By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
Environment PulseEnvironment PulseEnvironment Pulse
Notification Show More
Font ResizerAa
  • ईको सिस्टम
    • जल
    • जंगल
    • जमीन
    • हवा
    • खनिज
    • जैव-विविधता
    • गतिविधियां
  • कचरा-प्रबंधन
    • ग्रीन बिजनेस
    • रीसाइकलिंग
    • इन्नोवेशन
    • इनिशिएटिव्स
  • फ्यूचर ग्रीन
    • ऊर्जा
    • सस्टेनिबिलिटी
    • इलेक्ट्रिक व्हीकल
    • कृषि एवं खाद्य
  • ओपिनियन
    • विचार
    • इम्पैक्ट फीचर
    • स्टोरी
  • मल्टीमीडिया
    • वीडियो
Reading: विशाखापटनम में 15 अरब डॉलर के डेटा सेंटर प्रोजेक्ट का विरोध, पानी और वन्यजीवों पर खतरे की आशंका
Share
Font ResizerAa
Environment PulseEnvironment Pulse
  • ईको सिस्टम
  • कचरा-प्रबंधन
  • फ्यूचर ग्रीन
  • ओपिनियन
  • मल्टीमीडिया
Search
  • ईको सिस्टम
    • जल
    • जंगल
    • जमीन
    • हवा
    • खनिज
    • जैव-विविधता
    • गतिविधियां
  • कचरा-प्रबंधन
    • ग्रीन बिजनेस
    • रीसाइकलिंग
    • इन्नोवेशन
    • इनिशिएटिव्स
  • फ्यूचर ग्रीन
    • ऊर्जा
    • सस्टेनिबिलिटी
    • इलेक्ट्रिक व्हीकल
    • कृषि एवं खाद्य
  • ओपिनियन
    • विचार
    • इम्पैक्ट फीचर
    • स्टोरी
  • मल्टीमीडिया
    • वीडियो
Have an existing account? Sign In
Follow US
Environment Pulse > ईको सिस्टम > जल > विशाखापटनम में 15 अरब डॉलर के डेटा सेंटर प्रोजेक्ट का विरोध, पानी और वन्यजीवों पर खतरे की आशंका
AI Image
जल

विशाखापटनम में 15 अरब डॉलर के डेटा सेंटर प्रोजेक्ट का विरोध, पानी और वन्यजीवों पर खतरे की आशंका

Environment Pulse
Last updated: August 26, 2026 11:01 pm
Environment Pulse
Published: August 26, 2026
Share
AI Image
SHARE

आंध्र प्रदेश के विशाखापटनम में Google और Adani Group की साझेदारी से बनने वाले 15 अरब डॉलर (लगभग 1.2 लाख करोड़ रुपये) के विशाल हाइपरस्केल डेटा सेंटर प्रोजेक्ट का विरोध तेज हो गया है। स्थानीय निवासी और पर्यावरण कार्यकर्ता पानी के संकट और वन्यजीवों पर खतरे का हवाला देकर इसका विरोध कर रहे हैं।

एनवायरमेंट पल्स डेस्क। आंध्र प्रदेश के विशाखापटनम में प्रस्तावित विशाल हाइपरस्केल डेटा सेंटर परियोजना को लेकर पर्यावरण कार्यकर्ताओं और स्थानीय निवासियों का विरोध तेज हो गया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि परियोजना शहर के पहले से दबाव में मौजूद जल संसाधनों पर अतिरिक्त बोझ डाल सकती है और संवेदनशील वन एवं वन्यजीव क्षेत्रों को प्रभावित कर सकती है।

Google से जुड़ी और Adani Group की साझेदारी में विकसित की जा रही इस बहु-गीगावाट परियोजना के लिए विशाखापटनम के अदावीवरम-मुदासरलोवा, तारलुवाडा तथा पड़ोसी अनकापल्ली जिले के रामबिल्ली सहित कई क्षेत्रों में जमीन चिन्हित की गई है। करीब 15 अरब डॉलर यानी लगभग 1.2 लाख करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली यह परियोजना आंध्र प्रदेश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार की बड़ी योजना का हिस्सा है।

इससे बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन की उम्मीद भी जताई जा रही है। हालांकि, कुछ स्थानों पर पहाड़ियों की कटाई, भू-समतलीकरण और वनस्पति हटाने जैसी निर्माण गतिविधियां शुरू होने की बात सामने आई है। Green Visakha, Human Rights Forum (HRF), Coalition for AI Regulation और Jal Biradari समेत विभिन्न संगठनों ने परियोजना के खिलाफ मार्च और जनसभाएं की हैं। प्रदर्शनकारियों और बच्चों ने ‘We cannot drink DATA’ जैसे संदेशों वाले पोस्टर उठाए। कुछ प्रदर्शनों में Google के लोगो पर हथकड़ी की तस्वीरें भी प्रदर्शित की गईं।

