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पश्चिमी घाट के इकोलॉजिकल सेंसिटिव एरिया को 8,590 वर्ग किमी तक सीमित करने की केरल की मांग

Environment Pulse
Last updated: September 28, 2026 7:27 pm
Environment Pulse
Published: September 28, 2026
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केरल सरकार ने पश्चिमी घाट के इकोलॉजिकल सेंसिटिव एरिया (ESA) के दायरे को घटाकर 8,590.69 वर्ग किलोमीटर तक सीमित करने का संशोधित प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा है। राज्य ने मांग की है कि इसमें केवल वन भूमि को शामिल किया जाए और आबादी वाले क्षेत्रों, कृषि भूमि तथा बागानों को पूरी तरह बाहर रखा जाए, ताकि स्थानीय लोगों की आजीविका और विकास कार्यों पर कोई विपरीत प्रभाव न पड़े।

एनवायरमेंट पल्स डेस्क : केरल सरकार ने पश्चिमी घाट के इकोलॉजिकल सेंसिटिव एरिया (ESA) को 8,590.69 वर्ग किलोमीटर तक सीमित करने की सिफारिश केंद्र सरकार को भेजी है।

राज्य ने प्रस्तावित क्षेत्र में मुख्य रूप से वन भूमि को शामिल करने और आबादी वाले क्षेत्रों, कृषि भूमि तथा बागानों को इससे बाहर रखने की मांग की है।

पर्यावरण मंत्री सनी जोसेफ ने शुक्रवार को बताया कि संशोधित मानचित्र के साथ प्रस्ताव केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को भेजा गया है। यह प्रस्ताव 27 जुलाई 2026 को जारी केंद्र की सातवीं मसौदा ESA अधिसूचना पर राज्य की प्रतिक्रिया के रूप में निर्धारित समय सीमा से पहले भेजा गया। केरल ने 12 जिलों के 98 गांवों को ESA में शामिल करने का प्रस्ताव दिया है, जबकि केंद्र के नवीनतम मसौदे में 131 गांवों और 9,993.7 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को शामिल किया गया था। राज्य ने गैर-वन क्षेत्र को पूरी तरह बाहर रखने की मांग की है।

पूर्व प्रस्तावित क्षेत्र में करीब 9,107 वर्ग किलोमीटर वन भूमि और 886.7 वर्ग किलोमीटर गैर-वन भूमि थी। केरल सरकार का कहना है कि राज्य की अधिक जनसंख्या घनत्व, पर्याप्त वन क्षेत्र और कृषि, आर्द्रभूमि तथा बागानों के लिए मौजूद पर्यावरणीय नियमों को देखते हुए व्यापक ESA प्रतिबंधों की आवश्यकता नहीं है।

सरकार के अनुसार, ऐसे प्रतिबंध स्थानीय आजीविका और विकास को प्रभावित कर सकते हैं। मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन और मंत्री जोसेफ ने कहा है कि संशोधित प्रस्ताव विस्तृत अध्ययन, जन सुझावों और स्थानीय निकायों से मिले इनपुट के आधार पर तैयार किया गया है।

राज्य विधानसभा में इस संबंध में प्रस्ताव लाने की भी योजना है। पश्चिमी घाट ESA को लेकर केंद्र और गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल तथा तमिलनाडु के बीच एक दशक से अधिक समय से चर्चा जारी है।

केंद्र के नवीनतम मसौदे में छह राज्यों के लिए कुल करीब 56,825.7 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को ESA के रूप में प्रस्तावित किया गया है।

अब केंद्र सरकार केरल के संशोधित प्रस्ताव और अन्य राज्यों की सिफारिशों की समीक्षा के बाद अंतिम अधिसूचना जारी करेगी।

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