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Environment Pulse > फ्यूचर ग्रीन > सस्टेनिबिलिटी > किफायती एएसएफ टीकों का वैश्विक आपूर्तिकर्ता बन सकता है भारत
(फोटो सौजन्य-एआई)
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किफायती एएसएफ टीकों का वैश्विक आपूर्तिकर्ता बन सकता है भारत

Environment Pulse
Last updated: August 5, 2026 9:22 pm
Environment Pulse
Published: August 5, 2026
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(फोटो सौजन्य-एआई)
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आईसीसीआर के वैज्ञानिकों ने पिछले दिनों खोजा है अफ्रीकन स्वाइन फीवर का टीका

इससे संक्रमित सुअरों को बचाने का नहीं था अभी तक कोई उपाय, उन्हें मारना पड़ता था

एनवायरमेंट पल्स डेस्क

जैसे इंसान के लिए स्वस्थ रहना जरूरी है, वैसे ही जीव-जंतुओं का भी स्वस्थ रहना आवश्यक है।  जैसे-जैसे विज्ञानं प्रगति कर रहा है, वैसे-वैसे भारत में पशु स्वास्थ्य की बेहतरी के लिए बड़े स्तर पर काम चल रहा है।  इसके चलते भारत ने इस क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। भारत ने अफ्रीकी स्वाइन फीवर (एएसएफ) के खिलाफ पहला स्वदेशी टीका विकसित किया है ।

भोपाल स्थित आईसीएआर-एनआईएचएसएडी के वैज्ञानिकों ने यह कामयाबी हासिल की है।  इन वैज्ञानिकों ने अफ्रीकी स्वाइन फीवर (एएसएफ) के खिलाफ पहला स्वदेशी टीका विकसित किया है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पिछले दिनों आईसीएआर के स्थापना दिवस के मौके पर इस टीके को राष्ट्र को समर्पित किया।

अफ्रीकी स्वाइन फीवर एक गंभीर बीमारी है जो सूअरों में फैलता है। इससे मृत्यु दर शत- प्रतिशत पहुँच जाता है। इसके चलते काफी दिक्कतों का सामना करना पढता है। भारत में  इसका पहला मामला  2020 में देखा गया था। इसके बाद यह बीमारी कई राज्यों में फैल चुकी है, जिससे सूअर पालकों को भारी नुकसान झेलना पड़ा है।

इस बीमारी के चलते असम में करीब 276 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।  मिजोरम में हजारों परिवार लगभग 982 करोड़ रुपये की क्षति उठा चुके हैं। अभी तक इस बीमारी से बचाव के लिए न तो कोई प्रभावी इलाज था और न ही कोई स्वीकृत टीका। किसानों को संक्रमित पशुओं को मारने जैसे कठोर कदमों पर निर्भर रहना पड़ता था।

भोपाल स्थित आईसीएआर-एनआईएचएसएडी के वैज्ञानिकों ने एमए-104 सेल लाइन (MA-104 cell line) पर आधारित एक टीका तैयार किया है। आठ सप्ताह से बड़े स्वस्थ सूअरों को यह इंजेक्शन के जरिए दिया जाएगा, जिसके 14 दिन बाद एक बूस्टर खुराक भी दी जाएगी।

जानकारी के मुताबिक,  भारत का यह टीका एक ऐसे सेल लाइन पर निर्भर है जो आसानी से उपलब्ध है।  ज़ाहिर तौर पर इससे  उत्पादन और अच्छे तरह से सम्भव होगा।  लागत भी काफी कम आएगी।  टीका न सिर्फ भारतीय सूअर पालकों की आजीविका बचाएगा, बल्कि आने वाले समय में भारत को किफायती एएसएफ टीकों का वैश्विक आपूर्तिकर्ता बनाने की दिशा में भी अहम भूमिका निभा सकता है।

भारत, भूटान को सबसे ज्यादा निर्यात करता है पोर्क

सुअरों का स्वास्थ्य पोर्क बिजनेस से जुड़ा हुआ है। सुअरों के मांस के व्यापार में भारत का स्थान हालांकि काफी पीछे है लेकिन फिर भी भारत को इससे ठीकठाक विदेशी मुद्दा अर्जित होती है। सुअर का मांस (पोर्क) की खपत नार्थ-ईस्ट के राज्यों में सबसे ज्यादा है। नार्थ-ईस्ट में पोर्क बिजनेस के मामले में न केवल भारत आत्मनिर्भर है, बल्कि वह कई देशों को पोर्क का एक्सपोर्ट भी करता है। इसमें सबसे बड़ा आयातक भूटान है, जिसके 99 फीसदी पोर्क जरूरतों को भारत अपने निर्यात से पूरा करता है। भूटान के अलावा कई अन्य देश भी हैं, जिन्हें भारत पोर्क का निर्यात करता है।

Also Read: हिमाचल प्रदेश ने खनिज राजस्व प्राप्ति के मामले में बनाया कीर्तिमान

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