By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
Environment PulseEnvironment PulseEnvironment Pulse
Notification Show More
Font ResizerAa
  • ईको सिस्टम
    • जल
    • जंगल
    • जमीन
    • हवा
    • खनिज
    • जैव-विविधता
    • गतिविधियां
  • कचरा-प्रबंधन
    • ग्रीन बिजनेस
    • रीसाइकलिंग
    • इन्नोवेशन
    • इनिशिएटिव्स
  • फ्यूचर ग्रीन
    • ऊर्जा
    • सस्टेनिबिलिटी
    • इलेक्ट्रिक व्हीकल
    • कृषि एवं खाद्य
  • ओपिनियन
    • विचार
    • इम्पैक्ट फीचर
    • स्टोरी
  • मल्टीमीडिया
    • वीडियो
Reading: कंबोडिया के वनों में विहार करेंगे भारत के बाघ
Share
Font ResizerAa
Environment PulseEnvironment Pulse
  • ईको सिस्टम
  • कचरा-प्रबंधन
  • फ्यूचर ग्रीन
  • ओपिनियन
  • मल्टीमीडिया
Search
  • ईको सिस्टम
    • जल
    • जंगल
    • जमीन
    • हवा
    • खनिज
    • जैव-विविधता
    • गतिविधियां
  • कचरा-प्रबंधन
    • ग्रीन बिजनेस
    • रीसाइकलिंग
    • इन्नोवेशन
    • इनिशिएटिव्स
  • फ्यूचर ग्रीन
    • ऊर्जा
    • सस्टेनिबिलिटी
    • इलेक्ट्रिक व्हीकल
    • कृषि एवं खाद्य
  • ओपिनियन
    • विचार
    • इम्पैक्ट फीचर
    • स्टोरी
  • मल्टीमीडिया
    • वीडियो
Have an existing account? Sign In
Follow US
Environment Pulse > ईको सिस्टम > जंगल > कंबोडिया के वनों में विहार करेंगे भारत के बाघ
जंगल

कंबोडिया के वनों में विहार करेंगे भारत के बाघ

Environment Pulse
Last updated: July 4, 2026 9:48 pm
Environment Pulse
Published: July 4, 2026
Share
SHARE

जल्दी ही भारत अपने मित्र देश को भेजेगा छह बाघ

गृहयुद्ध के कारण वहां सरकार नहीं ध्यान दे पाई थी बाघों पर

एनवायरमेंट पल्स डेस्क

भारत अपने पुराने मित्र और अंकोरवाट मंदिर के लिए मशहूर दक्षिण पूर्व एशियाई देश कंबोडिया को जल्दी ही छह बाघ भेजेगा। वर्ष 2016 में कंबोडिया को बाघविहीन देश घोषित किया गया था, जो वहां के वन्यजीव प्रेमियों के लिए बड़ा झटका था। इस संबंध में 2022 में भारत-कंबोडिया के बीच एक समझौता हुआ था, जिसका पालन करते हुए भारत पहली खेप में छह बाघों (बंगाल टाइगर्स) को कंबोडिया भेजेगा।

कंबोडिया को छह बाघ भेजने के बाद कुछ दिनों तक देखा जाएगा। अगर यह प्रयोग सफल रहा अर्थात ये बाघ वहां के माहौल में जीवित रहे, प्रजनन करके अपनी संख्या बढ़ाने में सफल रहे तो भारत वहां पर 12 और बाघ भेजेगा।

ध्यान देने योग्य बात यह है कि भारत बाघों के संरक्षण के लिए कार्य कर रही संस्था इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस का सदस्य है। इसके नाते वह बाघों के संरक्षण और संवर्धन पर खास ध्यान दे रहा है। भारत ने अपने यहां जिस तरह बाघों का संरक्षण किया है, वह दुनिया के लिए एक मिसाल है। इसीलिए कंबोडिया ने भारत से बाघों की मांग की है। यह भी ध्यान देने योग्य बात है कि कंबोडिया में पहले बाघ थे लेकिन 1980 के बाद लंबे समय से गृहयुद्ध में फंसे रहने के कारण सरकार बाघों के संरक्षण पर ध्यान नहीं दे पाई और शिकारियों ने बाघों का शिकार करके देश को बाघविहीन कर दिया।

