कोयला और गैस प्रोजेक्ट रोकने की मांग की

Environment Pulse
Last updated: November 3, 2026 7:33 pm
Environment Pulse
Published: November 3, 2026
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COP31 जलवायु सम्मेलन से पहले ऑस्ट्रेलिया के 500 से अधिक शिक्षाविदों और वैज्ञानिकों ने प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज को खुला पत्र लिखकर नए कोयला और गैस प्रोजेक्ट्स को तुरंत रोकने की मांग की है। वैज्ञानिकों का कहना है कि जीवाश्म ईंधन के विस्तार को मंजूरी देते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जलवायु नेतृत्व का दावा करना देश की विश्वसनीयता को कमजोर करता है।

एनवायरमेंट पल्स डेस्क : जलवायु परिवर्तन के खिलाफ वैश्विक नेतृत्व की भूमिका निभाने की ऑस्ट्रेलिया की कोशिशों के बीच देश के 500 से अधिक शिक्षाविदों और वैज्ञानिकों ने सरकार से नए कोयला एवं गैस प्रोजेक्ट को मंजूरी देना तत्काल बंद करने की अपील की है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि जीवाश्म ईंधन के विस्तार की अनुमति जारी रखते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जलवायु संरक्षण का नेतृत्व करने का दावा करना देश की विश्वसनीयता को कमजोर करता है। प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज को संबोधित पांच पृष्ठों का एक खुला पत्र मंगलवार को जारी किया गया। इस पर ऑस्ट्रेलिया के सभी राज्यों और क्षेत्रों के विश्वविद्यालयों तथा शोध संस्थानों से जुड़े 500 से अधिक शोधकर्ताओं ने हस्ताक्षर किए हैं।

यह अपील ऐसे समय आई है, जब ऑस्ट्रेलिया अगले सप्ताह तुर्किये के अंताल्या में होने वाले COP31 जलवायु सम्मेलन की वार्ताओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की तैयारी कर रहा है। देश के ऊर्जा एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री क्रिस बोवेन इस सम्मेलन में वार्ता अध्यक्ष की जिम्मेदारी निभाएंगे। खुले पत्र में शिक्षाविदों ने सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं।

इनमें कोयला, तेल और गैस के इस्तेमाल को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने के लिए बाध्यकारी राष्ट्रीय समयसीमा निर्धारित करना, नई और विस्तारित जीवाश्म ईंधन परियोजनाओं की मंजूरी पर तत्काल प्रतिबंध लगाना तथा वैश्विक स्तर पर जीवाश्म ईंधन से दूरी बनाने के लिए स्पष्ट समयसीमा वाला मजबूत अंतरराष्ट्रीय समझौता करना शामिल है।

वैज्ञानिकों ने विशेष रूप से हंटर वैली और बीटालू बेसिन में प्रस्तावित कोयला एवं गैस परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए इनके विस्तार पर रोक लगाने की मांग की है। पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में क्लाइमेट चेंज अथॉरिटी की बोर्ड सदस्य प्रोफेसर लेस्ली ह्यूजेस, क्लाइमेट एनालिटिक्स के संस्थापक बिल हेयर और वरिष्ठ जलवायु वैज्ञानिक प्रोफेसर डेविड करॉली शामिल हैं।

शिक्षाविदों ने संयुक्त राष्ट्र के हालिया वैज्ञानिक आकलनों का हवाला देते हुए कहा कि तेजी से प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखना अब संभव नहीं रह गया है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि OECD देशों में प्रति व्यक्ति ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन करने वाले देशों में ऑस्ट्रेलिया सबसे ऊपर रहने वालों में शामिल है।

प्रोफेसर लेस्ली ह्यूजेस के अनुसार, कोई भी सरकार जलवायु संकट को लेकर गंभीर होने का दावा नहीं कर सकती, यदि वह स्वयं उस संकट को बढ़ाने वाली गतिविधियों को सक्रिय रूप से प्रोत्साहित कर रही हो। अकादमिक समुदाय की यह अपील अल्बनीज सरकार पर बढ़ते दबाव को दर्शाती है।

आलोचकों का कहना है कि उत्सर्जन में कमी लाने के राष्ट्रीय लक्ष्यों और अंतरराष्ट्रीय जलवायु प्रतिबद्धताओं के बावजूद सरकार ने अपने कार्यकाल में कई नई कोयला एवं गैस परियोजनाओं को मंजूरी दी है। उनके अनुसार, ऐसी परियोजनाएं लंबे समय तक कार्बन उत्सर्जन जारी रखने की स्थिति पैदा करती हैं, जो पेरिस जलवायु समझौते के उद्देश्यों के विपरीत है। COP31 से पहले उठी यह मांग ऑस्ट्रेलिया की घरेलू ऊर्जा नीतियों और अंतरराष्ट्रीय जलवायु नेतृत्व की महत्वाकांक्षा के बीच मौजूद विरोधाभास को सामने लाती है।

अब निगाहें इस बात पर होंगी कि सरकार वैज्ञानिक समुदाय की चेतावनी पर क्या रुख अपनाती है और वैश्विक जलवायु वार्ताओं में जीवाश्म ईंधन से दूरी बनाने के मुद्दे पर कितनी ठोस प्रतिबद्धता दिखाती है।

Also Read: 2030 तक पारिस्थितिकी बहाली के वैश्विक लक्ष्य का केवल 25% हासिल, संयुक्त राष्ट्र ने दी चेतावनी

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