संगठनों ने घर-घर जनजागरूकता अभियान और समुद्र तट पर विरोध प्रदर्शन करने की योजना भी बनाई है। विरोध का सबसे बड़ा मुद्दा विशाखापटनम में पानी की उपलब्धता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार करीब 25 लाख आबादी वाले शहर को जलाशयों और नदियों से लगभग 410 मिलियन लीटर पानी प्रतिदिन मिलता है, जबकि मांग करीब 480 मिलियन लीटर प्रतिदिन है। इस कमी के चलते शहर में नियमित रूप से पानी की राशनिंग करनी पड़ती है। कार्यकर्ताओं का तर्क है कि डेटा सेंटरों में कूलिंग और अन्य परिचालन जरूरतों के लिए पानी की मांग इस संकट को और गंभीर कर सकती है।

पर्यावरण समूहों की विशेष चिंता मुदासरलोवा जलाशय के कैचमेंट क्षेत्र को लेकर है, जो शहर के महत्वपूर्ण पेयजल स्रोतों में शामिल है। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि प्रस्तावित परियोजना का एक हिस्सा कुछ स्थानों पर जलाशय के कैचमेंट से करीब 120 मीटर की दूरी पर है। उनका कहना है कि बड़े पैमाने पर निर्माण से प्राकृतिक जल निकासी, भूजल पुनर्भरण और भविष्य की जल सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। वन्यजीव संरक्षण भी विवाद का प्रमुख विषय बन गया है।

परियोजना के कुछ स्थल कंबालाकोंडा वन्यजीव अभयारण्य के निकट बताए जा रहे हैं, जहां तेंदुए, पैंगोलिन और कई अन्य प्रजातियां पाई जाती हैं। एक परियोजना क्षेत्र की दूरी अभयारण्य से करीब 860 मीटर होने की बात कही गई है। पर्यावरण कार्यकर्ताओं के अनुसार भारी मशीनरी, निर्माण गतिविधियों का शोर, लगातार औद्योगिक संचालन और प्राकृतिक भू-दृश्य में बदलाव वन्यजीवों के आवास को प्रभावित कर सकते हैं।

कैलासगिरी-कंबालाकोंडा क्षेत्र से जुड़े जंगलों में पेड़ों की कटाई और पहाड़ी भूभाग में बदलाव को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि अलग-अलग परियोजनाओं के प्रभाव का आकलन करने के बजाय पूरे क्षेत्र में प्रस्तावित कई डेटा सेंटरों के संयुक्त पर्यावरणीय प्रभाव का स्वतंत्र अध्ययन किया जाना चाहिए। इस मामले में कानूनी चुनौती भी सामने आई है।

आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट में दायर जनहित याचिका में परियोजना की पर्यावरणीय मंजूरियों, पानी के इस्तेमाल, जमीन आवंटन और संरक्षित क्षेत्रों से इसकी दूरी पर सवाल उठाए गए हैं। याचिका में मंदिर की जमीन से जुड़े आरोपों का भी उल्लेख किया गया है। अगस्त के अंतिम सप्ताह में हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने पर्यावरणीय प्रक्रियाओं की अनदेखी नहीं किए जाने पर जोर दिया।

विरोध कर रहे संगठनों ने पर्यावरणीय मंजूरियों पर रोक, स्वतंत्र संचयी प्रभाव आकलन, पानी और बिजली की वास्तविक जरूरतों का सार्वजनिक विवरण तथा चल रहे निर्माण कार्य को रोकने की मांग की है। दूसरी ओर, परियोजना समर्थकों और राज्य सरकार का कहना है कि आवश्यक सुरक्षा उपाय किए जा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार परियोजना के लिए पानी अतिरिक्त स्रोतों, जिनमें पोलावरम परियोजना या औद्योगिक जल आवंटन शामिल हैं, से समर्पित पाइपलाइनों के जरिए उपलब्ध कराया जाएगा और मौजूदा पेयजल आपूर्ति को प्रभावित नहीं किया जाएगा।

