
जुलाई के अंत तक 787.38 लाख हेक्टेयर में ही हुई बुआई; चावल, सोयाबीन, बाजरा और मक्के के रकबे में आई बड़ी गिरावट।
IMD महानिदेशक एम. मोहापात्रा ने चेताया—10 अगस्त के बाद और बढ़ सकता है बारिश का अंतर, कृषि उत्पादन पर मंडराया संकट।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क
जुलाई के दूसरे पखवाड़े और अगस्त की शुरुआत में हुई बारिश के बावजूद, इस साल खरीफ सीजन के तहत बोई गई कुल फसल का रकबा पिछले साल की तुलना में करीब 39 लाख हेक्टेयर कम रहा है। यह जानकारी सरकारी आंकड़ों से सामने आई है।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के मुताबिक, जुलाई के चौथे हफ्ते तक इस साल खरीफ सीजन में कुल 787.38 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुआई हुई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 836.19 लाख हेक्टेयर था। यानी इस बार करीब 38.81 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस कमी के पीछे कई वजहें हैं, जिनमें बारिश की कमी प्रमुख मानी जा रही है।
अधिकारी ने बताया, “हमें इसका अंदाज़ा पहले से था। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने पहले ही इस सीजन में कम बारिश का अनुमान जताया था, जिसका असर कृषि उत्पादन और उपज पर पड़ना स्वाभाविक है। हम स्थिति पर लगातार नज़र रख रहे हैं और किसानों को इसका असर कम से कम महसूस हो, इसके लिए हरसंभव कोशिश कर रहे हैं।”
चावल से लेकर मक्का तक, हर फसल पर असर
ICAR के आंकड़ों के अनुसार, इस साल भी चावल सबसे ज़्यादा बोई जाने वाली खरीफ फसल रही, जिसका रकबा 234.43 लाख हेक्टेयर रहा। इसके बाद सोयाबीन का नंबर आता है, जो 113.65 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोया गया। हालांकि इन दोनों फसलों के रकबे में भी गिरावट देखी गई।
चावल: 2025 में चावल की बुआई 240.62 लाख हेक्टेयर में हुई थी, यानी इस साल के मुकाबले 6.19 लाख हेक्टेयर ज़्यादा।
सोयाबीन: सोयाबीन के रकबे में 3.59 लाख हेक्टेयर की कमी आई — पिछले साल यह फसल 117.24 लाख हेक्टेयर में बोई गई थी।
बाजरा और मक्का: आंकड़े बताते हैं कि इस सीजन सबसे ज़्यादा मार बाजरा और मक्के पर पड़ी। बाजरे का रकबा 2025 के 58.08 लाख हेक्टेयर से घटकर इस साल 49.54 लाख हेक्टेयर रह गया — यानी करीब 8.54 प्रतिशत की गिरावट। वहीं मक्के का रकबा 88.15 लाख हेक्टेयर से घटकर 77.79 लाख हेक्टेयर पर आ गया।
कपास और मूंगफली: कपास और मूंगफली के रकबे में भी पिछले सीजन के मुकाबले क्रमशः 3.99 लाख हेक्टेयर और 0.57 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज हुई।
आने वाले हफ़्तों में बढ़ सकती हैं मुश्किलें
IMD और कृषि मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि आने वाले हफ्ते भारतीय किसानों के लिए मुश्किल भरे साबित हो सकते हैं। अनुमान है कि यह सीजन बारिश की कमी के साथ खत्म होगा, जिसका खरीफ फसलों पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है।
IMD के महानिदेशक एम. मोहापात्रा ने कहा, “भारत के ज़्यादातर कृषि क्षेत्र में पहले से ही बारिश की कमी दर्ज हो रही है, और यह अंतर 10 अगस्त के बाद और बढ़ने की संभावना है। स्थानीय कारकों के अलावा, इस साल अल नीनो जैसे वैश्विक कारक भी असर डाल रहे हैं।”
Also Read: 25 साल बाद भी नहीं उबरे चिली के जुआन फर्नांडेज़ समुद्री पर्वत, बॉटम ट्रॉलिंग का दंश जारी

