अरुणाचल प्रदेश की ग्लाव झील बनी 101वीं साइट, यह राज्य की पहली रामसर साइट
स्थानीय समुदायों की आजीविका को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम – भूपेंद्र यादव
एनवायरमेंट पल्स डेस्क
यूं तो अरुणाचल प्रदेश अपने संगीत और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है लेकिन अब एक अन्य क्षेत्र में भी इस राज्य ने ख्याति प्राप्त की है। इस सुन्दर राज्य के ग्लाव झील को देश की 101वीं रामसर स्थल बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। इसी के साथ अरुणाचल प्रदेश को पहला रामसर टैग मिला है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने यह जानकारी साझा किया है। उन्होंने इसे आर्द्रभूमि संरक्षण, जल व जलवायु सुरक्षा और स्थानीय समुदायों की आजीविका को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम बताया।
मंत्री ने आगे बताया कि पिछले कई वर्षों में कई नए रामसर क्षेत्र जुड़ते चले गए। 2014 में देश में सिर्फ 26 रामसर स्थल थे, जो अब बढ़कर 101 हो चुके हैं। इससे स्पष्ट है कि पर्यावरण और जैव विविधता संरक्षण पर भारत सफलता से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि हर नया रामसर स्थल न सिर्फ प्रकृति की रक्षा करता है, बल्कि उन समुदायों के हितों की भी हिफाजत करता है जो इन पारिस्थितिक तंत्रों पर निर्भर हैं।

श्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि ये काफी हर्ष की बात है कि भारत ने रामसर स्थलों के मामले में अब 100 का आकड़ा पार कर लिया है। आगे भी ये सफर लगातार जारी रहेगा।
ग्लाव झील कमलांग टाइगर रिजर्व और वन्यजीव अभ्यारण्य के भीतर स्थित है और पूर्वी हिमालय की एक बेहद साफ-सुथरी मीठे पानी की झील है। इस झील को बारहमासी पहाड़ी नदियों-नालों से पानी मिलता रहता है और चारों तरफ घना जंगल इसे घेरे हुए है। इस आर्द्रभूमि क्षेत्र में 150 से ज्यादा किस्म के पेड़ और 49 प्रकार के ऑर्किड पाए जाते हैं, जो इस जगह के पारिस्थितिक महत्व को और बढ़ा देते हैं।
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