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Environment Pulse > ओपिनियन > स्टोरी > पर्यावरण अनुकूल पैकेजिंग से ऑनलाइन खाना मंगाना 30% तक महंगा हो सकता है
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पर्यावरण अनुकूल पैकेजिंग से ऑनलाइन खाना मंगाना 30% तक महंगा हो सकता है

Environment Pulse
Last updated: August 20, 2026 5:41 pm
Environment Pulse
Published: August 20, 2026
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जोमैटो द्वारा ऑनलाइन फूड डिलीवरी को पूरी तरह सिंगल-यूज प्लास्टिक से हटाकर पर्यावरण अनुकूल (ग्रीन) पैकेजिंग में बदलने से प्रत्येक ऑर्डर पर 10% से 30% तक का अतिरिक्त वित्तीय बोझ ग्राहकों पर पड़ सकता है। बगास (गन्ने की खोई), क्राफ्ट पेपर, एल्यूमीनियम और मिट्टी जैसे पर्यावरण-अनुकूल विकल्प प्लास्टिक के मुकाबले काफी महंगे हैं। जोमैटो की चीफ सस्टेनेबिलिटी ऑफिसर अंजलि रवि कुमार के अनुसार मुख्य चुनौती तकनीक नहीं, बल्कि ग्राहकों की अतिरिक्त भुगतान करने की अनिच्छा है।

एनवायरमेंट पल्स डेस्क। पर्यावरण संरक्षण और सिंगल-यूज प्लास्टिक के खात्मे की मुहिम का सीधा असर अब आम लोगों की जेब पर पड़ने वाला है। यदि ऑनलाइन फूड डिलीवरी दिग्गज जोमैटो अपनी डिलीवरी व्यवस्था को पूरी तरह पर्यावरण के अनुकूल यानी ग्रीन पैकेजिंग में तब्दील करती है, तो इसका पूरा वित्तीय बोझ अंततः आम ग्राहकों को ही उठाना होगा। कंपनी के अनुसार, प्लास्टिक से हरित विकल्पों पर शिफ्ट होने से ग्राहकों के प्रत्येक ऑर्डर की लागत में 10 से 30 फीसदी तक का इजाफा हो सकता है। वर्तमान में किसी भी सामान्य फूड ऑर्डर के कुल बिल में प्लास्टिक पैकेजिंग का खर्च लगभग 5 फीसदी बैठता है, जिसे पहले से ही ग्राहक वहन करता है।

प्लास्टिक के मुकाबले जैवसक्षम विकल्प जैसे बगास (गन्ने की खोई), क्राफ्ट पेपर, एल्यूमीनियम और मिट्टी के बर्तन का उत्पादन काफी महंगा है, और रेस्टोरेंट व डिलीवरी एग्रीगेटर्स का मार्जिन पहले से ही बेहद कम है। जोमैटो की चीफ सस्टेनेबिलिटी ऑफिसर अंजलि रवि कुमार के अनुसार, प्लास्टिक हटाने की दिशा में सबसे बड़ी चुनौती तकनीक नहीं, बल्कि ग्राहकों की भुगतान क्षमता है। भारतीय उपभोक्ता पर्यावरण बचाने के विचार का स्वागत तो करते हैं, लेकिन जब हर ऑर्डर पर 10 से 30 फीसदी का अतिरिक्त प्रीमियम चुकाने की बात आती है, तो वे पीछे हट जाते हैं।

हालांकि यह कहना गलत होगा कि सभी के लिए ऑनलाइन खाना महंगा हो जाएगा। डिलीवरी की लागत सभी रेस्टोरेंट्स पर लागू होती है, लेकिन पैकेजिंग की लागत केवल उन्हीं रेस्टोरेंट्स पर लागू होगी जो सस्टेनेबल पैकेजिंग का विकल्प चुनेंगे।

500 से अधिक शहरों में यह व्यवस्था लागू होने और रेस्टोरेंट्स द्वारा एक साथ इको-फ्रेंडली पैकेजिंग का ऑर्डर दिए जाने पर लागत तेजी से घट सकती है और दाम सामान्य स्तर पर आ सकते हैं। इसके लिए जोमैटो ने पैकेजिंग चुनने हेतु पैकस्विच नाम का प्लेटफॉर्म भी शुरू किया है। साथ ही, इस नई व्यवस्था की पूरी कीमत अकेले उपभोक्ता पर नहीं थोपी जा सकती। यदि 400 रुपये के भोजन पर 80 से 120 रुपये केवल पैकेजिंग के नाम पर जुड़ेंगे, तो मध्यम वर्ग ऑनलाइन फूड डिलीवरी से दूरी बनाने लगेगा, इसलिए इस बोझ को कंपनियां भी कुछ हद तक साझा करेंगी।

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