Google की ओर से अत्याधुनिक एयर-कूलिंग तकनीक के इस्तेमाल की योजना बताई गई है, जिससे पानी की खपत कम रखने का दावा किया गया है। इसके अलावा ध्वनि नियंत्रण, पर्याप्त दूरी और अन्य पर्यावरणीय उपायों के जरिए आसपास के पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रभाव को सीमित करने की बात कही गई है। राज्य सरकार ने परियोजना को नियमों के अनुरूप बताते हुए इसे क्षेत्र के आर्थिक विकास और रोजगार के लिए महत्वपूर्ण अवसर करार दिया है।

हालांकि, पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि आर्थिक विकास स्थानीय लोगों की आजीविका और प्राकृतिक संसाधनों की कीमत पर नहीं होना चाहिए। Green Visakha के संस्थापक राजा रामा मोहन रॉय ने शहर में पहले से मौजूद जल संकट का हवाला देते हुए विकास को लोगों की आजीविका की कीमत पर नहीं करने की बात कही है। विरोध करने वाले समूह डेटा सेंटरों से पैदा होने वाले स्थायी रोजगार और उनके संभावित संसाधन उपभोग के बीच संतुलन पर भी सवाल उठा रहे हैं।

उनका कहना है कि यदि क्षेत्र में एक साथ कई बड़े डेटा सेंटर स्थापित होते हैं तो पानी, बिजली, जमीन और पर्यावरण पर उनका संयुक्त दबाव अलग-अलग परियोजनाओं के आकलन से कहीं अधिक हो सकता है। विशाखापटनम में जारी यह विवाद भारत में तेजी से बढ़ते डिजिटल और एआई इंफ्रास्ट्रक्चर तथा स्थानीय पर्यावरणीय सीमाओं के बीच उभरते तनाव को रेखांकित करता है। एक ओर डेटा सेंटरों को डिजिटल अर्थव्यवस्था और एआई विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर पानी, जंगल और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े सवाल परियोजनाओं के लिए बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं।

निर्माण गतिविधियों और अदालती कार्यवाही के बीच आने वाले दिनों में विरोध और कानूनी लड़ाई दोनों के और तेज होने की संभावना है।

Also Read: भारत में बढ़ रहा तेंदुआ-मानव संघर्ष, तेजी से घटते प्राकृतिक आवास और बढ़ता अतिक्रमण प्रमुख कारण

You Might Also Like

स्पेन: समुद्री संरक्षण में बड़ा कदम, 23 नए समुद्री संरक्षित क्षेत्र प्रस्तावित
कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य के आसपास 0 से 1 किमी का इको-सेंसिटिव जोन अधिसूचित
जल संरक्षण आज की सबसे जरूरी बात : स्वतंत्र देव सिंह
सूखा प्रबंधन में राहत नहीं, लचीलापन हो वैश्विक रणनीति का लक्ष्य
आर्थिक संवाद से आगे बढ़कर पर्यावरणीय शासन पर फोकस बढ़ा रहा BRICS: भारत
TAGGED:Environmental Protests IndiaGoogle Adani PartnershipKambalakonda Wildlife SanctuaryVisakhapatnam Data Center ProjectWater Scarcity Concerns
Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp LinkedIn Email Copy Link Print
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
LinkedInFollow
Popular News
Photo- AI
ऊर्जाफ्यूचर ग्रीनसस्टेनिबिलिटी

Green Careers Are Booming: Here’s How to Get In

Environment Pulse
Environment Pulse
August 13, 2026
बारिश की कमी का असर: भारत में खरीफ की बुआई पिछले साल के मुकाबले करीब 39 लाख हेक्टेयर कम
यूरोप में गंभीर सूखे का संकट: राइन, डेन्यूब और पो नदियों का जलस्तर रिकॉर्ड निचले स्तर पर
विशाखापत्तनम में गूगल के $15 अरब के AI डेटा सेंटर पर गहराया विवाद, पानी संकट और वन्यजीवों को लेकर ज़मीनी विरोध शुरू
भारत में स्कूली पर्यावरण शिक्षा को कैसे बदला जा सकता है?

Categories

  • जल
  • जमीन
  • जंगल
  • जैव-विविधता
  • हवा
  • खनिज
  • ऊर्जा
  • ग्रीन जॉब
  • स्टोरी
  • इम्पैक्ट फीचर
  • वीडियो

About US

Environmentpulse.com is a bilingual (Hindi-English) news platform that presents high-quality news, views, and videos related to the environment.
Quick Link
  • ऊर्जा
  • खनिज
  • जैव-विविधता
  • जंगल
Top Categories
  • My Bookmark
  • Contact
  • Privacy Policy
Environment PulseEnvironment Pulse
© Pratham Publisher and Informatics Private Limited. All Rights Reserved. | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?