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Environment Pulse > ईको सिस्टम > जमीन > धान की खेती में पानी और मीथेन की समस्या सुलझाने निकला यह स्टार्टअप
(फोटो सौजन्य-एआई)
जमीनसस्टेनिबिलिटी

धान की खेती में पानी और मीथेन की समस्या सुलझाने निकला यह स्टार्टअप

Environment Pulse
Last updated: August 6, 2026 10:29 pm
Environment Pulse
Published: August 6, 2026
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(फोटो सौजन्य-एआई)
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धान की खेती के लिए ज़रूरी पानी लगातार दुर्लभ होता जा रहा है

भारत के कई राज्यों में सिर्फ इसी सीज़न में यह आंकड़ा एक लाख किसानों को पार कर चुका है

एनवायरमेंट पल्स डेस्क

पिछले कुछ दशकों में एक नया दृश्य देखने को मिला है। एशिया भर में एक अजीब तस्वीर उभरी है। ये पाया गया है कि धान की खेती के लिए ज़रूरी पानी लगातार दुर्लभ होता जा रहा है। एक ओरे जहाँ तापमान बढ़ रहा है वहीं बारिश का मिज़ाज भी बदलता नज़र आ रहा है। इसका एक हल निकालने के लिए एक स्टार्टअप आगे बढ़ के आया है। न्यूयॉर्क और बेंगलुरु से चलने वाली क्लाइमेट-टेक कंपनी मिट्टी लैब्स है जिसने अपने काम को पूरे एशिया में फैलाने के लिए $9.5 मिलियन से ज़्यादा की फंडिंग जुटाई है। इस राउंड में पैसा लगाया है सऊदी अरब की दिग्गज कंपनी सऊदी अरामको की वेंचर शाखा, अरामको वेंचर्स ने।

तो मिट्टी लैब्स करती क्या है?

यह सैटेलाइट तस्वीरों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ज़मीनी टीमों के काम को जोड़कर खेती में पानी की बर्बादी और मीथेन गैस के उत्सर्जन को कम करने की कोशिश करती है।

इनको फंडिंग सीरीज़ A राउंड में वोल्टा सर्कल के अलावा पुराने निवेशकों ने भी हाथ बढ़ाया है। गोडरेज इंडस्ट्रीज़ ग्रुप, सिस्को, फ्रांसिस फैमिली फंड और लाइटस्पीड इंडिया जैसे बड़े नाम इसमें शामिल हैं। जुलाई 2024 के $3 मिलियन के सीड राउंड को मिलाकर, कंपनी की कुल फंडिंग अब $12.5 मिलियन तक पहुंच चुकी है।

ख़ास बात ये है कि दुनिया की आधी से ज़्यादा आबादी का मुख्य भोजन चावल ही है। उगाने के लिए खेत को पानी में डुबो के रखना पड़ता है ।

यह सैटेलाइट रडार से मिली तस्वीरों को अपनी टीमों द्वारा सालों में इकट्ठा किए गए ज़मीनी डेटा के साथ जोड़ती है।

तकनीकी तौर पर, कंपनी एक सिंथेटिक एपर्चर रडार (SAR) पर आधारित GeoAI प्लेटफॉर्म चलाती है, जो व्यावसायिक और सार्वजनिक सैटेलाइट से मिली 50 सेंटीमीटर से लेकर 10 मीटर तक की रिज़ॉल्यूशन वाली तस्वीरों पर प्रशिक्षित है।

एक साक्षात्कार में सह-संस्थापक जेवियर लागुआर्टा बताते हैं कि कंपनी की असली ताकत सिर्फ सैटेलाइट तस्वीरों में नहीं, बल्कि उस तरीके में है जिससे वे इन तस्वीरों को AI ट्रेनिंग के लिए बेहतरीन डेटासेट में बदलते हैं ।

करीब 8,000 किसानों के साथ काम किया था। भारत के कई राज्यों में सिर्फ इसी सीज़न में यह आंकड़ा एक लाख किसानों को पार कर चुका है।

फिलहाल कंपनी में 150 से ज़्यादा पूर्णकालिक कर्मचारी हैं।

अरामको वेंचर्स का इस डील में शामिल होना खुद में एक बड़ी बात है ।

लागुआर्टा इसे एक लाइन में समेटते हुए कहते हैं, “असल में हम एक डेटा कंपनी हैं। और जब आप इस तरह से विस्तार करते हैं, तो आप भी यही बन जाते हैं — पूरी तरह अलग-अलग पारिस्थितिक तंत्रों से डेटा जुटाना और उसी के ऊपर अपना काम खड़ा करना।”

Also Read: जलवायु संकट: जब हमारे पास शब्द ही नहीं हैं तो समझें कैसे?

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