By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
Environment PulseEnvironment PulseEnvironment Pulse
Notification Show More
Font ResizerAa
  • ईको सिस्टम
    • जल
    • जंगल
    • जमीन
    • हवा
    • खनिज
    • जैव-विविधता
    • गतिविधियां
  • कचरा-प्रबंधन
    • ग्रीन बिजनेस
    • रीसाइकलिंग
    • इन्नोवेशन
    • इनिशिएटिव्स
  • फ्यूचर ग्रीन
    • ऊर्जा
    • सस्टेनिबिलिटी
    • इलेक्ट्रिक व्हीकल
    • कृषि एवं खाद्य
  • ओपिनियन
    • विचार
    • इम्पैक्ट फीचर
    • स्टोरी
  • मल्टीमीडिया
    • वीडियो
Reading: दिल्ली-एनसीआर की हवा को साफ करने की नई तैयारी, स्टोन क्रशर भी निगरानी के घेरे में
Share
Font ResizerAa
Environment PulseEnvironment Pulse
  • ईको सिस्टम
  • कचरा-प्रबंधन
  • फ्यूचर ग्रीन
  • ओपिनियन
  • मल्टीमीडिया
Search
  • ईको सिस्टम
    • जल
    • जंगल
    • जमीन
    • हवा
    • खनिज
    • जैव-विविधता
    • गतिविधियां
  • कचरा-प्रबंधन
    • ग्रीन बिजनेस
    • रीसाइकलिंग
    • इन्नोवेशन
    • इनिशिएटिव्स
  • फ्यूचर ग्रीन
    • ऊर्जा
    • सस्टेनिबिलिटी
    • इलेक्ट्रिक व्हीकल
    • कृषि एवं खाद्य
  • ओपिनियन
    • विचार
    • इम्पैक्ट फीचर
    • स्टोरी
  • मल्टीमीडिया
    • वीडियो
Have an existing account? Sign In
Follow US
Environment Pulse > ईको सिस्टम > हवा > दिल्ली-एनसीआर की हवा को साफ करने की नई तैयारी, स्टोन क्रशर भी निगरानी के घेरे में
AI Image
Newsहवा

दिल्ली-एनसीआर की हवा को साफ करने की नई तैयारी, स्टोन क्रशर भी निगरानी के घेरे में

Environment Pulse
Last updated: August 21, 2026 8:20 pm
Environment Pulse
Published: August 21, 2026
Share
AI Image
SHARE

प्रदूषण में बड़ा योगदान देने वाले हल्के (N-1 श्रेणी) और भारी (N-2 श्रेणी) मालवाहक वाहनों (डीजल, पेट्रोल, सीएनजी) के नए पंजीकरण पर दिल्ली और एनसीआर के विभिन्न जिलों में 2027 से 2029 के बीच चरणबद्ध पाबंदी लगाई जाएगी।

एनवायरमेंट पल्स डेस्क। दिल्ली-एनसीआर में सांस लेना अब थोड़ा आसान बनाने की कोशिश एक कदम और आगे बढ़ी है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) की पूर्ण बैठक राजेश वर्मा की अध्यक्षता में हुई, और इसमें जो फैसले लिए गए वे सीधे उन वाहनों और इकाइयों पर निशाना साधते हैं जो संख्या में कम होने के बावजूद प्रदूषण में बड़ा योगदान देते हैं।

आंकड़े खुद बोलते हैं — हल्के मालवाहक वाहन सड़क पर चलने वाले कुल वाहनों का महज 1.2 प्रतिशत हैं, लेकिन पीएम उत्सर्जन में इनकी हिस्सेदारी करीब 3.3 प्रतिशत तक पहुंच जाती है। यही असंतुलन अब नए निर्देश संख्या-102 की वजह बना है, जिसके तहत डीजल, पेट्रोल और सीएनजी से चलने वाले एन-1 श्रेणी के हल्के मालवाहक वाहनों के नए पंजीकरण पर चरणबद्ध रोक लगेगी।

दिल्ली में यह पाबंदी 1 जनवरी 2027 से शुरू होगी, इसके बाद गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, गाजियाबाद और गौतमबुद्धनगर जैसे ज्यादा वाहन-घनत्व वाले जिलों में 1 जुलाई 2027 से यह नियम लागू होगा, जबकि एनसीआर के बाकी जिलों को 1 जनवरी 2028 तक का समय दिया गया है।

एन-2 श्रेणी के वाहनों पर यही पाबंदी 1 जनवरी 2028, 1 जुलाई 2028 और 1 जनवरी 2029 के चरणों में लागू होगी। वाहनों के अलावा इस बार स्टोन क्रशिंग इकाइयों पर भी आयोग की नजर सख्त हुई है। निर्देश संख्या-103 के तहत अब केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के 2023 के पर्यावरणीय दिशानिर्देशों वाले धूल-नियंत्रण उपाय इन इकाइयों की संचालन स्वीकृति की अनिवार्य शर्त बन जाएंगे।

निगरानी के लिए वीडियो कैमरे, पीएम 2.5 और पीएम 10 सेंसर, और वाहनों के पहिये धोने जैसी व्यवस्थाएं भी जोड़ी जाएंगी ताकि इन इकाइयों पर दूर बैठे भी लगातार नजर रखी जा सके। जिन इकाइयों को पहले बंद करने का आदेश मिल चुका है, उनके दोबारा शुरू होने की राह भी अब आसान नहीं रह गई — उन्हें सुधारात्मक कदमों के सबूत, जरूरी दस्तावेज और नोटरी से प्रमाणित शपथ पत्र जमा करने होंगे, जिसके बाद राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति मिलकर जांच करेंगी।

