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Environment Pulse > फ्यूचर ग्रीन > ऊर्जा > इंडिया एनर्जी समिट एंड एक्सपो 2026: स्वच्छ और तकनीक आधारित ऊर्जा भविष्य का रोडमैप सामने आया
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इंडिया एनर्जी समिट एंड एक्सपो 2026: स्वच्छ और तकनीक आधारित ऊर्जा भविष्य का रोडमैप सामने आया

Environment Pulse
Last updated: August 20, 2026 9:10 pm
Environment Pulse
Published: August 20, 2026
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हैदराबाद में आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन में नीति-निर्माताओं, तकनीकी विशेषज्ञों और निवेशकों ने भारत के स्वच्छ व तकनीक-आधारित ऊर्जा भविष्य का रोडमैप साझा किया।

एनवायरमेंट पल्स डेस्क। तेलंगाना के स्वच्छ, सुरक्षित और भविष्य के लिए तैयार ऊर्जा तंत्र के निर्माण की रणनीति को 6वें इंडिया एनर्जी समिट एंड एक्सपो 2026 में प्रमुखता से सामने रखा गया।

हैदराबाद इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन में नीति-निर्माताओं, नियामकों, बिजली कंपनियों, सार्वजनिक उपक्रमों, निवेशकों, अक्षय ऊर्जा डेवलपर्स, तकनीकी कंपनियों और ऊर्जा विशेषज्ञों ने भारत के ऊर्जा संक्रमण की दिशा पर व्यापक चर्चा की।

तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री और वित्त, योजना एवं ऊर्जा मंत्री भट्टी विक्रमार्का मल्लू मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। सम्मेलन में राज्य की दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति पर चर्चा करते हुए बताया गया कि तेलंगाना का लक्ष्य वर्ष 2030 तक करीब 20,000 मेगावाट और 2035 तक 26,000 मेगावाट से अधिक सौर ऊर्जा क्षमता विकसित करना है।

इसके साथ ही 2035 तक लगभग 8,000 मेगावाट ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करने की योजना है, जिसमें बैटरी एनर्जी स्टोरेज और पंप्ड स्टोरेज सिस्टम की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

सम्मेलन के पहले दिन हैदराबाद के तकनीक, फार्मास्यूटिकल्स, नवाचार और औद्योगिक विकास में ऊर्जा की बढ़ती भूमिका पर जोर दिया। बढ़ती बिजली मांग और वैश्विक ऊर्जा अस्थिरता के बीच अक्षय ऊर्जा भारत के आर्थिक और औद्योगिक विकास की अनिवार्य जरूरत बन चुकी है। तेलंगाना ऊर्जा विभाग के विशेष मुख्य सचिव नवीन मित्तल ने भारत के अक्षय ऊर्जा संक्रमण के अगले चरण पर प्रकाश डाला। उन्होंने सौर ऊर्जा की लागत में आई कमी, सौर क्षमता में वृद्धि और चौबीसों घंटे उपलब्ध अक्षय ऊर्जा की संभावनाओं का उल्लेख करते हुए ऊर्जा भंडारण और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को भविष्य के ऊर्जा तंत्र के अहम हिस्से बताया।

एनफिनिटी ग्लोबल इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी संदीप अग्रवाल ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर, विनिर्माण और उन्नत उद्योगों के विस्तार के साथ तेलंगाना की बिजली की जरूरत तेजी से बढ़ेगी। ऐसे में ऊर्जा अवसंरचना और प्रभावी नीतियां राज्य की आर्थिक महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

तेलंगाना एआई इनोवेशन हब के संस्थापक ग्लोबल सीईओ फणी नागार्जुन ने ऊर्जा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बीच बढ़ते संबंध पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि प्रत्येक एआई मॉडल और डिजिटल सिस्टम के पीछे बड़ी मात्रा में ऊर्जा की आवश्यकता होती है।

इसलिए ऊर्जा दक्षता, स्मार्ट पावर मैनेजमेंट तथा ऊर्जा, कंप्यूटिंग और अवसंरचना के बेहतर समन्वय पर ध्यान देना जरूरी है। सेशेल्स के उच्चायुक्त हरिसोआ लालातियाना अकूश ने ऊर्जा सुरक्षा को आर्थिक विकास, मानवीय प्रगति और आपदा-रोधी क्षमता से जोड़ते हुए सरकारों, उद्योगों, स्टार्टअप और देशों के बीच साझेदारी को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई।

मुख्य अतिथि भट्टी विक्रमार्का मल्लू ने तेलंगाना के लिए एक एकीकृत ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने की प्रतिबद्धता दोहराई। इसमें अक्षय ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण, ट्रांसमिशन, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, ग्रीन हाइड्रोजन, विनिर्माण और डिजिटल तकनीक को एक साथ जोड़ने की योजना है।

