By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
Environment PulseEnvironment PulseEnvironment Pulse
Notification Show More
Font ResizerAa
  • ईको सिस्टम
    • जल
    • जंगल
    • जमीन
    • हवा
    • खनिज
    • जैव-विविधता
    • गतिविधियां
  • कचरा-प्रबंधन
    • ग्रीन बिजनेस
    • रीसाइकलिंग
    • इन्नोवेशन
    • इनिशिएटिव्स
  • फ्यूचर ग्रीन
    • ऊर्जा
    • सस्टेनिबिलिटी
    • इलेक्ट्रिक व्हीकल
    • कृषि एवं खाद्य
  • ओपिनियन
    • विचार
    • इम्पैक्ट फीचर
    • स्टोरी
  • मल्टीमीडिया
    • वीडियो
Reading: बढ़ते तापमान के साथ तालमेल नहीं बिठा पा रहे कीट, गर्मी सहने की क्षमता की प्राकृतिक सीमा उजागर: अध्ययन
Share
Font ResizerAa
Environment PulseEnvironment Pulse
  • ईको सिस्टम
  • कचरा-प्रबंधन
  • फ्यूचर ग्रीन
  • ओपिनियन
  • मल्टीमीडिया
Search
  • ईको सिस्टम
    • जल
    • जंगल
    • जमीन
    • हवा
    • खनिज
    • जैव-विविधता
    • गतिविधियां
  • कचरा-प्रबंधन
    • ग्रीन बिजनेस
    • रीसाइकलिंग
    • इन्नोवेशन
    • इनिशिएटिव्स
  • फ्यूचर ग्रीन
    • ऊर्जा
    • सस्टेनिबिलिटी
    • इलेक्ट्रिक व्हीकल
    • कृषि एवं खाद्य
  • ओपिनियन
    • विचार
    • इम्पैक्ट फीचर
    • स्टोरी
  • मल्टीमीडिया
    • वीडियो
Have an existing account? Sign In
Follow US
Environment Pulse > ईको सिस्टम > जैव-विविधता > बढ़ते तापमान के साथ तालमेल नहीं बिठा पा रहे कीट, गर्मी सहने की क्षमता की प्राकृतिक सीमा उजागर: अध्ययन
AI Image
ईको सिस्टमजैव-विविधता

बढ़ते तापमान के साथ तालमेल नहीं बिठा पा रहे कीट, गर्मी सहने की क्षमता की प्राकृतिक सीमा उजागर: अध्ययन

Environment Pulse
Last updated: November 2, 2026 9:28 pm
Environment Pulse
Published: November 2, 2026
Share
AI Image
SHARE

प्रमुख शोध पत्रिका ‘नेचर’ में प्रकाशित एक नए वैज्ञानिक अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ते तापमान से तालमेल बिठाने में उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों (विशेषकर पेरू और केन्या) के निचले इलाकों में रहने वाले कीट असमर्थ साबित हो रहे हैं और अपनी अधिकतम ताप सहनशीलता के करीब पहुंच चुके हैं। वुर्जबर्ग विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए इस अध्ययन में पाया गया कि कीटों की ताप सहनशीलता उनके वातावरण के गर्म होने के अनुपात में नहीं बढ़ती और उनकी जैविक संरचना (प्रोटीन की तापीय स्थिरता) में तेजी से विकासवादी अनुकूलन की गुंजाइश बहुत कम है। निचले इलाकों के कीटों में गर्मी के अनुसार ढलने की क्षमता (जैविक लचीलापन) भी अनुपस्थित पाई गई। अमेजन जैसे क्षेत्रों में भविष्य की अत्यधिक गर्मी के कारण कीटों के ‘हीट कोमा’ में जाने और उनकी आधी आबादी के नष्ट होने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है, जिससे संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र, परागण और खाद्य शृंखला प्रभावित हो सकती है।

एनवायरमेंट पल्स डेस्क :  जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ते तापमान का सामना करने में उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों के अनेक कीट असमर्थ साबित हो सकते हैं। एक नए वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार, मैदानी और निचले उष्णकटिबंधीय इलाकों में रहने वाले कई कीट पहले से ही अपनी अधिकतम ताप सहनशीलता की सीमा के करीब पहुंच चुके हैं।

उनकी जैविक संरचना में मौजूद बुनियादी सीमाओं के कारण तेजी से बदलते तापमान के अनुरूप विकासवादी अनुकूलन की संभावना भी बेहद कम है। प्रमुख शोध पत्रिका नेचर में प्रकाशित इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने दक्षिण अमेरिका के पेरू और अफ्रीका के केन्या में लगभग 2,300 कीट प्रजातियों की ताप सहनशीलता का विश्लेषण किया।

शोधकर्ताओं ने अलग-अलग ऊंचाई वाले क्षेत्रों में कीटों के तापमान सहने की अधिकतम और न्यूनतम सीमाओं को मापा। साथ ही, उनकी आनुवंशिक संरचना का अध्ययन कर यह समझने का प्रयास किया कि ताप सहनशीलता को कौन-से जैविक कारक नियंत्रित करते हैं। यह शोध वुर्जबर्ग विश्वविद्यालय की किम ली होल्जमैन सहित वैज्ञानिकों की टीम ने किया।

अध्ययन में सामने आया कि कीटों की ताप सहनशीलता आसपास के वातावरण के गर्म होने के अनुपात में नहीं बढ़ती। उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों के निचले इलाकों में यह क्षमता एक निश्चित सीमा के करीब पहुंच जाती है। इसका अर्थ है कि वहां रहने वाले कीटों के पास भविष्य में बढ़ने वाली गर्मी को सहन करने की गुंजाइश बहुत कम बची है।

