By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
Environment PulseEnvironment PulseEnvironment Pulse
Notification Show More
Font ResizerAa
  • ईको सिस्टम
    • जल
    • जंगल
    • जमीन
    • हवा
    • खनिज
    • जैव-विविधता
    • गतिविधियां
  • कचरा-प्रबंधन
    • ग्रीन बिजनेस
    • रीसाइकलिंग
    • इन्नोवेशन
    • इनिशिएटिव्स
  • फ्यूचर ग्रीन
    • ऊर्जा
    • सस्टेनिबिलिटी
    • इलेक्ट्रिक व्हीकल
    • कृषि एवं खाद्य
  • ओपिनियन
    • विचार
    • इम्पैक्ट फीचर
    • स्टोरी
  • मल्टीमीडिया
    • वीडियो
Reading: बारिश की कमी का असर: भारत में खरीफ की बुआई पिछले साल के मुकाबले करीब 39 लाख हेक्टेयर कम
Share
Font ResizerAa
Environment PulseEnvironment Pulse
  • ईको सिस्टम
  • कचरा-प्रबंधन
  • फ्यूचर ग्रीन
  • ओपिनियन
  • मल्टीमीडिया
Search
  • ईको सिस्टम
    • जल
    • जंगल
    • जमीन
    • हवा
    • खनिज
    • जैव-विविधता
    • गतिविधियां
  • कचरा-प्रबंधन
    • ग्रीन बिजनेस
    • रीसाइकलिंग
    • इन्नोवेशन
    • इनिशिएटिव्स
  • फ्यूचर ग्रीन
    • ऊर्जा
    • सस्टेनिबिलिटी
    • इलेक्ट्रिक व्हीकल
    • कृषि एवं खाद्य
  • ओपिनियन
    • विचार
    • इम्पैक्ट फीचर
    • स्टोरी
  • मल्टीमीडिया
    • वीडियो
Have an existing account? Sign In
Follow US
Environment Pulse > ईको सिस्टम > जमीन > बारिश की कमी का असर: भारत में खरीफ की बुआई पिछले साल के मुकाबले करीब 39 लाख हेक्टेयर कम
(फोटो सौजन्य-एआई)
जमीनजलजैव-विविधतासस्टेनिबिलिटी

बारिश की कमी का असर: भारत में खरीफ की बुआई पिछले साल के मुकाबले करीब 39 लाख हेक्टेयर कम

Environment Pulse
Last updated: August 8, 2026 6:27 pm
Environment Pulse
Published: August 8, 2026
Share
(फोटो सौजन्य-एआई)
SHARE
(फोटो सौजन्य-एआई)
(फोटो सौजन्य-एआई)

जुलाई के अंत तक 787.38 लाख हेक्टेयर में ही हुई बुआई; चावल, सोयाबीन, बाजरा और मक्के के रकबे में आई बड़ी गिरावट।

Contents
चावल से लेकर मक्का तक, हर फसल पर असरआने वाले हफ़्तों में बढ़ सकती हैं मुश्किलें

IMD महानिदेशक एम. मोहापात्रा ने चेताया—10 अगस्त के बाद और बढ़ सकता है बारिश का अंतर, कृषि उत्पादन पर मंडराया संकट।

एनवायरमेंट पल्स डेस्क

जुलाई के दूसरे पखवाड़े और अगस्त की शुरुआत में हुई बारिश के बावजूद, इस साल खरीफ सीजन के तहत बोई गई कुल फसल का रकबा पिछले साल की तुलना में करीब 39 लाख हेक्टेयर कम रहा है। यह जानकारी सरकारी आंकड़ों से सामने आई है।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के मुताबिक, जुलाई के चौथे हफ्ते तक इस साल खरीफ सीजन में कुल 787.38 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुआई हुई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 836.19 लाख हेक्टेयर था। यानी इस बार करीब 38.81 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस कमी के पीछे कई वजहें हैं, जिनमें बारिश की कमी प्रमुख मानी जा रही है।

अधिकारी ने बताया, “हमें इसका अंदाज़ा पहले से था। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने पहले ही इस सीजन में कम बारिश का अनुमान जताया था, जिसका असर कृषि उत्पादन और उपज पर पड़ना स्वाभाविक है। हम स्थिति पर लगातार नज़र रख रहे हैं और किसानों को इसका असर कम से कम महसूस हो, इसके लिए हरसंभव कोशिश कर रहे हैं।”

चावल से लेकर मक्का तक, हर फसल पर असर

ICAR के आंकड़ों के अनुसार, इस साल भी चावल सबसे ज़्यादा बोई जाने वाली खरीफ फसल रही, जिसका रकबा 234.43 लाख हेक्टेयर रहा। इसके बाद सोयाबीन का नंबर आता है, जो 113.65 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोया गया। हालांकि इन दोनों फसलों के रकबे में भी गिरावट देखी गई।