उन्होंने बताया कि राज्य का लक्ष्य 2030 तक करीब 3,800 मेगावाट और 2035 तक लगभग 8,000 मेगावाट ऊर्जा भंडारण क्षमता हासिल करना है। सम्मेलन में स्मार्ट ग्रिड और आधुनिक ट्रांसमिशन एवं वितरण व्यवस्था पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बिजली नेटवर्क को अधिक मजबूत, डिजिटल और भरोसेमंद बनाने की जरूरत पर जोर दिया।

इसके अलावा इंडिया एनर्जी विजन 2047, ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, अक्षय ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिजों और ऊर्जा अवसंरचना जैसे विषयों पर भी विचार-विमर्श हुआ। दूसरे दिन हिमाचल प्रदेश के ऊर्जा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव आर.डी. नजीम ने राज्य के स्वच्छ ऊर्जा मॉडल को प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश में जलविद्युत और सौर ऊर्जा घरेलू बिजली उत्पादन की रीढ़ हैं।

राज्य में ग्रीन हाईवे कॉरिडोर और इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग ढांचे के विस्तार पर भी काम किया जा रहा है। जीएच2 इंडिया के गवर्नेंस बोर्ड के अध्यक्ष और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के पूर्व सचिव भूपिंदर एस. भल्ला ने भारत के विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य के संदर्भ में ऊर्जा उपलब्धता के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि भारत की अक्षय ऊर्जा क्षमता 300 गीगावाट का आंकड़ा पार कर चुकी है और करीब 26-27 महीनों में लगभग 100 गीगावाट की अतिरिक्त क्षमता जोड़ी गई है।

दूसरे दिन ग्रामीण भारत के लिए विश्वसनीय बिजली, ऊर्जा सुरक्षा, तापीय ऊर्जा संक्रमण, हाइड्रोजन, ग्रिड-स्तरीय स्टोरेज, इलेक्ट्रिक वाहन, सतत परिवहन, सिटी गैस, स्वच्छ ईंधन और ऊर्जा संक्रमण के लिए वित्तपोषण जैसे विषयों पर चर्चा हुई। ‘पावरिंग इंडियाज एआई फ्यूचर’ सत्र में बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम को एआई, डेटा सेंटर और डिजिटल अवसंरचना की बढ़ती बिजली मांग के अनुरूप विकसित करने पर जोर दिया गया। ‘पावरिंग ग्रोथ: फाइनेंसिंग एनर्जी ट्रांजिशन एंड इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट’ सत्र में स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं और औद्योगिक विकास के लिए पूंजी, निवेश और वित्तीय तंत्र की जरूरत पर चर्चा की गई।

इंडिया एनर्जी एक्सपो सम्मेलन का प्रमुख आकर्षण रहा, जहां अक्षय ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण, ग्रिड अवसंरचना, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, डिजिटल तकनीक और स्वच्छ ईंधन से जुड़ी तकनीकों और उत्पादों का प्रदर्शन किया गया। इस मंच ने सरकारी प्रतिनिधियों, बिजली कंपनियों, निवेशकों और उद्योग जगत को नई तकनीकों और समाधानों को करीब से समझने का अवसर दिया।

सम्मेलन के दौरान एनर्जी अवॉर्ड्स समारोह भी आयोजित किया गया। इसमें ऊर्जा क्षेत्र में नवाचार, स्थिरता, तकनीकी अपनाने, अवसंरचना विकास और नेतृत्व के लिए विभिन्न संगठनों और विशेषज्ञों को सम्मानित किया गया। सम्मेलन को ऊर्जा और संसाधन संस्थान (TERI), ओडिशा सरकार, सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड, एनफिनिटी ग्लोबल, एनटीपीसी सहित कई सार्वजनिक उपक्रमों, उद्योग समूहों और तकनीकी संस्थानों का सहयोग मिला।

दो दिवसीय इंडिया एनर्जी समिट एंड एक्सपो 2026 ने भारत के ऊर्जा भविष्य को लेकर एक व्यापक तस्वीर पेश की। सम्मेलन में इस बात पर जोर रहा कि आने वाले वर्षों में ऊर्जा नीति केवल बिजली उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि अक्षय ऊर्जा, स्टोरेज, स्मार्ट ग्रिड, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, ग्रीन हाइड्रोजन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल तकनीक और वित्तीय संसाधनों को एकीकृत करके ऐसा ऊर्जा तंत्र तैयार करना होगा जो स्वच्छ, सुरक्षित, किफायती, लचीला और तकनीकी रूप से उन्नत हो।

Also Read: मानसून ने बदली कश्मीर की तस्वीर

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