जरूरत पड़ने पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति भी वसूली जाएगी, और आयोग खुद भी सीपीसीबी की विशेष टीमों के जरिए औचक सत्यापन करा सकता है — नियम तोड़ने पर इकाई दोबारा बंद हो सकती है। बैठक में शोध को भी बढ़ावा मिला।

2025-26 के लिए आमंत्रित प्रस्तावों में से सड़क की धूल के खतरे, सड़कों की मशीनी सफाई, ऊंची इमारतों में कणीय पदार्थों की पहचान, और पराली जलाने की पूर्वानुमान प्रणाली से जुड़ी चार परियोजनाओं को दो साल के लिए कुल 3.25 करोड़ रुपये से ज्यादा की मदद मंजूर हुई। इसके अलावा मध्य-पूर्व के संघर्ष से पैदा हुए ऊर्जा संकट को देखते हुए उद्योगों, होटलों और रेस्तरां को प्राकृतिक गैस की जगह वैकल्पिक ईंधन इस्तेमाल करने की छूट 13 सितंबर 2026 तक बढ़ा दी गई है।

पुराने निर्देशों में भी बदलाव हुआ — निर्देश संख्या-86 का दायरा अब एनसीआर के अन्य नगर निगमों और बड़े शहरों तक फैला दिया गया है, जबकि निर्देश संख्या-98 के तहत उद्योगों के लिए सख्त कणीय पदार्थ उत्सर्जन मानक लागू करने की समयसीमा बढ़ाकर 1 अक्टूबर 2026 कर दी गई है। जमीनी कार्रवाई की बात करें तो 10 अगस्त 2026 तक नियम तोड़ने वाली 1,816 इकाइयों को बंद करने के आदेश दिए जा चुके थे, जिनमें से 1,461 ने नियमों का पालन किया और उनके दोबारा शुरू होने पर विचार हुआ, जबकि 126 मामले आगे की कार्रवाई के लिए संबंधित बोर्डों को भेजे गए।

वहीं 2024-25 में बायोमास को-फायरिंग का लक्ष्य चूकने वाले छह थर्मल पावर प्लांटों पर लगे 61.85 करोड़ रुपये के जुर्माने में से अब तक करीब आधी यानी 30.92 करोड़ रुपये की वसूली हो चुकी है, जो एनजीटी के आदेशों के अनुपालन में की गई कार्रवाई है। इस बीच जीआरएपी का पहला चरण इस साल 19 मई को लागू हुआ था और महज 11 दिन बाद, 29 मई को हटा भी लिया गया।

हरियाली बढ़ाने की मुहिम भी जारी है — 2026-27 के लिए तय 4.6 करोड़ पौधे लगाने के लक्ष्य के मुकाबले 4 अगस्त 2026 तक करीब 2.53 करोड़ पौधे लगाए जा चुके थे, और आयोग ने अधिकारियों को तय समय में लक्ष्य पूरा करने के साथ-साथ लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए हैं।

Also Read: इंडिया एनर्जी समिट एंड एक्सपो 2026: स्वच्छ और तकनीक आधारित ऊर्जा भविष्य का रोडमैप सामने आया

You Might Also Like

कर्नाटक ने में नेट जीरो का लक्ष्य हासिल करने के लिए टास्क फोर्स गठित
मॉस्को राउंडटेबल में भारत ने हिम तेंदुआ संरक्षण की वैज्ञानिक उपलब्धियों को किया साझा
एनसीआर में ‘परिवर्तन’ से प्रदूषण पैदा करने वाले वाहनों की संख्या कम करने पर जोर
Indian Cinema: Promoting Environment Through Stories
निम्स दाई – पहाड़ों का वह शेर जो अब कभी लौटेगा नहीं
TAGGED:CAQM GuidelinesCommercial Vehicle BanDelhi NCR Air PollutionDust Control MeasuresEnvironmental PenaltiesStone Crusher Monitoring
Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp LinkedIn Email Copy Link Print
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
LinkedInFollow
Popular News
(फोटो सौजन्य-एआई)
सस्टेनिबिलिटी

बंगाल की खाड़ी के ऊपर दिखा ओज़ोन का रहस्यमयी घेरा, भारतीय वैज्ञानिकों ने सुलझाई वायुमंडल की अनसुलझी पहेली

Environment Pulse
Environment Pulse
August 11, 2026
किफायती एएसएफ टीकों का वैश्विक आपूर्तिकर्ता बन सकता है भारत
इलेक्ट्रिक वाहनों पर 30, 50 हजार और एक लाख रुपये तक की सब्सिडी
स्टाफ की भारी कमी से जूझ रहा वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM), आरटीआई में हुआ खुलासा
चीन-जॉर्डन संबंधों में हरित मोड़, ईवी और नवीकरणीय ऊर्जा से बढ़ रहा व्यापार

Categories

  • जल
  • जमीन
  • जंगल
  • जैव-विविधता
  • हवा
  • खनिज
  • ऊर्जा
  • ग्रीन जॉब
  • स्टोरी
  • इम्पैक्ट फीचर
  • वीडियो

About US

Environmentpulse.com is a bilingual (Hindi-English) news platform that presents high-quality news, views, and videos related to the environment.
Quick Link
  • ऊर्जा
  • खनिज
  • जैव-विविधता
  • जंगल
Top Categories
  • My Bookmark
  • Contact
  • Privacy Policy
Environment PulseEnvironment Pulse
© Pratham Publisher and Informatics Private Limited. All Rights Reserved. | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?