चावल: 2025 में चावल की बुआई 240.62 लाख हेक्टेयर में हुई थी, यानी इस साल के मुकाबले 6.19 लाख हेक्टेयर ज़्यादा।

सोयाबीन: सोयाबीन के रकबे में 3.59 लाख हेक्टेयर की कमी आई — पिछले साल यह फसल 117.24 लाख हेक्टेयर में बोई गई थी।

बाजरा और मक्का: आंकड़े बताते हैं कि इस सीजन सबसे ज़्यादा मार बाजरा और मक्के पर पड़ी। बाजरे का रकबा 2025 के 58.08 लाख हेक्टेयर से घटकर इस साल 49.54 लाख हेक्टेयर रह गया — यानी करीब 8.54 प्रतिशत की गिरावट। वहीं मक्के का रकबा 88.15 लाख हेक्टेयर से घटकर 77.79 लाख हेक्टेयर पर आ गया।

कपास और मूंगफली: कपास और मूंगफली के रकबे में भी पिछले सीजन के मुकाबले क्रमशः 3.99 लाख हेक्टेयर और 0.57 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज हुई।

आने वाले हफ़्तों में बढ़ सकती हैं मुश्किलें

IMD और कृषि मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि आने वाले हफ्ते भारतीय किसानों के लिए मुश्किल भरे साबित हो सकते हैं। अनुमान है कि यह सीजन बारिश की कमी के साथ खत्म होगा, जिसका खरीफ फसलों पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है।

IMD के महानिदेशक एम. मोहापात्रा ने कहा, “भारत के ज़्यादातर कृषि क्षेत्र में पहले से ही बारिश की कमी दर्ज हो रही है, और यह अंतर 10 अगस्त के बाद और बढ़ने की संभावना है। स्थानीय कारकों के अलावा, इस साल अल नीनो जैसे वैश्विक कारक भी असर डाल रहे हैं।”

Also Read: 25 साल बाद भी नहीं उबरे चिली के जुआन फर्नांडेज़ समुद्री पर्वत, बॉटम ट्रॉलिंग का दंश जारी

You Might Also Like

एआई और सैटेलाइट तकनीक से घट रहा मीथेन उत्सर्जन, जलवायु संकट से लड़ाई में नई उम्मीद
पर्यावरण संरक्षण को जन-आंदोलन बनाने का आह्वान, मानेसर में 77वें राज्य-स्तरीय वन महोत्सव में बोले सीएम सैनी
Open gym culture in Lucknow is boosting community health
जलवायु संकट: जब हमारे पास शब्द ही नहीं हैं तो समझें कैसे?
जलवायु संकट पर चुप्पी: बर्नहम आखिर इस मुद्दे से कतरा क्यों रहे हैं?
TAGGED:El Nino Impact On Indian AgricultureICAR Kharif Crop Sowing DataIMD Rainfall Deficit Monsoon WarningKharif Sowing Area Drop IndiaRice Soybean Maize Bajra Sowing Decrease
Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp LinkedIn Email Copy Link Print
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
LinkedInFollow
Popular News
AI Image
ईको सिस्टमजलसस्टेनिबिलिटी

भारत में स्कूली पर्यावरण शिक्षा को कैसे बदला जा सकता है?

Environment Pulse
Environment Pulse
August 14, 2026
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने मनाया अपना 20 वां स्थापना दिवस
‘सुपर अल नीनो’ का खौफ: अगले साल के अंत तक 5 करोड़ लोग हो सकते हैं गंभीर भुखमरी का शिकार, WFP की चेतावनी
योगी सरकार 1.04 करोड़ से संवारेगी गोमती नदी का उद्गम स्थल
2047 तक भारत की हरित अर्थव्यवस्था में 4.1 ट्रिलियन डॉलर निवेश की क्षमता, 4.8 करोड़ रोजगार के अवसर

Categories

  • जल
  • जमीन
  • जंगल
  • जैव-विविधता
  • हवा
  • खनिज
  • ऊर्जा
  • ग्रीन जॉब
  • स्टोरी
  • इम्पैक्ट फीचर
  • वीडियो

About US

Environmentpulse.com is a bilingual (Hindi-English) news platform that presents high-quality news, views, and videos related to the environment.
Quick Link
  • ऊर्जा
  • खनिज
  • जैव-विविधता
  • जंगल
Top Categories
  • My Bookmark
  • Contact
  • Privacy Policy
Environment PulseEnvironment Pulse
© Pratham Publisher and Informatics Private Limited. All Rights Reserved. | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?