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आर्थिक संवाद से आगे बढ़कर पर्यावरणीय शासन पर फोकस बढ़ा रहा BRICS: भारत

Environment Pulse
Last updated: August 18, 2026 8:26 pm
Environment Pulse
Published: August 18, 2026
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BRICS समूह आर्थिक सहयोग के अलावा अब सतत विकास, सर्कुलर इकोनॉमी, वनीकरण और जलवायु अनुकूलन जैसे पर्यावरणीय शासन के मुद्दों पर एकजुट हो रहा है। ब्राजील, चीन, रूस, यूएई, दक्षिण अफ्रीका और मिस्र सहित सभी सदस्य देशों ने भारत की पहल और व्यापक परामर्श प्रक्रिया की सराहना की।

 

एनवायरमेंट पल्स डेस्क।  उभरता हुआ अंतर-सरकारी आर्थिक समूह BRICS अब केवल आर्थिक सहयोग और संवाद तक सीमित नहीं रह गया है। समूह ने प्रदूषण, जैव विविधता में कमी और वैश्विक तापमान वृद्धि जैसी गंभीर पर्यावरणीय चुनौतियों पर साझा रणनीति बनाने की दिशा में भी अपना दायरा बढ़ाया है।

केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव तन्मय कुमार ने नई दिल्ली में BRICS की वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक में यह बात कही। भारत मंडपम में आयोजित BRICS पर्यावरण कार्य समूह (EWG) और जलवायु परिवर्तन एवं सतत विकास संपर्क समूह (CGCCSD) की बैठक की अध्यक्षता करते हुए कुमार ने कहा कि BRICS की साझेदारी अब सतत विकास, जलवायु लचीलापन और अनुकूलन, संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल, सर्कुलर इकोनॉमी और पर्यावरणीय शासन जैसे क्षेत्रों तक विस्तारित हो चुकी है। उन्होंने कहा कि भारत की BRICS अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस सोच से प्रेरित है, जिसमें वैश्विक सहयोग को लोगों और मानव कल्याण को केंद्र में रखकर आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया है।

इसी सोच को ‘Building for Resilience, Innovation, Cooperation, and Sustainability’ यानी लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण की थीम के माध्यम से आगे बढ़ाया जा रहा है। कुमार के मुताबिक, भारत की अध्यक्षता में पर्यावरण कार्य समूह और जलवायु परिवर्तन एवं सतत विकास संपर्क समूह ने चार प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाया है।

इनमें टिकाऊ जीवनशैली को बढ़ावा देना, वनीकरण, जंगलों में आग की रोकथाम और आपदा से निपटने की क्षमता मजबूत करना, सर्कुलर इकोनॉमी तथा जलवायु परिवर्तन के अनुरूप अनुकूलन शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ये प्राथमिकताएं BRICS देशों के सामने मौजूद साझा पर्यावरणीय चुनौतियों को दर्शाती हैं।

साथ ही, इन चुनौतियों से निपटने के लिए सामूहिक अनुभव, ज्ञान और क्षमता का इस्तेमाल करने की जरूरत को भी रेखांकित करती हैं। जलवायु लचीलापन, पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली, संसाधनों का कुशल उपयोग और सतत विकास एक-दूसरे से जुड़े विषय हैं, इसलिए इनके समाधान भी अलग-अलग स्तर पर नहीं बल्कि एकीकृत और समग्र तरीके से तलाशने होंगे।

कुमार ने बताया कि भारत की अध्यक्षता शुरू होने के बाद BRICS सदस्य देशों के बीच साझा एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए अब तक 21 ऑनलाइन विषयगत और वार्ता बैठकें, 10 द्विपक्षीय परामर्श, दो विषयगत संवाद और दो तकनीकी वेबिनार आयोजित किए जा चुके हैं। उन्होंने इसे पर्यावरण और जलवायु से जुड़े मुद्दों पर सदस्य देशों की गंभीर प्रतिबद्धता का संकेत बताया।

उन्होंने उम्मीद जताई कि अब तक हुई बैठकों में सहयोग, आपसी सम्मान और साझा सहमति की जो भावना बनी है, वह आगे की चर्चाओं में भी कायम रहेगी। बैठक में BRICS के सदस्य देशों ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने BRICS की भारतीय अध्यक्षता के दौरान हुए प्रयासों की सराहना की और प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में हुई चर्चाओं को रचनात्मक बताया। उन्होंने आपसी विश्वास, सम्मान और सहमति आधारित निर्णय प्रक्रिया के माहौल में सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए भारत की भूमिका की प्रशंसा की।

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