फ्रांस में इस गर्मी पड़े भीषण तापमान के कारण शैंपेन, बोर्डो और बरगंडी जैसे प्रमुख क्षेत्रों में अंगूर की कटाई पारंपरिक समय से कई सप्ताह पहले (अगस्त के अंत में) शुरू करनी पड़ी है। जलवायु परिवर्तन और बढ़ती गर्मी के कारण अंगूर जल्दी पक रहे हैं, जिससे उत्पादकों के सामने श्रमिकों की कमी और वाइन के स्वाद संतुलन को बनाए रखने जैसी नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क। फ्रांस में इस गर्मी पड़ी भीषण गर्मी ने देश के प्रतिष्ठित वाइन उद्योग के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। लगातार सामान्य से अधिक तापमान के कारण शैंपेन समेत कई प्रमुख वाइन क्षेत्रों में अंगूर की कटाई असामान्य रूप से जल्दी शुरू करनी पड़ी।
इसे आधुनिक रिकॉर्ड में सबसे शुरुआती कटाई के दौर में से एक माना जा रहा है और विशेषज्ञ इसे जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव का स्पष्ट संकेत बता रहे हैं।
शैंपेन, बोर्डो, बरगंडी, लॉयर घाटी और रोन समेत प्रमुख वाइन क्षेत्रों में लंबे समय तक जारी गर्मी ने अंगूर के पकने की प्रक्रिया को तेज कर दिया। शैंपेन क्षेत्र में अंगूरों में शर्करा का स्तर तेजी से बढ़ा, जबकि अम्लता घटने लगी।
इसके चलते उत्पादकों को पारंपरिक समय से कई सप्ताह पहले फसल काटने का फैसला करना पड़ा। कुछ क्षेत्रों में अगस्त के अंतिम सप्ताह में ही अंगूर तोड़ने का काम शुरू हो गया, जबकि आमतौर पर यह प्रक्रिया सितंबर के मध्य या अंत में शुरू होती है।
वाइन उत्पादकों के मुताबिक कई इलाकों में दिन का तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंचता रहा और रात में भी तापमान अपेक्षाकृत ऊंचा बना रहा। तेज गर्मी के साथ बारिश की कमी ने अंगूर की बेलों पर अतिरिक्त दबाव डाला।
इससे फलों में शर्करा तेजी से केंद्रित हुई और कुछ खेतों में अंगूर तेज धूप के कारण सिकुड़ने भी लगे। उत्पादकों को गुणवत्ता बनाए रखने के लिए जल्द से जल्द फसल काटनी पड़ी। अचानक शुरू हुई कटाई ने वाइनरी संचालकों के सामने कई व्यवस्थागत चुनौतियां खड़ी कर दीं। कम समय में श्रमिकों की व्यवस्था करने, तहखानों और प्रसंस्करण इकाइयों को तैयार करने तथा किण्वन की योजनाओं में बदलाव करने की जरूरत पड़ी।
पहले से श्रमिकों की कमी से जूझ रहे इस उद्योग में कम समय में बड़ी मात्रा में अंगूर तोड़ने की जरूरत ने समस्या और बढ़ा दी। कई उत्पादकों ने अतिरिक्त मौसमी श्रमिक बुलाए और काम के घंटे बढ़ाए।
वाइन विशेषज्ञों के अनुसार जल्दी कटाई का कुछ सकारात्मक प्रभाव भी हो सकता है। इससे अंगूरों में अधिक केंद्रित स्वाद और अधिक अल्कोहल क्षमता विकसित हो सकती है।
हालांकि, अत्यधिक गर्मी के कारण अम्लता कम होने पर तैयार वाइन का संतुलन और सुगंध प्रभावित होने का जोखिम भी रहता है। शैंपेन के उत्पादकों के लिए यह चुनौती विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि स्पार्कलिंग वाइन की पहचान उसकी ताजगी और शर्करा-अम्लता के सटीक संतुलन से होती है।
बदलती परिस्थितियों के बीच कुछ उत्पादक मिश्रण की रणनीति में बदलाव और अन्य तकनीकी उपायों के जरिए पारंपरिक स्वाद और गुणवत्ता बनाए रखने की तैयारी कर रहे हैं। इस वर्ष की असामान्य रूप से जल्दी शुरू हुई कटाई पिछले कुछ दशकों में सामने आए व्यापक बदलाव की अगली कड़ी है।
ऐतिहासिक आंकड़ों के अनुसार, 1980 के दशक की तुलना में फ्रांस में अंगूर की कटाई शुरू होने का औसत समय लगभग दो से तीन सप्ताह आगे खिसक चुका है। बढ़ते तापमान को इस बदलाव का प्रमुख कारण माना जाता है।
जलवायु वैज्ञानिकों और कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक गर्मी की घटनाएं अधिक सामान्य होती जा रही हैं। इसके चलते फ्रांस के वाइन उद्योग को दीर्घकालिक रणनीतियों पर विचार करना पड़ रहा है। इनमें अधिक गर्मी सहने वाली अंगूर की किस्मों का चयन, बेलों की पत्तियों और छतरी के प्रबंधन में बदलाव तथा अपेक्षाकृत अधिक ऊंचाई या ठंडे क्षेत्रों में नई बेलें लगाने जैसे उपाय शामिल हैं।
मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद कई उत्पादक इस वर्ष की फसल को लेकर सावधानीपूर्ण आशावादी हैं। शुरुआती आकलनों के अनुसार कुछ क्षेत्रों में उत्पादन संतोषजनक रहने की उम्मीद है। खेतों और वाइनरी में अंगूरों की बेहतर छंटाई तथा सावधानीपूर्वक प्रसंस्करण से गुणवत्ता को बचाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, इस असामान्य मौसम ने फ्रांस के वाइन क्षेत्र में जलवायु अनुकूलन को लेकर चर्चा तेज कर दी है।
उत्पादक अब अधिक निवेश, वैज्ञानिक अनुसंधान और टिकाऊ अंगूर उत्पादन तकनीकों की मांग कर रहे हैं ताकि भविष्य में बढ़ती गर्मी और बदलते मौसम के प्रभावों का सामना किया जा सके। देशभर में अंगूर की कटाई जारी रहने के बीच अब निगाहें 2026 की वाइन विंटेज की गुणवत्ता पर टिकी हैं।
फिलहाल, सामान्य समय से कई सप्ताह पहले शुरू हुई यह कटाई इस बात का प्रत्यक्ष उदाहरण बन गई है कि बढ़ती गर्मी फ्रांस की सदियों पुरानी और प्रतिष्ठित कृषि परंपरा को किस तरह बदल रही है।

