सूखे के संकट से किसानों को मिल सकती है राहत
हवा की नमी को पानी में बदलकर सूखे के संकट से मिलेगी राहत
एनवायरमेंट पल्स डेस्क
जिस उम्र में बच्चे खेल कूद कर दोस्तों के साथ जीवन में आनंद उठाते हैं, ओरेगन के 13 साल के करिश्माई लड़के रॉय किम ने कुछ ऐसा किया है जिससे सूखे का संकट दूर करने वाले किसान अब चैन की सांस ले पाएंगे। रॉय ने इस छोटी सी उम्र में ऐसी मशीन बनाई है जो हवा की नमी को पानी में बदलकर सूखे का सामना कर रहे किसानों की मदद करती है।
रॉय के जीवन का मूल मंत्र है कि “जो काम आप कल कर सकते हैं, उसे आज ही कर लें।” ‘यंग साइंटिस्ट लैब’ की रिपोर्ट के मुताबिक, उनका आविष्कार सूखे वाले इलाकों में खेती के लिए पानी का एक टिकाऊ ज़रिया देता है।
ये नया आविष्कार इस लिए ज़रूरी है क्यूंकि जैसे-जैसे जलवायु परिवर्तन एक भयावह रूप ले रही है, उन किसानों के लिए मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं जिन्हें फसल उगाने के लिए पानी की ज़रूरत होती है।
मूलतः किसान ज़मीन के नीचे के पानी, सतह पर मौजूद पानी और बारिश पर निर्भर रहते हैं, लेकिन समय के साथ ये स्रोत कम हो सकते हैं।
किम ने एक ऐसा डिवाइस बनाया जो हवा से नमी सोखने के लिए ‘पेल्टियर मॉड्यूल’ का इस्तेमाल करता है।
पेल्टियर मॉड्यूल के बारे में बताते हुए किम कहते हैं कि बिजली देने पर यह तापमान में अंतर पैदा करता है, जिससे एक तरफ़ गर्मी और दूसरी तरफ़ ठंडक होती है। यह अंतर गर्म हवा को तेज़ी से ठंडा कर देता है जब वह ठंडी सतह के संपर्क में आती है, जिससे जलवाष्प (water vapor) तरल बूंदों में बदल जाती है। कई टेस्ट और सुधार करने के बाद, किम ने अपना डिज़ाइन फाइनल किया।
इस डिवाइस में हवा गर्म तरफ़ से चैंबर में घुसती है, जहाँ एक हीटिंग एलिमेंट हवा को गर्म करता है और फिर वह ठंडी तरफ़ जाती है। यहाँ, तापमान के अंतर की वजह से पानी की बूंदें बनती हैं और नीचे जमा हो जाती हैं। इसके बाद पानी एक फ़नल में बहता है और वाल्व के ज़रिए पौधों तक पहुँचाया जाता है।
पौधों को सही मात्रा में पानी मिले, यह पक्का करने के लिए ज़मीन में एक ‘सॉइल मॉइस्चर सेंसर’ लगाया जाता है जो उनकी ज़रूरत का पता लगाता है। इसके अलावा, तापमान और नमी के सेंसर माहौल की जाँच करते हैं और अगर हालात बहुत ज़्यादा बदल जाते हैं तो हवा के बहाव को एडजस्ट करते हैं। किम ने बताया, “यह डिवाइस दो घंटे में 10 मिलीलीटर पानी बना सकता है, जिसकी ज़्यादा से ज़्यादा क्षमता 135.8 ग्राम प्रति किलोवाट-घंटा है।” “इस प्रोजेक्ट के ज़रिए मैंने सिर्फ़ पानी ही नहीं बनाया; मैंने टिकाऊ खेती के समाधान के लिए इंजीनियरिंग के साथ प्राकृतिक प्रक्रियाओं को भी जोड़ा है।”
ओरेगन के बीवरटन में व्हिटफ़ोर्ड मिडिल स्कूल के छात्र रॉय किम ने ‘3M यंग साइंटिस्ट चैलेंज’ में हिस्सा लिया। यह मिडिल स्कूल के छात्रों के लिए हर साल होने वाला एक साइंस कॉम्पिटिशन है जो रोज़मर्रा की समस्याओं को हल करने के लिए नई सोच (इनोवेशन) को बढ़ावा देता है।
किम को उम्मीद है कि वे अगले 15 सालों में और भी समाधान विकसित करेंगे और एक ऐसे इंजीनियर बनना चाहते हैं जो दुनिया भर में पर्यावरण से जुड़ी चुनौतियों का समाधान करे।
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