शोधकर्ताओं ने पाया कि अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रहने वाले कीट अत्यधिक गर्मी के थोड़े समय के संपर्क में आने के बाद अपनी ताप सहनशीलता में अस्थायी वृद्धि कर सकते हैं। इसे जैविक लचीलापन या प्लास्टिसिटी कहा जाता है। इसके विपरीत, निचले उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों के कीटों में यह क्षमता काफी हद तक अनुपस्थित रही। कुछ प्रजातियों का प्रदर्शन गर्मी के संपर्क में आने के बाद और खराब भी पाया गया। अध्ययन के मुताबिक, अलग-अलग कीट समूहों की ताप सहनशीलता में अंतर का संबंध उनके प्रोटीन की तापीय स्थिरता से है।

मक्खियों जैसे कुछ कीट गर्मी के प्रति अधिक संवेदनशील पाए गए, जबकि ऑर्थोप्टेरा समूह के कीट अपेक्षाकृत अधिक गर्मी सहन कर सके। वैज्ञानिकों का मानना है कि प्रोटीन की मूल संरचना इन सीमाओं को निर्धारित करती है। यह संरचना लंबे समय से संरक्षित है और इसमें इतना तेज बदलाव संभव नहीं है कि कीट मौजूदा जलवायु परिवर्तन की रफ्तार के साथ तालमेल बिठा सकें। शोध में अमेजन के निचले इलाकों को लेकर विशेष चिंता जताई गई है।

कुछ जलवायु परिदृश्यों के तहत भविष्य में सतह के तापमान का 52 प्रतिशत तक और वायु तापमान का 38 प्रतिशत तक हिस्सा ऐसी परिस्थितियां पैदा कर सकता है, जिनमें लंबे समय तक संपर्क रहने पर अध्ययन में शामिल कीट समुदाय के आधे हिस्से की मृत्यु हो सकती है। अत्यधिक गर्मी के कारण कीटों के शरीर का तापमान उनकी सहनशीलता से ऊपर पहुंचने पर वे निष्क्रिय होकर हीट कोमा की स्थिति में जा सकते हैं।

यह खतरा इसलिए भी गंभीर है क्योंकि कीट परागण, जैविक पदार्थों के अपघटन और खाद्य शृंखला को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनके प्रभावित होने से पूरे पारिस्थितिकी तंत्र पर असर पड़ सकता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, कीटों की गर्मी सहने की क्षमता पर बुनियादी जैविक सीमाएं हैं और विकास की प्राकृतिक प्रक्रिया मौजूदा जलवायु परिवर्तन की तेज रफ्तार की बराबरी नहीं कर पाएगी।

अध्ययन ने पृथ्वी के सर्वाधिक जैव विविधता वाले उष्णकटिबंधीय कीट समुदायों की संवेदनशीलता को रेखांकित करते हुए ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में तत्काल और प्रभावी कटौती की आवश्यकता पर जोर दिया है।

Also Read: डेविड एटनबरो के समर्थन से 30 मिलियन पाउंड में खरीदी गई 9,500 एकड़ जमीन, वन्यजीव संरक्षण के लिए होगा इस्तेमाल

You Might Also Like

Punjab’s Water Crisis Is Also a Fairness Crisis, New Study Says
पश्चिमी घाट में लाइकेन की पांच नई प्रजातियों की खोज, भारत की जैव विविधता को मिली नई पहचान
‘भारत के शेर फिर से दहाड़ रहे हैं’, एक दशक में एशियाई शेरों की आबादी 523 से बढ़कर 891 हुई
खिजड़िया पक्षी अभयारण्य बना ब्लैक-नेक्ड स्टॉर्क के लिए अहम प्रजनन स्थल
पौधरोपण महाभियान धरती माता के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने का महायज्ञ: सीएम योगी
TAGGED:Amazon EcosystemBiodiversity CrisisClimate changeGlobal warmingHeat ComaInsect Heat ToleranceNature studyTropical InsectsWürzburg University
Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp LinkedIn Email Copy Link Print
1 Comment
  • Pingback: यूरोप का सबसे बड़ा कार्बन कैप्चर संयंत्र शुरू, नीदरलैंड से नॉर्वे तक CO₂ भंडारण की व्यवस्था – Environme

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
LinkedInFollow
Popular News
AI Image
जैव-विविधता

पश्चिमी घाट में लाइकेन की पांच नई प्रजातियों की खोज, भारत की जैव विविधता को मिली नई पहचान

Environment Pulse
Environment Pulse
October 17, 2026
सांस्कृतिक विरासतों पर जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण का प्रभाव
तूफान लाला: हवाई से टकराए बिना भी मचाई तबाही
देहरादून की नदियों में मानसून के दौरान एंटीबायोटिक प्रतिरोधी जीन में तेज वृद्धि
Tens of Thousands March in Brussels Demanding Stronger, Faster Climate Action

Categories

  • जल
  • जमीन
  • जंगल
  • जैव-विविधता
  • हवा
  • खनिज
  • ऊर्जा
  • ग्रीन जॉब
  • स्टोरी
  • इम्पैक्ट फीचर
  • वीडियो

About US

Environmentpulse.com is a bilingual (Hindi-English) news platform that presents high-quality news, views, and videos related to the environment.
Quick Link
  • ऊर्जा
  • खनिज
  • जैव-विविधता
  • जंगल
Top Categories
  • My Bookmark
  • Contact
  • Privacy Policy
Environment PulseEnvironment Pulse
© Pratham Publisher and Informatics Private Limited. All Rights Reserved. | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?