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Environment Pulse > फ्यूचर ग्रीन > इलेक्ट्रिक व्हीकल > चीन-जॉर्डन संबंधों में हरित मोड़, ईवी और नवीकरणीय ऊर्जा से बढ़ रहा व्यापार
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चीन-जॉर्डन संबंधों में हरित मोड़, ईवी और नवीकरणीय ऊर्जा से बढ़ रहा व्यापार

Environment Pulse
Last updated: August 19, 2026 9:10 pm
Environment Pulse
Published: August 19, 2026
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किंग अब्दुल्ला द्वितीय की 9वीं चीन यात्रा के बीच 2025 में दोनों देशों का व्यापार 6.72 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा। जॉर्डन में चीनी EV का आयात 2019 में 72 वाहनों से बढ़कर 2023 में 33,386 हो गया, जिससे व्यापार तकनीक-केंद्रित हुआ है।

एनवायरमेंट पल्स डेस्क। चीन और जॉर्डन के आर्थिक संबंध अब पारंपरिक वस्तु और संसाधन आधारित कारोबार से आगे बढ़कर हरित ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहनों और तकनीक आधारित सहयोग की दिशा में तेजी से बढ़ रहे हैं। दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्तों में यह बदलाव आने वाले वर्षों में नए निवेश और आर्थिक अवसरों का आधार बन सकता है।

जॉर्डन के हाशमी साम्राज्य के किंग अब्दुल्ला द्वितीय इब्न अल हुसैन 18 से 24 अगस्त तक चीन की राजकीय यात्रा पर हैं। सत्ता संभालने के बाद यह उनकी चीन की नौवीं यात्रा है। ऐसे समय में हो रही यह उच्चस्तरीय यात्रा दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में महत्वपूर्ण मोड़ मानी जा रही है।

चीन के विदेश मंत्रालय के नवीनतम आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2025 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 6.72 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो अब तक का उच्चतम स्तर है। चीन से जॉर्डन को इलेक्ट्रोमैकेनिकल उपकरण, दूरसंचार उत्पाद, कपड़ा और तेजी से बढ़ती नई ऊर्जा वाहन (NEV) की खेप मिलती है, जबकि जॉर्डन चीन को उर्वरक और पोटैशियम क्लोराइड जैसे प्रमुख संसाधन उत्पाद निर्यात करता है।

इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग में तेज उछाल चीन के इलेक्ट्रिक और नई ऊर्जा वाहनों का बढ़ता निर्यात दोनों देशों के व्यापार में बदलाव का सबसे स्पष्ट उदाहरण है। शिन्हुआ के हवाले से उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जॉर्डन के जरका फ्री जोन में स्थानीय डिलीवरी के लिए क्लीयर किए गए चीनी NEV की संख्या 2019 में केवल 72 थी।

यह संख्या 2022 में बढ़कर 12,820 और 2023 में 33,386 हो गई। 2024 के शुरुआती दो महीनों में ही 6,643 चीनी NEV स्थानीय डिलीवरी के लिए क्लीयर किए गए। कीमत, गुणवत्ता, विश्वसनीयता और कम कार्बन उत्सर्जन जैसी खूबियों के कारण चीनी इलेक्ट्रिक वाहन जॉर्डन के आम उपभोक्ता बाजार में तेजी से अपनी जगह बना रहे हैं।

इससे दोनों देशों का व्यापार पारंपरिक कम मूल्य वाले उत्पादों से हटकर अधिक तकनीक आधारित और पर्यावरण अनुकूल उत्पादों की ओर बढ़ रहा है। नवीकरणीय ऊर्जा सहयोग बना नया आधार हरित ऊर्जा में निवेश ने चीन-जॉर्डन आर्थिक सहयोग को एक और महत्वपूर्ण आयाम दिया है।

चीन थ्री गॉर्जेज इंटरनेशनल से जुड़ी एशिया-अफ्रीका ग्रीन एनर्जी इन्वेस्टमेंट कंपनी जॉर्डन के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में प्रमुख चीनी निवेशकों में शामिल है। कंपनी वर्तमान में जॉर्डन में सात नवीकरणीय ऊर्जा संयंत्र संचालित कर रही है, जिनमें दो पवन ऊर्जा परियोजनाएं और पांच सौर फोटोवोल्टिक संयंत्र शामिल हैं।

इन परियोजनाओं की कुल स्थापित क्षमता जॉर्डन के राष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा पोर्टफोलियो की करीब 14 प्रतिशत है। इनसे हर साल लगभग 53 करोड़ किलोवाट-घंटे स्वच्छ बिजली पैदा होती है। इन परियोजनाओं से हर साल करीब 1.75 लाख स्थानीय घरों को बिजली मिलती है।

साथ ही लगभग 3 लाख टन कार्बन उत्सर्जन कम करने और करीब 8.5 लाख टन पानी बचाने में मदद मिलती है। इससे जॉर्डन के ऊर्जा संक्रमण और कार्बन कटौती लक्ष्यों को समर्थन मिल रहा है। कंपनी तीन और स्थानीय नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं का अधिग्रहण कर रही है। इनके पूरा होने के बाद उसकी स्थापित क्षमता जॉर्डन के राष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा नेटवर्क की लगभग एक चौथाई तक पहुंच सकती है। हरित विकास में नई साझेदारी इलेक्ट्रिक वाहन कारोबार के विस्तार, संसाधन आधारित उद्योगों में सहयोग और नवीकरणीय ऊर्जा निवेश के बढ़ने से चीन और जॉर्डन अपने आर्थिक हितों को अधिक प्रभावी ढंग से जोड़ रहे हैं। दोनों देशों के बीच सहयोग अब केवल व्यापार तक सीमित न रहकर तकनीक, स्वच्छ ऊर्जा और सतत विकास की दिशा में बढ़ रहा है। किंग अब्दुल्ला द्वितीय की चीन यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब दोनों देश मौजूदा परियोजनाओं को मजबूत करने और नए निवेश अवसर तलाशने पर जोर दे रहे हैं। माना जा रहा है कि दोनों पक्ष व्यापार और निवेश बढ़ाने, जनसंपर्क तथा बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने और रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई देने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। चीन-जॉर्डन सहयोग का यह हरित मॉडल पश्चिम एशिया में स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और टिकाऊ आर्थिक विकास के लिए भी नए अवसर पैदा कर सकता है।

Also Read: अफ्रीका की हरित अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए समन्वित ‘ग्रीन स्किल्स’ रणनीति

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