
राज्य स्वच्छ गंगा मिशन की संगोष्ठी में जल बचाने के लिए जनांदोलन चलाने पर बल
नदी संरक्षण में अहम योगदान देने वालों को मिला ‘भागीरथ सम्मान’
एनवायरमेंट पल्स डेस्क
लखनऊ। जीवन दायिनी पानी के संरक्षण के लिए जल दूत बनने के आह्वान के साथ-साथ समय-समय पर शिक्षाविदों और पर्यावरण विशेषज्ञों ने गंगा संरक्षण की मांग उठायी है। एक गंभीर चर्चा इस विषय पर आयोजित हुई, जिसमें भूजल के संरक्षण और नदियों को फिर से जीवन देने पर बात की गई।
राज्य स्वच्छ गंगा मिशन ने इस संगोष्ठी का आयोजन किया। इसका मुख्य उद्देश्य विशेषज्ञों, शिक्षकों, अधिकारियों और अन्य संस्थाओं के प्रतिनिधियों के बीच एक आम मंच बनाना था, जिससे भूजल के संरक्षण, पानी के भरोसे, नदी के जीवन के लिए लोगों के साथ जुड़े रहने के बारे में बात हो सके।
उद्घाटन कार्यक्रम में जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, अपर मुख्य सचिव अनुराग श्रीवास्तव, उत्तर प्रदेश जल निगम के प्रबंध निदेशक डॉ. राजशेखर सिंह, भूगर्भ जल विभाग के विशेष सचिव राजेश प्रजापति और आईआईटी कानपुर के पूर्व प्रोफेसर विनोद तारे शामिल रहे। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलन और जल कलश पूजन के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की। इस अवसर पर गंगा अवतरण पर आधारित एक नृत्य-नाटिका प्रस्तुत किया गया। इसके साथ ही राज्य स्वच्छ गंगा मिशन की उपलब्धियों पर आधारित एक किताब का विमोचन किया गया।
इस मौके पर जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि जल संरक्षण आज की सबसे जरूरी बात है। उन्होंने सभी उपस्थित लोगों से इसको लोगों तक पहुंचाने की अपील की। उनका कहना था कि जल संरक्षण के लिए जन-आंदोलन की जरूरत है, ताकि भविष्य की पीढ़ियों के लिए पानी के संसाधन सुरक्षित रह सकें। अपर मुख्य सचिव अनुराग श्रीवास्तव ने सभी लोगों से ‘जल एंबेसडर’ के रूप में काम करने की अपील की। उनका कहना था कि लोगों की भागीदारी बिना किसी अन्य के जल संरक्षण के लक्ष्य हासिल नहीं किए जा सकते।
डॉ. राजशेखर सिंह ने छात्रों और छात्राओं से बात करते हुए भूजल के संरक्षण के बारे में बताया। उन्होंने युवाओं से जल संसाधनों के संरक्षण में सक्रिय होने की अपील की। कार्यक्रम के दौरान जल और नदी के संरक्षण में अहम योगदान देने वालों को ‘भागीरथ सम्मान’ से सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि ने लोगों से जल स्रोतों के संरक्षण में एक दूसरे के साथ मिलकर काम करने की अपील की। दोपहर में हुए एक तकनीकी सत्र में देश के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने भूजल के संरक्षण, नदी के जीवन को फिर से देना, जल प्रबंधन, नवाचार और समुदाय की भागीदारी जैसे विषयों पर अपने विचार साझा किए।
इस सत्र में भूषण गुप्ता, डॉ. आडुरी कैटना हर्नांडेज, प्रो. विनोद तारे, प्रभात सिंह, वेंकटेश दत्ता और अशोक कुमार सिंह जैसे विशेषज्ञों ने अपनी बात रखी। विशेषज्ञों ने वर्षा के पानी के संचयन, प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण, भूजल के भरोसे और जल के वैज्ञानिक प्रबंधन के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकारी कार्यक्रमों द्वारा नहीं हो सकता, बल्कि लोगों के सहयोग के बिना कोई संभावना नहीं है।
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने संगोष्ठी से मिले सुझावों और सिफारिशों की चर्चा की और उन्हें भविष्य की योजनाओं में शामिल करने की बात की। कार्यक्रम के समापन पर धन्यवाद दिया गया। यह संगोष्ठी ‘स्वच्छ गंगा-सुरक्षित भविष्य’ के सोच के साथ आयोजित की गई। इसके बाद लोगों में जल संरक्षण और नदी के जीवन के लिए जागरूकता फैली, विभिन्न हितधारकों के बीच समन्वय बना और उत्तर प्रदेश में जल प्रबंधन के लिए एक नई दिशा तैयार हुई।