कंबाडिया ने 2016 में अपने यहां राष्ट्रीय बाघ प्रोजेक्ट को मंजूरी दी। बाद में 2022 में भारत के साथ समझौता किया। इसी कड़ी में ये बाघ वहां भेजे जा रहे हैं।

भारत में बाघों की स्थिति

2022 की पशुगणना के मुताबिक भारत में 3682 बाघ हैं। यह दुनिया के बाघों की आबादी का 70 प्रतिशत है। कह सकते हैं कि भारत इस मामले में बहुत ही समृद्ध है।

दुनिया में दूसरा मामला

एक देश से दूसरे देश बाघ भेजने और उन्हें पुनर्वासित करने का यह दुनिया में दूसरा मामला है। इसके पहले नीदरलैंड से कुछ बाघों को कजाकिस्तान भेजा गया था।

नामीबियाई चीतों जैसी पहल

यह उसी किस्म की पहल है, जिसके तहत 2022 में भारत ने नामीबिया से चीतों को मंगवाया था, जो हमारे यहां विलुप्त हो चुके थे। ये चीते मध्य प्रदेश के कूनो पार्क में रखे गए थे। अब ये चीते भारत की जलवायु में न केवल रच-बस चुके हैं बल्कि इन्होंने अपना परिवार भी बढ़ा लिया है। इसके पहले 1952 में चीतों को भारतीय वनों से पूरी तरह विलुप्त घोषित किया गया था।

 

You Might Also Like

Green India 2047: जलवायु संकट से आत्मनिर्भरता की ओर
35 करोड़ पौधे रोपने का लक्ष्य आसान नहीं, प्रदेश सरकार ने कसी कमर
The World Isn’t Debating Climate Change Anymore, It’s Debating How Fast to Fix It
पर्यावरण संरक्षण को जन-आंदोलन बनाने का आह्वान, मानेसर में 77वें राज्य-स्तरीय वन महोत्सव में बोले सीएम सैनी
गंगा का कहर: जब जीवनदायिनी नदी बन जाती है तबाही की वजह
Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp LinkedIn Email Copy Link Print
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
LinkedInFollow
Popular News
AI Image
जलहवा

प्रवाल विरंजन का सबसे बड़ा वैश्विक संकट, दुनिया की करीब 84% प्रवाल भित्तियां प्रभावित

Environment Pulse
Environment Pulse
August 28, 2026
विश्व बैंक के जलवायु लक्ष्यों से पीछे हटने की कीमत चुका सकते हैं भारत के सबसे संवेदनशील समुदाय
तिलहन प्रौद्योगिकियों के व्यावसायीकरण को गति देने के लिए आईसीएआर-आईआईओआर में राष्ट्रीय परामर्श बैठक
हरे कछुए की वापसी: संकटग्रस्त से ‘कम चिंताजनक’ श्रेणी में पहुंची प्रजाति
स्वच्छ ऊर्जा की ओर तेजी से बढ़ता उत्तर प्रदेश, 20,000 मेगावाट क्षमता का लक्ष्य

Categories

  • जल
  • जमीन
  • जंगल
  • जैव-विविधता
  • हवा
  • खनिज
  • ऊर्जा
  • ग्रीन जॉब
  • स्टोरी
  • इम्पैक्ट फीचर
  • वीडियो

About US

Environmentpulse.com is a bilingual (Hindi-English) news platform that presents high-quality news, views, and videos related to the environment.
Quick Link
  • ऊर्जा
  • खनिज
  • जैव-विविधता
  • जंगल
Top Categories
  • My Bookmark
  • Contact
  • Privacy Policy
Environment PulseEnvironment Pulse
© Pratham Publisher and Informatics Private Limited. All Rights Reserved. | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?